एसएसपी झांसी से पूछा शासनादेश के विपरीत कैसे किया आदेश?
प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रिटायरमेंट के छह साल बाद पहले से निर्धारित पेंशन दोबारा तय करने के आदेश पर रोक लगा दी है। साथ ही एसएसपी झांसी से व्यक्तिगत हलफनामे में स्पष्टीकरण मांगा है कि 16 जनवरी 2007 के शासनादेश व सुशील कुमार सिंघल केस के फैसले के विपरीत आदेश कैसे किया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता ने कुंवर सिंह की याचिका पर अधिवक्ता बीएन सिंह राठौर को सुनकर दिया है। एसएसपी झांसी ने याची की पेंशन को तीन दिसंबर 2025 और 10 दिसंबर 2025 के आदेशों से प्राप्त अंतिम वेतन के आधार पर दोबारा तय कर दिया था। यह कार्रवाई याची के रिटायर होने के के छह साल बाद की गई।
एडवोकेट बीएन सिंह राठौर का तर्क था कि 16 जनवरी 2007 के शासनादेश के मुताबिक रिटायरमेंट से पहले हुई वेतन निर्धारण की गलती के आधार पर 34 महीने बाद सेवानिवृत्ति लाभ नहीं घटाए जा सकते। सुप्रीम कोर्ट ने इस शासनादेश को सुशील कुमार सिंघल के केस में सही माना है। कोर्ट ने एसएसपी झांसी से व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह बताने को कहा कि शासनादेश और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन कर आदेश कैसे हुआ?