छह महीने और चलती रहेगी प्रधानी, 57 हजार से ज्यादा पंचायतों में निवर्तमान प्रधानों को ही मिलेगी प्रशासक की जिम्मेदारी, देखें आदेश
प्रधानों को प्रशासक की जिम्मेदारी मिली, पंचायत चुनाव में देरी के कारण सौंपी गई बागडोर
लखनऊ । यूपी में पहली बार ग्राम प्रधानों को प्रशासक पद की जिम्मेदारी दी गई है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में देरी के कारण ग्राम पंचायतों की बागडोर ग्राम प्रधानों के हाथ में ही रखे जाने का निर्णय लिया गया है। मंगलवार को ग्राम प्रधानों का पांच वर्ष का कार्यकाल खत्म हो रहा है। ऐसे में 27 मई से निर्वतमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में काम करेंगे। छह महीने या पंचायत चुनाव होने के बाद नई ग्राम पंचायत की प्रथम बैठक की तिथि तक जो भी पहले हो प्रधानों को प्रशासक पद की जिम्मेदारी दी गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर यह फैसला किया गया है।
प्रमुख सचिव पंचायती राज अनिल कुमार की ओर से ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने का शासनादेश सोमवार को जारी कर दिया गया। वर्ष 2021 में कुल 58195 ग्राम पंचायत प्रधान निर्वाचित हुए थे और उनकी पहली बैठक 27 मई 2021 को हुई थी। ऐसे में ग्राम प्रधानों का पांच वर्ष का कार्यकाल मंगलवार को समाप्त हो रहा है। अभी तक चुनाव न होने की स्थिति में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने पर संबंधित विकास खंड के सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को उस विकास खंड की ग्राम पंचायतों का प्रशासक बना दिया जाता था। ग्राम प्रधानों की मांग पर पहली बार प्रशासक बनाने का निर्णय लिया गया है। ऐसे में ग्राम प्रधानों के पास ग्राम पंचायत की बागडोर पहले की ही तरह रहेगी। हालांकि, ये प्रशासक नीति विषयक निर्णय नहीं ले सकेंगे। सिर्फ रूटीन कार्यों को निपटाएंगे।
प्रधानों को प्रशासक की जिम्मेदारी मिली
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में देरी के कारण जिला पंचायत अध्यक्षों व ब्लॉक प्रमुखों का भी कार्यकाल बढ़ाए जाना तय माना जा रहा है। जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल 11 जुलाई व ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल 19 जुलाई को खत्म होगा। अभी तक जिपं अध्यक्ष का कार्यकाल खत्म होने पर जिलाधिकारी व ब्लॉक प्रमुख का कार्यकाल खत्म होने पर एसडीएम को प्रशासक बनाया जाता था। अब उम्मीद जताई जा रही है कि इनका भी कार्यकाल बढ़ाया जाएगा।
यूपी में पंचायत चुनाव से जुड़ी बड़ी खबर
6 महीने के लिए ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाया गया, आदेश जारी
26 मई के बाद ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त होंगे वर्तमान प्रधान, यूपी शासन ने जारी किया आदेश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्राम पंचायतों के कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। पंचायती राज विभाग द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन के अनुसार वर्ष 2021 में गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। इसके बाद नई ग्राम पंचायतों के गठन और प्रथम बैठक तक वर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में कार्यभार सौंपा जाएगा।
शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1947 की धारा 12 के तहत ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रथम बैठक की तिथि से पांच वर्ष तक निर्धारित है। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि किसी कारणवश नई पंचायतों का गठन समय पर नहीं हो पाता है, तो प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य सरकार प्रशासक नियुक्त कर सकती है।
इसी क्रम में शासन ने निर्णय लिया है कि 27 मई 2026 से नई ग्राम पंचायतों की प्रथम बैठक होने अथवा अधिकतम छह माह की अवधि तक निवर्तमान ग्राम प्रधान ग्राम पंचायतों में प्रशासक के रूप में सामान्य कार्यों का संचालन करेंगे। हालांकि आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रशासक के रूप में कार्यरत प्रधान कोई नीतिगत निर्णय नहीं ले सकेंगे।
विशेष परिस्थितियों में यदि किसी नीतिगत निर्णय की आवश्यकता होगी तो उसका प्रस्ताव जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा और स्वीकृति मिलने के बाद ही कार्रवाई की जाएगी।
शासन के इस आदेश को पंचायतों में प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। आदेश की प्रतियां सभी मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों, मुख्य विकास अधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई हेतु भेज दी गई हैं।