🔴 जिले में तीन साल व मंडल में सात साल पूरे कर चुके अधिकारी होंगे स्थानांतरित
🔴 समूह क, ख के 20 प्रतिशत और ग-घ के 10 प्रतिशत सीमा तक होंगे तबादले
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों के तवादले 31 मई तक किए जाएंगे। इसके लिए सोमवार को सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई। जिले में 3 साल और मंडल में 7 साल पूरे कर चुके अधिकारी और कर्मचारी स्थानांतरित किए जाएंगे।
कैबिनेट से पास प्रस्ताव में कहा गया है कि यह स्थानांतरण नीति वर्ष 2026-27 के लिए है। समूह क व ख के ऐसे अधिकारी जो अपने सेवाकाल में किसी जिले में 3 वर्ष पूरे कर चुके हैं, उनका तबादला किया जाएगा। मंडल में तैनाती की यह अवधि 7 वर्ष की होगी। विभागाध्यक्ष और मंडलीय कार्यालयों में की गई तैनाती की अवधि को इस समयसीमा में नहीं गिना जाएगा।
मंडलीय कार्यालयों में तैनाती की अधिकतम सीमा तीन वर्ष होगी और इसके लिए सर्वाधिक समय से कार्यरत अधिकारियों के स्थानांतरण प्राथमिकता के आधार पर किए जाने की व्यवस्था की गई है। समूह क व ख के स्थानांतरण संवर्गवार कार्यरत अधिकारियों की संख्या के अधिकतम 20 प्रतिशत और समूह ग वघ के कार्मिकों के स्थानांतरण संवर्गवार कुल कार्यरत कार्मिकों की संख्या के अधिकतम 10 प्रतिशत सीमा तक किए जा सकेंगे।
समूह ग के लिए पटल परिवर्तन और क्षेत्र परिवर्तन के संबंध में 13 मई 2022 के शासनादेश के अनुसार व्यवस्था इस बार भी लागू रहेगी। समूह ख व ग के कार्मिकों के स्थानांतरण यथासंभव मेरिट आधारित ट्रांसफर सिस्टम के आधार पर किए जाने की व्यवस्था की गई है।
गृह जिले में तैनात नहीं होंगे समूह क के अधिकारी
समूह क के अधिकारियों को उनके गृह जिले में तैनात नहीं किया जाएगा। समूह क के ऐसे अधिकारियों जिनके पद केवल मंडल स्तर पर हैं, उन्हें उनके गृह मंडल में तैनाती नहीं मिलेगी। समूह ख के अधिकारियों को उनके गृह मंडल में तैनात नहीं किया जाएगा, यह प्रतिबंध केवल जिलास्तरीय विभागों व कार्यालयों में लागू होंगे। समूह ग के सभी कार्मिकों का पटल, क्षेत्र परिवर्तन अनिवार्य रूप से किया जाएगा। स्थानांतरण के लिए तीन साल और सात साल का कटऑफ अवधि 31 मार्च माना जाएगा। किसी विभाग का यदि जिले में कोई अन्य कार्यालय नहीं है तो कार्मिक का पटल या क्षेत्र का बदलाव 13 मई 2022 को जारी शासनादेश के आधार पर किया जाएगा।
सेवानिवृत्ति के दो साल तो इच्छित तैनाती में मिलेगी प्राथमिकता
दो साल में सेवानिवृत्त होने वाले समूह ग व घ के कार्मिकों को उनके गृह जिले व समूह क व ख के कार्मिकों को उनके गृह जिले को छोड़ते हुए इच्छित जिले में तैनाती करने पर यथासंभव विचार किया जाएगा। इसके लिए पूर्व में उस मंडल व जिले में उनकी तैनाती अवधि को संज्ञान में नहीं लिया जाएगा।
स्थानांतरण सत्र के बाद सीएम की अनुमति अनिवार्य स्थानांतरण सत्र के बाद समूह क व ख के तबादले विभागीय मंत्री के माध्यम से मुख्यमंत्री के अनुमोदन से ही हो सकेंगे।
9 लाख कार्मिक दायरे में
विभागाध्यक्ष अपने मंत्रियों की सहमति से 31 मई तक कार्मिकों का स्थानांतरण कर सकेंगे। सेवानिवृत्ति में दो साल बचने वाले कार्मिकों को उनके गृह जिले में तैनाती पर विचार होगा। तबादला नीति के दायरे में नौ लाख से अधिक राज्य कर्मचारी आएंगे। तबादला नीति सचिवालय कर्मियों पर लागू नहीं होगी। विभागों द्वारा प्रशासनिक दृष्टि से पदोन्नति, सीधी भर्ती से नवनियुक्त पत्नी के सरकारी सेवा में होने के स्थानांतरण विकल्प के आधार पर मनचाहे स्थानों पर किया जाएगा।
दिव्यांग बच्चों के माता-पिता को प्राथमिकता
मंदित बच्चों व चलने-फिरने में असमर्थ दिव्यांग बच्चों के माता-पिता की तैनाती विकल्प प्राप्त करके ऐसे स्थान पर किए जाने की व्यवस्था की गई है, जहां उसकी उचित देखभाल व चिकित्सा की समुचित व्यवस्था हो। केंद्र सरकार से घोषित 8 आकांक्षी जिलों और 34 जिलों के 100 आकांक्षी विकास खंडों में में तैनाती संतृप्त किए जाने की व्यवस्था की गई है।