लखनऊ। राज्य सरकार की नई तबादला नीति में पति-पत्नी और दिव्यांगों को मानचाही तैनाती के लिए प्राथमिकता दी जाएगी। जिले में तीन साल और मंडल में सात साल की सेवा पूरी करने वालों को स्थानांतरित किया जाएगा। एक ही पटल पर सालों से कार्यरत कर्मियों को हटा कर दूसरे स्थान पर भेजा जाएगा।
उच्चाधिकारियों की बैठक में नई तबादला नीति पर सहमति बन गई है और कैबिनेट में प्रस्ताव इसी माह लाने की तैयारी है। प्रस्तावित तबादला नीति में विभागाध्यक्षों को तबादले के लिए एक माह का समय दिए जाने पर सहमति बनी है।
पति-पत्नी दोनों के सरकारी सेवा में होने पर यथासंभव एक ही जिले में उनका तबादला किया जाएगा। मंदित, चलने में लाचार और पूरी तरह से दिव्यांग बच्चों के माता-पिता की तैनाती उनके द्वारा दिए गए विकल्पों के आधार पर करने का प्रस्ताव है। दिव्यांग कर्मी और जिनके आश्रित परिवारीजन 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांग हैं, उनको स्थानांतरण से मुक्त रखा जाएगा।
संदिग्ध सत्यनिष्ठा वाले कर्मियों की तैनाती संवेदनशील पदों पर न करने का प्रस्ताव है। समूह 'क' के अधिकारियों को उनके गृह जिले में तैनाती न देने पर सहमति बनी है। ऐसे अधिकारियों का पद अगर मंडल स्तर का है तो उसे उसके मंडल में भी तैनात नहीं किया जाएगा।