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Wednesday, April 15, 2026

समान परिस्थितियों में पदोन्नति से वंचित रखना संविधान का उल्लंघन : सुप्रीम कोर्ट

समान परिस्थितियों में पदोन्नति से वंचित रखना संविधान का उल्लंघन : सुप्रीम कोर्ट

अदालत ने कहा-भेदभाव ही अन्याय का दूसरा नाम, कर्मचारी को पदोन्नत करने का आदेश


नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि समान परिस्थितियों में एक कर्मचारी को प्रमोशन से वंचित करना, जबकि अन्य को वही लाभदिया गया हो, संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा है कि भेदभाव ही अन्याय का दूसरा नाम है।


इस टिप्पणी के साथ जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया जिसमें एक सहकारी समिति के कर्मचारी को प्रमोशन देने से इन्कार किया गया था।

मामले के मुताबिक, कमल प्रसाद दुबे एक प्राथमिक कृषि सहकारी समिति के कर्मचारी थे, जिन्होंने लगभग 28 वर्षों तक सेवा दी थी। समिति के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने उनकी लंबी सेवा, अनुभव और वरिष्ठता को देखते हुए उन्हें सोसायटी मैनेजर के पद पर प्रमोशन देने की सिफारिश की थी। साथ ही शैक्षणिक योग्यता में छूट देने का भी प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि, हाईकोर्ट की खंडपीठ ने यह कहते हुए प्रमोशन से इन्कार कर दिया कि कर्मचारी के पास आवश्यक शैक्षणिक योग्यता नहीं है। इसके बाद कर्मचारी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब नियमों में शैक्षणिक योग्यता में छूट देने का प्रावधान है, तो सिर्फ डिग्री के अभाव में प्रमोशन से इन्कार करना गलत है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वास्तविक न्याय तभी संभव है जब समानता के सिद्धांत का पालन किया जाए।


समान योग्यता वालों को पहले ही दिया था प्रमोशन

कोर्ट ने यह भी पाया कि समान योग्यता वाले दो अन्य कर्मचारियों को पहले ही प्रमोशन दिया जा चुका था, जबकि अपीलकर्ता को इससे वंचित रखा गया। इसे कोर्ट ने सीधे तौर पर भेदभाव माना। अपने फैसले में कोर्ट ने कहा कि रजिस्ट्रार को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के वैध निर्णय में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए था। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की एकलपीठ के फैसले को बहाल करते हुए कर्मचारी को प्रमोशन देने का आदेश दिया।

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