पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश राम औतार बने पांच सदस्यीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष
पांच सदस्यीय आयोग का विधिवत गठन किया गया त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षण करेगा तय
20 मई 2026
लखनऊ । यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में प्रधान समेत विभिन्न पदों की सीटों पर ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश राम औतार सिंह की अध्यक्षता में समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग गठित कर दिया गया है।
पंचायती राज विभाग ने बुधवार को आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के नाम तय किए। सेवानिवृत्त अपर जिला न्यायाधीश बृजेश कुमार, संतोष विश्वकर्मा, रिटायर आईएएस डा. अरविंद चौरसिया और एसपी सिंह को सदस्य बनाया गया है। प्रमुख सचिव, पंचायती राज अनिल कुमार की ओर से इसका आदेश जारी कर दिया गया है। अध्यक्ष, सदस्यों का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तारीख से छह महीने का होगा। आयोग अपनी रिपोर्ट तीन महीने में दे सकता है या फिर तारीख सरकार बढ़ा भी सकती है। आयोग का मुख्यालय लखनऊ में होगा। फिलहाल आयोग जल्द अपना कार्य शुरू करेगा।
अब विधान सभा चुनाव के बाद ही पंचायत चुनाव के आसार, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के कैबिनेट निर्णय के बाद तस्वीर हुई साफ
पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट प्राप्त होने से लेकर पंचायत चुनाव कराने तक चाहिए नौ माह से अधिक समय
अगले वर्ष फरवरी में जब प्रक्रियाएं पूरी होंगी, तब विधान सभा चुनाव होंगे संभावित
लखनऊः कैबिनेट द्वारा त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन का निर्णय किए जाने के साथ ही पंचायत चुनाव की तस्वीर लगभग साफ हो गई है। आयोग की सिफारिशें प्राप्त होने, सीटों का आरक्षण तय किए जाने और राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव संपन्न कराने की प्रक्रिया में ही नौ महीने से अधिक समय लगेंगे। जब तक ये प्रक्रियाएं पूरी होंगी, उस समय प्रदेश में विधान सभा चुनाव के लिए मतदान का समय रहेगा। माना जा रहा है कि पंचायत चुनाव अब विधान सभा चुनाव के बाद ही कराए जा सकेंगे। आयोग के गठन का निर्णय लिए जाने के साथ ही सरकार अब इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में आयोग के गठन को लेकर चल रही सुनवाई में अपना पक्ष रखेगी, सुनवाई की तिथि 19 मई निर्धारित है।
वर्ष 2021 में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 15, 19, 26 और 29 अप्रैल को चार चरणों में कराए गए थे। दो मई को मतों की गिनती हुई थी। 26 मई को ग्राम पंचायतों की पहली बैठक हुई थी। 11 जुलाई को जिला पंचायतों और 19 जुलाई को क्षेत्र पंचायतों की पहली बैठकें हुईं थीं। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के मुताबिक पंचायत चुनाव से पूर्व ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया जाना जरूरी है। लिहाजा आयोग के गठन के लिए सोमवार को कैबिनेट ने स्वीकृति दी।
पिछड़ा वर्ग आयोग को सरकार को संस्तुतियां करने के लिए छह माह का समय दिया गया है। आयोग की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद सीटों का आरक्षण तय करने के लिए विभाग को दो महीने का समय चाहिए। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग को निर्वाचन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए 35 से 40 दिन चाहिए। इन तीनों प्रक्रियाओं में ही नौ माह से अधिक समय निकल जाएगा। तब तक फरवरी 2026 आ जाएगा। फरवरी 2026 में विधान सभा चुनाव के लिए मतदान की तिथियां संभावित है। मार्च में मतों की गणना और उसके बाद सरकार का गठन होगा। वर्ष 2022 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में 10 फरवरी से सात मार्च के बीच सात चरणों में मतदान हुआ था और 10 मार्च को मतगणना हुई थी।
आयोग की रिपोर्ट पर होगा आरक्षण का अंतिम निर्धारण
सरकार ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 243-घ और संबंधित अधिनियमों की धाराओं के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के लिए पंचायतों में आरक्षण का प्रावधान है।
पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण कुल पदों के 27 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पंचायतों में आरक्षण का अंतिम निर्धारण किया जाएगा।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के कैबिनेट निर्णय
पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण के लिए आयोग के गठन को मंजूरी
प्रदेश कैबिनेट का फैसला: छह माह में रिपोर्ट देगा आयोग, ओबीसी आरक्षण के लिए करेगा सामाजिक और राजनीतिक अध्ययन
लखनऊ। पंचायत चुनावों में पिछड़े वर्ग को आरक्षण प्रदान करने के लिए कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। यह आयोग पंचायत चुनावों में पिछड़े वर्गों को आरक्षण प्रदान करने के लिए उनकी स्थिति, जनसंख्या, सामाजिक प्रतिनिधित्व और पंचायतों में भागीदारी का अध्ययन करेगा। निकायवार आनुपातिक आरक्षण निर्धारित करने के लिए अपनी सिफारिशें देगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को लोकभवन में हुई कैबिनेट बैठक में इसे मंजूरी दी गई। इसके अलावा 11 अन्य प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।
कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री सुरेश कुमार ने बताया कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के तहत प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है।