उप्र में अब जन्मतिथि के प्रमाण के लिए आधार कार्ड मान्य नहीं, यूआइडीएआइ के पत्र पर उम्र में जारी किया गया शासनादेश
लखनऊ । आधार कार्ड अब जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उप्र सरकार ने सभी विभागों को इसके स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। नियोजन विभाग के विशेष सचिव अमित सिंह बंसल ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआइडीएआइ) के पत्र का हवाला देते हुए कहा, आधार कार्ड में जन्मतिथि का कोई प्रमाणित दस्तावेज संलग्न नहीं होता, इसलिए इसे जन्मतिथि प्रमाण के रूप में मान्य नहीं माना जा सकता है।
यूआइडीएआइ की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट कहा गया था कि आधार कार्ड जन्मतिथि का अनुमन्य प्रमाण नहीं है। आधार सिर्फ पहचान और सत्यापन का साधन है, जन्मतिथि सत्यापन का यह प्रमाण नहीं है। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश सरकार के कई विभाग आधार को जन्मतिथि के प्रमाण के रूप स्वीकार कर रहे हैं। कई लाभार्थीपरक एवं कल्याणकारी योजनाओं में इसका उपयोग किया जा रहा है।
नियोजन विभाग ने सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव/मुख्य सचिव को पत्र भेजकर कहा है कि आधार कार्ड को जन्मतिथि प्रमाण के रूप में स्वीकार न किया जाए। जन्मतिथि के सत्यापन के लिए अन्य वैध दस्तावेज को ही मान्य किया जाए। सरकार ने सख्त निर्देश दिए हैं कि किसी भी सरकारी प्रक्रिया में नियुक्ति, प्रमोशन, सेवा रजिस्टर संशोधन या अन्य संवेदनशील दस्तावेज में आधार को जन्मतिथि का प्रमाण न माना जाए। इसके लिए जन्म प्रमाण-पत्र, हाईस्कूल मार्कशीट, नगर निकाय या स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी प्रमाण-पत्र जैसे अन्य मूल दस्तावेज लगाए जा सकते हैं। गौरतलब है कि आधार नागरिकता का प्रमाण पहले से नहीं माना जाता है।
लखनऊ, 24 नवम्बर 2025 — उत्तर प्रदेश शासन ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक स्पष्टता जारी करते हुए सभी विभागों को निर्देशित किया है कि आधार कार्ड को अब जन्म तिथि के स्वीकार्य प्रमाण के रूप में न माना जाए। नियोजन विभाग के विशेष सचिव अमित सिंह बंसल द्वारा जारी इस आदेश में बताया गया है कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने अपने पत्र दिनांक 31 अक्टूबर 2025 में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि आधार कार्ड जन्म तिथि की आधिकारिक पुष्टि का दस्तावेज नहीं है।
शासन ने पाया कि विभिन्न विभागों द्वारा अभी भी आधार कार्ड को जन्म तिथि के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जा रहा है, जबकि ऐसा किया जाना नियमों के विपरीत है। इसी पृष्ठभूमि में सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों और सचिवों को निर्देशित किया गया है कि संबंधित अधिकारियों को इस तथ्य से अवगत कराते हुए यह सुनिश्चित करें कि किसी भी सरकारी कार्य में जन्म तिथि प्रमाणित करने हेतु आधार कार्ड की मान्यता न दी जाए।
शासन के इस निर्देश से विभागीय प्रक्रियाओं में समानता आएगी और जन्म तिथि सत्यापन से जुड़े मामलों में अधिकृत दस्तावेजों, जैसे जन्म प्रमाणपत्र, हाई स्कूल प्रमाणपत्र आदि का ही उपयोग अनिवार्य रूप से सुनिश्चित हो सकेगा। पत्र की प्रति प्रमुख सचिव, नियोजन विभाग के निजी सचिव तथा यूआईडीएआई, क्षेत्रीय कार्यालय लखनऊ को भी सूचनार्थ प्रेषित की गई है।
शासन के इस निर्णय को आगामी दस्तावेजी कार्यवाहियों में अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे जन्म तिथि सत्यापन में किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति समाप्त होगी और विभागीय प्रक्रियाएं अधिक स्पष्ट एवं सुव्यवस्थित हो सकेंगी।