सेवानिवृत्ति लाभ कर्मचारी का हक है, विभागीय अहसान नहीं: हाईकोर्ट
नैनी में आईटीआई से सेवानिवृत्त कर्मचारी के भुगतान में देरी पर कोर्ट नाराज
"सेवानिवृत्त कर्मचारी को उसकी जीवनभर की कमाई समय पर न देना अनुच्छेद-21 के तहत प्रदत्त जीवन और आजीविका के अधिकार का उल्लंघन है" - इलाहाबाद हाईकोर्ट
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्ति के बाद देय पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य लाभों में देरी पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि लाभविभागीय अहसान नहीं, कर्मचारी का हक है। भुगतान के लिए दर-दर भटकाना मौलिक अधिकार का हनन है।
इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की अदालत ने प्रयागराज के नैनी स्थित आईटीआई से सेवानिवृत्त गोपी चंद्र को उनके बकाये का जल्द से जल्द भुगतान करने का आदेश दिया है। उनके अधिवक्ता ने दलील दी कि याची 30 जून 2025 को सेवानिवृत्त हुए पर अब तक भविष्य निधि, ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण विभाग ने भुगतान नहीं किया।
10 दिसंबर को पुत्री के विवाह का हवाला देते हुए याची ने भुगतान की मांग के साथ कई प्रार्थना पत्र भी दिए। ऐसे में बेटी के विवाह की तैयारियों में आर्थिक संकट पैदा हो गया है। वहीं, विभाग की ओर से पेश अधिवक्ता ने विभाग को भुगतान के लिए चार महीने का समय देने का अनुरोध किया, जिस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। कहा कि पोस्ट-रिटायरल लाभ रोकना विभाग की गंभीर लापरवाही है, जिसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।