लिपिकीय त्रुटि के कारण अतिरिक्त पेंशन भुगतान पर वसूली से मिल सकती है राहत, पेंशन निर्धारण के दो साल बाद त्रुटि सामने आने पर विभाग अपने स्तर से नहीं कर सकेंगे संशोधन
पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग ने त्रुटि होने पर संशोधन के मामले में जारी किए दिशानिर्देश
प्रयागराज। केंद्र सरकार के किसी पेंशनर या पारिवारिक पेंशन को लिपिकीय त्रुटि के कारण अतिरिक्त पेंशन का भुगतान हो जाता है तो अतिरिक्त भुगतान की वसूली के मामले में उसे राहत भी मिल सकती है। हालांकि, यह तब हो सकता है जब लिपिकीय त्रुटि पेंशन निर्धारण के दो साल बाद सामने आए। इस बाबत केंद्रीय पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि लिपिकीय त्रुटि के कारण किसी पेंशनर या पारिवारिक पेंशनर की पेंशन अधिक निर्धारित कर दी गई है और संशोधन के कारण उसे नुकसान हो रहा है तो पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग की सहमति के बिना पेंशनभोगी या पारिवारिक पेंशनभोगी के लिए नुकसानदेह पेंशन में कोई संशोधन नहीं किया जाएगा। संशोधन लिपिकीय त्रुटि के कारण आवश्यक है या नहीं, यह प्रशासनिक मंत्रालय या विभाग तय करेगा।
यह भी स्पष्ट किया गया है कि पेंशन या पारिवारिक पेंशन के संशोधन के परिणामस्वरूप पेंशनर या पारिवारिक पेंशनर को अतिरिक्त भुगतान पाया जाता है और अतिरिक्त भुगतान पेंशनभोगी या पारिवारिक पेंशनभोगी द्वारा तथ्यों के किसी गलत प्रस्तुतीकरण के कारण नहीं है, तो प्रशासनिक मंत्रालय या विभाग व्यय विभाग के परामर्श से इस बात की जांच करेगा कि क्या ऐसे अतिरिक्त भुगतान की वसूली माफ की जा सकती है या नहीं।
जहां प्रशासनिक मंत्रालय या विभाग पेंशन या पारिवारिक पेंशन के अतिरिक्त भुगतान को माफ न करने का निर्णय लेता है, वहां संबंधित सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी या पारिवारिक पेंशनभोगी को कार्यालय प्रमुख द्वारा एक नोटिस जारी किया जाएगा जिसमें उसे नोटिस प्राप्त होने की तिथि से दो महीने की अवधि के भीतर पेंशन का अतिरिक्त भुगतान वापस करने का निर्देश दिया जाएगा।
यदि सरकारी कर्मचारी नोटिस का पालन करने में विफल रहता है तो कार्यालय प्रमुख लिखित आदेश द्वारा निर्देश देगा कि ऐसे अतिरिक्त भुगतान को भविष्य में पेंशन के कम भुगतानों द्वारा, एक या अधिक किस्तों में समायोजित कर लिया जाए। एजीयूपी पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के संरक्षक हरिशंकर तिवारी एवं महामंत्री ऋषीश्वर उपाध्याय ने आदेश का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे उन पेंशनरों एवं पारिवारिक पेंशनरों को काफी राहत मिलेगी, जिनकी पेंशन लिपिकीय त्रुटि के कारण गलत निर्धारित हो जाती है और बाद में मनमाने तरीके से वसूली की जाती है।
गलती से बढ़ी पेंशन में बिना मंजूरी कटौती नहीं, केंद्र सरकार ने इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए
नईदिल्ली। सरकार ने केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनधारकों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि गलती से भुगतान की गई अतिरिक्त पेंशन की वसूली के लिए पहले उच्चस्तर पर इसकी मंजूरी लेनी होगी। पेंशनभोगी को इसके लिए दो महीने का समय दिया जाएगा।
यह आदेश पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग ने हाल में जारी किया है। इसके मुताबिक, एक बार तय की गई पेंशन या पारिवारिक पेंशन को घटाया नहीं जा सकेगा। हालांकि, कोई लेखन या गणना संबंधी गलती न पाई जाती है तो अतिरिक्त भुगतान की वसूली की जा सकती है।
यदि किसी पेंशन में कोई त्रुटि दो साल से अधिक समय बाद पाई जाती है, तो उसे घटाने से पहले संबंधित मंत्रालय को मंजूरी लेनी होगी। यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि पहले कई बार सेवानिवृत्ति के कई साल बाद भी विभाग 'त्रुटिपूर्ण गणना' का हवाला देकर पेंशन घटा देता था या रिकवरी नोटिस भेज देता था।
पेंशनभोगी को दो महीने का नोटिस दिया जाएगा
2800 अगर किसी पेंशनभोगी को गलती से ज्यादा भुगतान कर दिया गया है और यह उसकी गलती से नहीं हुआ है, तो संबंधित मंत्रालय या विभाग यह तय करेगा कि उस अतिरिक्त राशि को वसूला जाए या माफ कर दिया जाए। अगर वसूली का निर्णय लिया जाता है दो महीने का नोटिस दिया जाएगा। यदि तो पेंशनभोगी को रकम लौटाने के लिए नोटिस की अवधि समाप्त होने के बाद भी राशि वापस नहीं की जाती, तो यह रकम भविष्य की पेंशन किस्तों से चरणबद्ध तरीके से काटी जा सकती है।
इसलिए अहम है सरकार का यह फैसला
कई मामलों में देखा गया था कि सेवानिवृत्ति के सालों बाद भी विभाग 'अधिक पेंशन दिए जाने की त्रुटि' बताकर पेंशन घटा देता था या रिकवरी की कार्रवाई शुरू कर देता था, जिससे बुजुर्ग पेंशनरों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब सरकार के इस नए आदेश के बाद केवल वास्तविक विभागीय गलती पाए जाने पर ही पेंशन संशोधित की जा सकेगी। यह काम भी दो साल की अवधि के भीतर होगा।