लखनऊ। प्रदेश में संपत्तियों की पहचान और स्वामित्व संबंधी अभिलेखों का सत्यापन आसान बनाने के लिए यूनिक प्रॉपर्टी आईडी और रजिस्ट्री के बाद स्वतः नामांतरण की व्यवस्था विकसित की जा रही है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की सोमवार को हुई समीक्षा बैठक में संपत्ति पंजीकरण के समय स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों की जांच, ऑनलाइन अभिलेख प्रमाणीकरण, साइबर तहसील और राजस्व संहिता की धारा-34 से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।
बैठक में बताया गया कि कृषि भूमि के लिए खसरा संख्या आधारित यूनिक प्रॉपर्टी आईडी उपलब्ध है, जबकि आबादी की भूमि के लिए 13 अंकों की घरौनी तैयार की जा रही है। आवास और औद्योगिक विकास विभाग भी अपने क्षेत्र की संपत्तियों की आईडी बना रहे हैं। नगर विकास विभाग के अनुसार, ई नगरसेवा पोर्टल पर 75 जिला मुख्यालयों के नगर निकायों में 34.70 लाख संपत्तियां दर्ज हो चुकी थीं। कुल 71 में से 75 नगर निकायों में आईडी सृजन होने की जानकारी दी गई। पोर्टल पर कुल 56.57 लाख संपत्तियां दर्ज हैं और उनके लिए 17 अंकों की आईडी बनाई जा रही है।
10 निकायों में अर्बन प्रॉपर्टी कार्ड
नगरीय संपत्तियों के लिए नक्शा परियोजना के तहत 10 नगर निकायों में पायलट कार्य किया जा रहा है। इनमें गोरखपुर और झांसी नगर निगम, नवाबगंज (बाराबंकी), हरदोई और चित्रकूटधाम सहित पांच निकायों में ई नगरसेवा और नक्शा, दोनों की आईडी लागू की जानी है। परियोजना का लक्ष्य 31 दिसंबर है। नक्शा के तहत प्रत्येक संपत्ति का अर्बन प्रॉपर्टी कार्ड बनेगा, जिससे वैधानिक स्वामित्व की पुष्टि में मदद मिलेगी। ई-नगरसेवा की आईडी संपत्ति कर निर्धारण और वसूली में उपयोग होती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में विक्रय अधिकार के प्रथम दृष्टया प्रमाण के लिए खतौनी और घरौनी को मान्य अभिलेख माना गया है। आवंटन पत्र, रजिस्ट्री, बैनामा और लीज डीड भी स्वामित्व के साक्ष्य हैं। स्वतः नामांतरण के लिए राजस्व विभाग कुछ गांवों, नगर विकास विभाग कम से कम एक निकाय और औद्योगिक विकास विभाग यमुना अथवा अन्य प्राधिकरण का चयन करेगा। आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने लखनऊ विकास प्राधिकरण को चुना है।