हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा सकती है यूपी सरकार, जातीय जनगणना, विधानसभा चुनाव और परीक्षाओं के बीच पंचायत चुनाव संभव नहीं
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में तीन माह के भीतर पंचायत चुनाव कराना प्रदेश सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। जातीय जनगणना, विभिन्न परीक्षाओं और विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच प्रशासनिक मशीनरी की व्यस्तता को देखते हुए सरकार हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकती है। हालांकि, पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा है कि न्यायालय के आदेश का अध्ययन करने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
गत 25 मई को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें प्रशासक नियुक्त किया गया था। इसके बाद जुलाई में ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल पूरा होने पर वहां भी प्रशासक तैनात किए गए। राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव की मतदाता सूची 10 जून को जारी कर चुका है और उसने अपनी तैयारियां पूरी होने का दावा किया है।
पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का आरक्षण निर्धारित करने के लिए प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 20 मई को राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया था। आयोग का छह महीने का कार्यकाल 20 नवंबर को पूरा होगा। आयोग के अध्यक्ष राम औतार सिंह के मुताबिक, अब तक 75 में से 42 जिलों का दौरा और सर्वे पूरा हो चुका है, जबकि 33 जिलों का काम बाकी है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश का अध्ययन करने के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा। रिपोर्ट जल्द मांगे जाने पर आयोग के सदस्य दो-तीन टीमें बनाकर शेष जिलों का दौरा कर सकते हैं।
प्रदेश में जनगणना का दूसरा चरण एक दिसंबर 2026 से चार जनवरी 2027 तक प्रस्तावित है। इस दौरान प्रशासनिक अमला व्यस्त रहेगा। वहीं, जनवरी के पहले सप्ताह में विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में पंचायत चुनाव समय पर कराने को लेकर व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आ सकती हैं। सूत्रों के अनुसार, इन परिस्थितियों को आधार बनाकर सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकती है।
आदेश पढ़ने के बाद तय होगा अगला कदम
पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि सरकार न्यायपालिका का पूरा सम्मान करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आदेश का विस्तृत अध्ययन किए बिना टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। पंचायत चुनाव से जुड़े सभी पहलुओं और संवैधानिक प्रावधानों पर विचार करने के बाद ही आगे की दिशा तय की जाएगी।
तीन महीने में कराएं पंचायत चुनाव, तब तक प्रशासक बने रहेंगे प्रधान, हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को दिया आदेश
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ किया है कि चुनाव होने तक प्रशासक के रूप में ग्राम प्रधान ही कार्यभार संभालेंगे।
न्यायमूर्ति अजित कुमार, न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन, दशरथ यादव व अन्य याचिकाओं पर यह आदेश दिया है। याचियों ने समय पर ग्राम पंचायत चुनाव कराने की मांग में याचिका दायर की थी। इसमें प्रदेश सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग को समय पर चुनाव कराने व चुनाव कार्यक्रम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने की मांग की गई थी। वहीं, कुछ अन्य याचिकाओं में ग्राम पंचायत में प्रशासक नियुक्त करने को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने सभी याचिकाओं को एक साथ संबद्ध कर सुनवाई की थी। मामले में कई दिनों तक चली सुनवाई के बाद बुधवार को कोर्ट में फैसला सुनाया। कोर्ट ने ग्राम प्रधान को प्रशासक नियुक्त करने के एक्ट को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दीं। याची अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन ने बताया कि ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नियुक्त किए गए प्रशासक फिलहाल बने रहेंगे।
ओबीसी आयोग अपना काम करता रहेगा : अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने बताया कि कोर्ट ने कहा है कि ओबीसी आयोग के कार्य में कोई बाधा नहीं आएगी। चुनाव में 27 प्रतिशत आरक्षण का जो प्रावधान है, उसे पूरा किया जाएगा और नियमानुसार चुनाव कराए जाएंगे।
आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा सकती है सरकार
लखनऊ। प्रदेश में तीन माह में पंचायत चुनाव करा पाना आसान नहीं है। जातीय जनगणना, परीक्षाएं और विधानसभा चुनाव इन्हीं 3-4 महीनों में होने हैं। उच्चपदस्थ सूत्रों की मानें तो इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट के तीन माह में पंचायत चुनाव कराने के आदेश के खिलाफ प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है। हालांकि, पंचायतीराज मंत्री ओपी राजभर का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश के अध्ययन के बाद अगले कदम के बारे में निर्णय लेंगे।