वेतन निर्धारण में गलती के आधार पर पेंशन से वसूली नहीं कर सकते, सेवानिवृत्ति के बाद वेतन वसूली अवैध - हाईकोर्ट
पीएसी के सेवानिवृत्त कांस्टेबल को 6.74 लाख रुपये लौटाए विभाग
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्ति के बाद वेतन निर्धारण में कथित गलती के आधार पर पेंशन से 6.74 लाख मामला 1 रुपये की वसूली को अवैध करार दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि याची की पेंशन से की गई कटौती की राशि आठ फीसदी सालाना ब्याज के साथ आठ सप्ताह में वापस करे। साथ ही पेंशन और सेवानिवृत्ति के अन्य सभी लाभअंतिम आहरित वेतन के आधार पर निर्धारित किए जाएं।
यह आदेश न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की एकल पीठ ने मुरादाबाद के सूरज सिंह की याचिका पर दिया। याची पुलिस विभाग में कांस्टेबल के पद पर नियुक्त हुआ था, जिसके बाद उसे हेड कांस्टेबल के पद पर पदोन्नत मिली। 31 जुलाई 2021 को याची सेवानिवृत्त हुआ था।
विभाग ने वेतन निर्धारण में गलती बताकर उसकी पेंशन की गणना के लिए निर्धारित 9,36,083 रुपये की राशि में से 6,74,404 रुपये काट लिए थे। इसके बाद शेष केवल 2,61,679 रुपये का ही भुगतान किया गया, जिसे याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
धोखाधड़ी के बिना वसूली गलत: कोर्ट ने कहा कि संबंधित सरकारी आदेशों और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार सेवानिवृत्ति के बाद लंबे समय पहले किए गए वेतन निर्धारण में कथित गलती के आधार पर वेतनमान संशोधित कर वसूली करना स्वीकार्य नहीं है। खासकर तब, जब कर्मचारी की ओर से कोई धोखाधड़ी या गलत तथ्य प्रस्तुत करने की बात सामने न आई हो।
वेतन पुनर्निर्धारण और वसूली से संबंधित तीनों आदेश रद्द : कोर्ट ने भी स्पष्ट किया कि सेवानिवृत्ति के समय लिया गया अंडरटेकिंग अपने आप में वसूली का आधार नहीं बन सकता। संबंधित अधिकारियों ने वेतन संशोधन व वसूली से पहले याची को नोटिस नहीं दिया और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर दिया। कोर्ट ने वेतन पुनर्निर्धारण और वसूली से संबंधित तीनों आदेशों को निरस्त कर याचिका स्वीकार कर ली।