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Tuesday, October 6, 2026

जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने में देरी पड़ेगी भारी, नए नियम लागू, समय पर पंजीकरण नहीं कराया तो बढ़ेंगी औपचारिकताएं और फीस

जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने में देरी पड़ेगी भारी, नए नियम लागू, समय पर पंजीकरण नहीं कराया तो बढ़ेंगी औपचारिकताएं और फीस

05 अक्टूबर 2026
प्रयागराज। जन्म और मृत्यु का पंजीकरण समय पर नहीं कराना अब भारी पड़ सकता है। शासन ने एक अक्तूबर से जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के विलंबित पंजीकरण को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत घटना के 21 दिन के भीतर पंजीकरण कराने पर प्रमाणपत्र निशुल्क जारी होगा। इसके बाद देरी बढ़ने के साथ आवेदन की प्रक्रिया भी जटिल होती जाएगी। संबंधित लोगों को विलंब शुल्क के साथ शपथपत्र और सक्षम अधिकारी की स्वीकृति लेनी होगी।

जन्म अथवा मृत्यु की घटना के 21 दिन के भीतर पंजीकरण कराने पर किसी तरह का विलंब शुल्क नहीं लगेगा। इसके लिए निर्धारित समय में आवेदन जमा करना होगा। शासन ने लोगों से समय पर पंजीकरण कराने की अपील की है। 21 दिन बीतने के बाद एक साल के भीतर पंजीकरण कराने के लिए शपथपत्र और निर्धारित विलंब शुल्क देना होगा।

इसके साथ मुख्य चिकित्सा अधिकारी/सांख्यिकी अधिकारी की स्वीकृति के बाद प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।  जन्म प्रमाण पत्र स्कूल में प्रवेश, आधार, पासपोर्ट, सरकारी योजनाओं और अन्य दस्तावेजों के लिए महत्वपूर्ण है। वहीं, मृत्यु प्रमाणपत्र बैंक खाते, बीमा, पेंशन, संपत्ति और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में जरूरी होता है। इसलिए शासन ने लोगों को जन्म और मृत्यु की घटनाओं का पंजीकरण निर्धारित अवधि में कराने की सलाह दी गई है।

एक से दो साल तक एसडीएम की मंजूरी जरूरी
एक साल से अधिक और दो साल के भीतर पंजीकरण कराने पर शपथपत्र और विलंब शुल्क के साथ उपजिलाधिकारी का आदेश और स्वीकृति आवश्यक होगी। यानी इस अवधि में प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आवेदक को अतिरिक्त प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा।

दो साल बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश
जन्म अथवा मृत्यु की घटना के दो वर्ष बाद पंजीकरण कराने की स्थिति में प्रक्रिया और कठिन होगी। आवेदक को शपथपत्र और विलंब शुल्क के साथ प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश प्राप्त करना होगा। इसके बाद संबंधित स्तर से स्वीकृति मिलने पर ही प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।


किस अवधि में क्या लगेगा
0 से 21 दिन:
निशुल्क पंजीकरण और प्रमाणपत्र

21 दिन से 1 वर्ष :
शपथपत्र, विलंब शुल्क, मुख्य चिकित्सा अधिकारी/सांख्यिकी अधिकारी की स्वीकृति

एक से दो वर्ष : 
शपथपत्र, विलंब शुल्क, उपजिलाधिकारी का आदेश एवं स्वीकृति

दो वर्ष के बाद : 
शपथपत्र, विलंब शुल्क, प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश एवं स्वीकृति




जन्म और मृत्यु के पंजीकरण में देर हुई तो कोर्ट से लेनी होगी अनुमति

26 सितम्बर 2026
लखनऊ। जन्म या मृत्यु का प्रमाणपत्र बनवाने में अब लापरवाही भारी पड़ेगी। केंद्र सरकार ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में संशोधन कर दो साल से अधिक पुराने मामलों के पंजीकरण की प्रक्रिया सख्त कर दी है। अब ऐसे मामलों में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना प्रमाणपत्र जारी नहीं होगा। नई व्यवस्था एक अक्तूबर से लागू होगी।

संशोधित प्रावधान के मुताबिक, जन्म या मृत्यु की सूचना एक साल बाद लेकिन दो साल के भीतर देने पर संबंधित क्षेत्र के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम), सब डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) या डीएम की ओर से अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही पंजीकरण

होगा। इसके लिए जन्म या मृत्यु की सत्यता का सत्यापन और निर्धारित शुल्क जमा करना होगा। कार्यपालक मजिस्ट्रेट से आशय भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 14(1) के तहत नियुक्त मजिस्ट्रेट से है।

इसी तरह दो साल से अधिक देरी होने पर प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही पंजीकरण किया जा सकेगा। यानी दो साल पुराने मामलों में अब अदालत की प्रक्रिया से गुजरना होगा। अभी तक ऐसे मामलों में भी एसडीएम के स्तर से आदेश जारी हो जाता था। नगर स्वास्थ्य अधिकारी पीके श्रीवास्तव ने कहा कि दो साल से अधिक देरी के मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट से आदेश कराने का प्रावधान है। 


जन्म-मृत्यु के देर से पंजीकरण के नियम सख्त,  अब 2 साल से ज्यादा देरी पर कोर्ट जाना होगा

अभी एसडीएम के यहां से जारी होता है आदेश, दो महीने पहले ही फीस जा चुकी है बढ़ाई

23 सितंबर 2026
लखनऊ। केंद्र सरकार ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 में बड़ा संशोधन कर दिया है। इससे अब उन लोगों को परेशानी होगी जो प्रमाण पत्र बनवाने में ढिलाई करेंगे। अब उन लोगों को कोर्ट से आदेश लाना पड़ेगा जो दो साल बाद जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाएंगे। यह नया बदलाव एक अक्तूबर से लागू हो जाएगा।

अधिनियम में किए गए प्रावधान के तहत किसी जन्म या मृत्यु की सूचना यदि एक साल बाद लेकिन दो साल के भीतर दी जाती है, तो उसका पंजीकरण तभी होगा जब संबंधित क्षेत्र के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) या सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) या डीएम की ओर से अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट की ओर से जन्म-मृत्यु की सत्यता का सत्यापन करने के बाद आदेश दिया जाए और निर्धारित शुल्क जमा किया जाए।

अधिनियम में साफ किया गया है कि कार्यपालक मजिस्ट्रेट का अर्थ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 14(1) के तहत नियुक्त मजिस्ट्रेट होगा। इसी तरह यदि जन्म या मृत्यु की सूचना दो साल दी जाती है, तो पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही होगा, वह भी सत्यापन और शुल्क के बाद।

ऐसे में साफ है कि अब दो साल से अधिक पुराने मामलों में बिना कोर्ट के आदेश के जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बनेगा। यह व्यवस्था एक अक्तूबर से लागू होगी। अभी तक एसडीएम के यहां से ही दो साल से अधिक पुराने मामलों में भी आदेश होता है।

शुल्क में हो चुकी है पहले ही बढ़ोत्तरी : करीब दस साल से केंद्र सरकार के एकीकृत पोर्टल के जरिए ही लखनऊ सहित देशभर में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए जा रहे हैं। इसमें करीब एक साल पहले बदलाव किया गया था। जिसमें 0 से 21 दिन तक का जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र निशुल्क रखा गया था और 21 दिन के बाद बनवाने वाले के लिए 20 रुपये शुल्क रखा गया था। जिसे दो महीने पहले शासन ने बढ़ा दिया था। उसके बाद यह शुल्क बढ़ाकर 50 रुपये कर दिया गया। इसको लेकर शासन ने 19 जून को आदेश जारी किया था।



एक अक्तूबर से जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नए नियम, दो वर्ष से अधिक की देरी पर न्यायिक आदेश जरूरी, रिकॉर्ड में पारदर्शिता बढ़ाना है इसका उद्देश्य

18 सितम्बर 2026
नई दिल्ली। जन्म और मृत्यु के पंजीकरण के नियमों को सख्त बनाने वाला कानून देशभर में एक अक्तूबर से लागू होगा। भारत के रजिस्ट्रार जनरल मृत्युंजय कुमार नारायण ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को सटीक, पारदर्शी, समयबद्ध बनाना है।

बदले नियमों के अनुसार, पंजीकरण में दो वर्ष से अधिक की देरी होने पर पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (जेएमएफसी) का आदेश आवश्यक होगा। पंजीकरण में एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष तक की देरी पर पंजीकरण जिला मजिस्ट्रेट (डीएम), उप-मंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश से ही होगा। इसमें सत्यापन और निर्धारित शुल्क भी लिया जाएगा।

पहले दो वर्ष से अधिक पुराने जन्म या मृत्यु का नामांकन भी संभव था, लेकिन एक वर्ष से अधिक विलंब वाली प्रक्रिया के तहत डीएम / एसडीएम/अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश पर कार्रवाई की जाती थी। मानसून सत्र के दौरान संसद में जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक पारित हुआ था



जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नियमों में बड़ा बदलाव, देरी से पंजीकरण की प्रक्रिया हुई स्पष्ट, जानिए क्या हुआ बदलाव?

01 सितम्बर 2026
नई दिल्ली। भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग ने Registration of Births and Deaths (Amendment) Act, 2026 को 6 अगस्त 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया है। यह अधिनियम Registration of Births and Deaths Act, 1969 में संशोधन करता है।

गजट में संशोधित धारा 13 के तहत जन्म या मृत्यु की सूचना निर्धारित समय के बाद दिए जाने की स्थिति में पंजीकरण के लिए अलग-अलग प्राधिकारी निर्धारित किए गए हैं।

एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष के भीतर देरी होने पर जन्म या मृत्यु का पंजीकरण संबंधित क्षेत्र के जिलाधिकारी (District Magistrate) अथवा उप-मंडलीय मजिस्ट्रेट (Sub-Divisional Magistrate), या जिलाधिकारी द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate) के आदेश पर किया जा सकेगा। इसके लिए जन्म या मृत्यु की सत्यता का सत्यापन तथा निर्धारित शुल्क का भुगतान आवश्यक होगा।

वहीं, जन्म या मृत्यु की घटना के दो वर्ष से अधिक समय बाद सूचना दिए जाने पर पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate of the First Class) का आदेश आवश्यक होगा। संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट को भी जन्म अथवा मृत्यु की सत्यता का सत्यापन करना होगा और निर्धारित शुल्क लिया जाएगा।

गजट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस संशोधन अधिनियम के लागू होने की तारीख केंद्र सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचना जारी कर निर्धारित की जाएगी। यानी गजट में प्रकाशन की तारीख और अधिनियम के प्रभावी होने की तारीख अलग हो सकती है।

क्या क्या बदला?

1 वर्ष से अधिक और 2 वर्ष तक की देरी: DM/SDM या अधिकृत Executive Magistrate के आदेश से पंजीकरण।

2 वर्ष से अधिक की देरी: Judicial Magistrate First Class के आदेश से पंजीकरण।

दोनों परिस्थितियों में सत्यता का सत्यापन और निर्धारित शुल्क आवश्यक।

संशोधन Registration of Births and Deaths Act, 1969 की धारा 13 में किया गया है।

अधिनियम कब से प्रभावी होगा, यह केंद्र सरकार की अलग अधिसूचना से तय होगा।


महत्वपूर्ण: उपलब्ध गजट के इस पृष्ठ में संशोधन की प्रक्रिया स्पष्ट है, लेकिन संबंधित शुल्क की राशि और अधिनियम के प्रभावी होने की वास्तविक तारीख इस अंश में निर्धारित नहीं की गई है। इसलिए इन्हें इस गजट के आधार पर निश्चित बताना उचित नहीं होगा।


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