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Tuesday, September 1, 2026

जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नियमों में बड़ा बदलाव, देरी से पंजीकरण की प्रक्रिया हुई स्पष्ट, जानिए क्या हुआ बदलाव?

जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नियमों में बड़ा बदलाव, देरी से पंजीकरण की प्रक्रिया हुई स्पष्ट, जानिए क्या हुआ बदलाव?


नई दिल्ली। भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग ने Registration of Births and Deaths (Amendment) Act, 2026 को 6 अगस्त 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया है। यह अधिनियम Registration of Births and Deaths Act, 1969 में संशोधन करता है।

गजट में संशोधित धारा 13 के तहत जन्म या मृत्यु की सूचना निर्धारित समय के बाद दिए जाने की स्थिति में पंजीकरण के लिए अलग-अलग प्राधिकारी निर्धारित किए गए हैं।

एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष के भीतर देरी होने पर जन्म या मृत्यु का पंजीकरण संबंधित क्षेत्र के जिलाधिकारी (District Magistrate) अथवा उप-मंडलीय मजिस्ट्रेट (Sub-Divisional Magistrate), या जिलाधिकारी द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate) के आदेश पर किया जा सकेगा। इसके लिए जन्म या मृत्यु की सत्यता का सत्यापन तथा निर्धारित शुल्क का भुगतान आवश्यक होगा।

वहीं, जन्म या मृत्यु की घटना के दो वर्ष से अधिक समय बाद सूचना दिए जाने पर पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate of the First Class) का आदेश आवश्यक होगा। संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट को भी जन्म अथवा मृत्यु की सत्यता का सत्यापन करना होगा और निर्धारित शुल्क लिया जाएगा।

गजट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस संशोधन अधिनियम के लागू होने की तारीख केंद्र सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचना जारी कर निर्धारित की जाएगी। यानी गजट में प्रकाशन की तारीख और अधिनियम के प्रभावी होने की तारीख अलग हो सकती है।

क्या क्या बदला?

1 वर्ष से अधिक और 2 वर्ष तक की देरी: DM/SDM या अधिकृत Executive Magistrate के आदेश से पंजीकरण।

2 वर्ष से अधिक की देरी: Judicial Magistrate First Class के आदेश से पंजीकरण।

दोनों परिस्थितियों में सत्यता का सत्यापन और निर्धारित शुल्क आवश्यक।

संशोधन Registration of Births and Deaths Act, 1969 की धारा 13 में किया गया है।

अधिनियम कब से प्रभावी होगा, यह केंद्र सरकार की अलग अधिसूचना से तय होगा।


महत्वपूर्ण: उपलब्ध गजट के इस पृष्ठ में संशोधन की प्रक्रिया स्पष्ट है, लेकिन संबंधित शुल्क की राशि और अधिनियम के प्रभावी होने की वास्तविक तारीख इस अंश में निर्धारित नहीं की गई है। इसलिए इन्हें इस गजट के आधार पर निश्चित बताना उचित नहीं होगा।


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