अधिकारियों व कर्मचारियों की कार्यक्षमता और उपलब्धियों को वार्षिक गोपनीय आख्या (एसीआर) व पदोन्नति से जोड़ने पर होगा जोर, सीएम योगी ने कहा- सही व्यक्ति को सही पद पर तैनात करने की बनेगी व्यवस्था
एसीआर व पदोन्नति से अफसरों की कार्यक्षमता और उपलब्धियां जुड़ेंगी, उपाम को एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने पर जोर
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और जनकेंद्रित बनाने के लिए अधिकारियों व कर्मचारियों की कार्यक्षमता और उपलब्धियों को वार्षिक गोपनीय आख्या (एसीआर) व पदोन्नति से जोड़ने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि सही व्यक्ति को सही पद पर तैनात करने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। साथ ही उप्र प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (उपाम) को एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने में क्षमता विकास आयोग से सहयोग मांगा।
सीएम शुक्रवार को लोकभवन में मिशन कर्मयोगी के तहत साधना श्रृंखला की उत्तरी क्षेत्रीय कार्यशाला का शुभारंभ कर रहे थे। उपाम और केंद्र सरकार के क्षमता विकास आयोग की संयुक्त कार्यशाला में आठ राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 19.26 लाख से अधिक सरकारी कार्मिक आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर पंजीकृत हैं और करीब चार करोड़ प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे कर चुके हैं। प्रशिक्षण की सफलता का आकलन इससे होना चाहिए कि निर्णय कितने बेहतर हुए, प्रक्रियाएं कितनी सरल हुईं और नागरिकों को कितनी अच्छी सेवाएं मिलीं। पंचायतों और नगर निकायों के कार्मिकों की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया।
डिग्री ही दक्षता का प्रमाण नहीं
सीएम ने कहा, डिग्री और नियुक्तिपत्र से ही दक्षता साबित नहीं होती। उन्होंने इंसेफ्लाइटिस उन्मूलन के लिए समन्वित प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि समस्याओं का समाधान किसी एक विभाग के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। पहले प्रदेश की पहचान उपद्रवग्रस्त राज्य के रूप में थी, जबकि अब 36 सेक्टोरल पॉलिसी बनाई गई हैं।
प्रशासनिक सुधारों और क्षमता विकास में यूपी रोल मॉडल
लखनऊ। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रशासनिक सुधारों और क्षमता विकास के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। मिशन कर्मयोगी के तहत प्रदेश का प्रथम स्थान और आई-गॉट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर सर्वाधिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे करना इसकी प्रमुख उपलब्धियां हैं। वह लखनऊ में आयोजित उत्तर क्षेत्रीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। डॉ. सिंह ने कहा कि प्रदेश में कार्यक्रमों के आयोजन के दौरान प्रशासन का सहयोग और मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत रुचि कार्यों को सुचारु रूप से पूरा करने में अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में केंद्र सरकार बनने के बाद राजपत्रित अधिकारियों से दस्तावेजों के सत्यापन की अनिवार्यता समाप्त करने और सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता बढ़ाने जैसे कदम उठाए गए।