इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विवाह पंजीयन में उम्र के सत्यापन को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश
बाल विवाह रोकने के लिए नौ सूत्रीय गाइडलाइन जारी की
प्रयागराज । इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विवाह पंजीयन में उम्र के सत्यापन को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आधार कार्ड केवल पहचान का प्रमाण है, उम्र साबित करने का वैध दस्तावेज नहीं। इसी तरह, ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) के आधार पर उम्र का सत्यापन किए बिना विवाह पंजीयन नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी ने उत्तर प्रदेश विवाह पंजीयन नियमावली-2017 में संशोधन होने तक बाल विवाह रोकने के लिए नौ सूत्रीय गाइडलाइन जारी की है। सुनवाई 27 नवंबर 2026 को होगी।
मथुरा निवासी दीपक पाल की अपील पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि संबंधित विवाह का पंजीयन टीसी और आधार कार्ड के आधार पर किया गया था। आधार उम्र का प्रमाण नहीं है, जबकि टीसी किशोर न्याय अधिनियम की धारा 94 में दस्तावेजों की सूची में शामिल नहीं है।
हाईकोर्ट के निर्देश
1. लड़के की उम्र 21 वर्ष और लड़की की 18 वर्ष से कम होने पर विवाह पंजीकृत न किया जाए। संदेह पर बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी और जिलाधिकारी को सूचना दी जाए।
2. आनलाइन व्यवस्था में केवल आधार प्रमाणीकरण से प्रमाणपत्र जारी न हो। दोनों पक्षों की जन्मतिथि और प्रमाण के स्रोत का सत्यापन अनिवार्य किया जाए।
3. उम्र सत्यापन के स्पष्ट मानक तय हों। जन्म प्रमाणपत्र और हाईस्कूल के अभिलेखों को प्राथमिकता दी जाए।
4. प्रमुख सचिव, स्टांप एवं पंजीयन विभाग मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी करें। सत्यापन अधूरा रहने पर प्रमाणपत्र जारी न हो।
5. हाई कोर्ट के महानिबंधक आदेश सभी जिला जजों को भेजें। जिला जज संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर निर्देश लागू कराएं।
6. महानिरीक्षक निबंधन विवाह पंजीयन अधिकारियों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कराएं।
7. पंजीयन विभाग नियमित निरीक्षण करे और विवाह पंजीयन के अभिलेख सुरक्षित रखे।
8. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव हर दो महीने में पंजीयन कार्यालयों का निरीक्षण कर उम्र सत्यापन के अभिलेखों की जांच करें और रिपोर्ट जिला जज को दें।