संपत्ति न बताने वाले 68,236 राज्यकर्मियों का लटका वेतन, राज्यकर्मियों को 31 जनवरी तक देना था वर्ष 2025 तक की चल-अचल संपत्ति का ब्योरा
मुख्य सचिव के निर्देश के बावजूद मानव संपदा पोर्टल पर नहीं दिया गया संपत्ति का ब्योरा
संपत्ति की जानकारी न देने वाले राज्यकर्मियों को जनवरी का नहीं मिलेगा फरवरी में वेतन
लखनऊ: ऐसा लगता है कि 68 हजार से ज्यादा राज्यकर्मियों को अपने वेतन की कोई चिंता ही नहीं हैं। अगर चिंता होती तो मुख्य सचिव के स्पष्ट आदेश पर सभी ने अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा शनिवार तक दे दिया होता। मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण न देने से इन कार्मिकों को अब जनवरी माह का वेतन फरवरी में नहीं मिलेगा। संपत्ति का ब्योरा न देने वाले राज्यकर्मियों के खिलाफ सरकार कड़े कदम भी उठा सकती है।
भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टालरेंस नीति के मद्देनजर योगी सरकार राज्यकर्मियों की चल-अचल संपत्ति का ब्योरा जुटाने को लेकर बेहद गंभीर है। गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मुख्य सचिव एसपी गोयल की ओर से विभागाध्यक्षों, कार्यालयाध्यक्षों और शासन के अधिकारियों को पिछले दिनों निर्देश दिए गए थे कि सभी राज्यकर्मी अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा 31 जनवरी तक मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करें।
उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के नियम 24 के तहत प्रदेश के 8,66,261 राज्यकर्मियों को पिछले वर्ष 2025 तक की चल-अचल संपत्ति का ब्योरा 31 जनवरी तक मानव संपदा पोर्टल पर देना अनिवार्य था। विभागों के नोडल अधिकारी और आहरण-वितरण अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि 31 जनवरी तक संपत्ति का विवरण अपलोड न करने वालों का वेतन रोक दिया जाए।
वेतन रोकने के आदेश के बावजूद 68,236 राज्यकर्मियों ने शनिवार रात तक अपनी संपत्ति का ब्योरा मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड नहीं किया। संपत्ति न बताने वालों में सर्वाधिक 34,926 राज्यकर्मी तृतीय श्रेणी वाले हैं। 22,624 राज्यकर्मी चतुर्थ श्रेणी जबकि द्वितीय श्रेणी के 7204 और प्रथम श्रेणी के 2628 अधिकारी हैं। 1612 अन्य कार्मिकों में से भी 854 ने अपनी संपत्ति नहीं बताई है जिससे इनका भी वेतन रुकेगा।
कुल राज्यकर्मियों में से जिन आठ प्रतिशत कार्मिकों ने अपनी संपत्ति के बारे में शनिवार तक जानकारी नहीं दी है उनमें लोक निर्माण, राजस्व, बेसिक व माध्यमिक शिक्षा, समाज कल्याण, महिला कल्याण, सहकारिता, आबकारी, खाद्य रसद, चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण अभियंत्रण, उद्यान, पशुधन, परिवहन विभाग आदि प्रमुख हैं।