पंचायत चुनाव पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट से होंगे
04 माह पहले आयोग का कार्यकाल पूरा हुआ, जिसे एक साल बढ़ाया गया
03 साल पहले निकाय चुनाव के वक्त भी यही प्रक्रिया अपनाई गई थी
लखनऊ । इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में एक जनहित याचिका पर जवाब देते हुए, राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि पंचायत चुनाव से पूर्व पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर लिया जाएगा तथा संबंधित कानून के तहत उक्त आयोग के रिपोर्ट के आधार पर ही ओबीसी आरक्षण लागू किया जाएगा। सरकार के उक्त जवाब के आधार पर न्यायालय ने संबंधित याचिका को निस्तारित कर दिया। हालांकि इस संबंध में सरकार की ओर से कोई हलफनामा दाखिल नहीं किया गया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव की याचिका पर पारित किया। याचिका में कहा गया था कि अक्टूबर 2025 में पिछड़ा वर्ग आयोग का कार्यकाल पूरा हो चुका है, जिसे एक वर्ष का कार्यकाल विस्तार भी दिया गया है। सर्वोच्च न्यायालय ने जयश्री लक्ष्मण राव पाटील मामले में समर्पित आयोग का गठन कर, उक्त आयोग के सर्वे व रिपोर्ट के आधार पर ही स्थानीय चुनावों में आरक्षण लागू किए जाने का आदेश दिया था।
दलील दी गई कि अप्रैल व जुलाई 2026 के बीच उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव होने हैं, बावजूद इसके अब तक एक समर्पित आयोग का गठन नहीं किया जा सका है। यह भी दलील दी गई कि छह सदस्यीय आयोग के गठन का मामला कैबिनेट के समक्ष विचाराधीन है। वहीं राज्यसरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने शासन से प्राप्त निर्देशों के आधार पर न्यायालय को बताया कि पंचायत चुनाव से पूर्व पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर लिया जाएगा तथा संबंधित कानून के तहत ही चुनाव कराए जाएंगे।
चुनाव टले तो बैठाए जाएंगे प्रशासक
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव समय पर न हो पाने की स्थिति में पंचायतों का कार्यकाल 25 मई को खत्म होने के बाद यहां पर प्रशासक बैठाए जाएंगे। सभी जिलों में डीएम ही जिला निर्वाचन अधिकारी होते हैं, ऐसे में प्रशासक बनाने का निर्णय उन्हीं को लेना होता है। ग्राम पंचायतों में तो संबंधित ब्लाक के एडीओ पंचायत व ग्राम सचिव कामकाज देखते हैं। वहीं डीएम तीनों स्तर गांव, ब्लॉक और जिला स्तर पर खंड विकास अधिकारी, एडीएम और डीएम को भी सौंप सकते हैं। यह फैसला जिलों के स्तर पर जिलाधिकारी ही लेते हैं।
पांच सदस्यीय होगा आयोग
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए अभी समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग गठित होता है तो भी उसे रिपोर्ट तैयार करने में समय लगेगा। सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय आयोग बनाया जाता है। जिसमें सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी भी होते हैं। यह निर्णय शासन को ही करना है कि वह किसे इस आयोग में शामिल करे।
कोर्ट ने दिए थे आदेश
कानूनी रूप से बिना समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग गठन पंचायत चुनाव कराया नहीं जा सकता है। नवंबर 2022 में यूपी में निकाय चुनावों पर कोर्ट ने समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग गठन न किए जाने और सीटों पर ओबीसी आरक्षण तय न करने के चलते रोक लगा दी थी। तब शासन को यह आयोग बनाकर सीटों पर ओबीसी आरक्षण तय करना पड़ा। इसके बाद मई 2023 में चुनाव हो पाए थे। यूपी में 2027 मैं विधानसभा चुनाव है। उसकी तैयारियां भी होंगी। ऐसे में पहले पंचायत चुनाव आसान नहीं होगा।
यूपी में चुनाव समय पर कराना चुनौती
लखनऊ। यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को समय पर कराना बड़ी चुनौती होगा। अब अगर समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोगका गठन भी हो जाता है तो भी समय पर चुनाव करा पाना आसान नहीं होगा। ऐसे में अब त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का टलना तय माना जा रहा है। 25 मई को पंचायतों का कार्यकाल खत्म हो रहा है और तब तक चुनाव करा पाना आसान नहीं होगा। समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन की फाइल शासन में लंबित है। पंचायती राज निदेशालय की ओर से अगस्त 2025 में ही प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। उसके बाद दो बार रिमांडर भी भेजे गए। अभी तक आयोग के गठन को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। अब हाईकोर्ट में जनहित याचिका के जवाब में शासन की ओर से जानकारी दी गई है कि वह समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के बाद ही पंचायत चुनाव कराएगी।