Searching...
Saturday, February 7, 2026

37 साल की लंबी सेवा के बाद कर्मचारी को पेंशन से वंचित करना अन्यायपूर्ण –हाईकोर्ट

37 साल की लंबी सेवा के बाद कर्मचारी को पेंशन से वंचित करना अन्यायपूर्ण, नई पेंशन योजना लागू होने के बाद नियमितीकरण पर पुरानी योजना से नहीं कर सकते वंचित : हाईकोर्ट


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि दशकों तक विभाग में सेवा देने वाले कर्मचारी को पुरानी पेंशन योजना से इस आधार पर वंचित नहीं किया जा सकता कि उसका नियमितीकरण नई पेंशन योजना लागू होने के बाद हुआ है। 37 साल की लंबी सेवा के बाद कर्मचारी को पेंशन से वंचित करना अन्यायपूर्ण है।


यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने केंद्र सरकार और रेलवे की ओर से दाखिल उस याचिका को खारिज करते हुए दिया है, जिसमें रेलकर्मी मोहम्मद शमीम के पक्ष में पारित केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के आदेश को चुनौती दी गई थी।

मोहम्मद शमीम 10 नवंबर 1975 को उत्तरी रेलवे में कमीशन वेटर के रूप में तैनात हुए थे। 120 दिन की सेवा के बाद उन्हें अस्थायी कर्मचारी का दर्जा मिल गया। शमीम ने रेलवे में कुल 37 साल तक अपनी सेवाएं दीं और 31 अक्टूबर 2014 को सेवानिवृत्त हुए। हालांकि, उनकी सेवाओं को आधिकारिक रूप से 10 दिसंबर 2007 को नियमित किया गया था।


रेलवे की दलील

रेलवे के अधिवक्ता ने दलील दी कि चूंकि शमीम का नियमितीकरण 2007 में हुआ जब नई पेंशन योजना लागू हो चुकी थी। ऐसे में वह पुरानी पेंशन के हकदार नहीं हैं।


कोर्ट ने कहाः सेवा अवधि को नहीं कर सकते नजरअंदाज

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के मुंशी राम मामले का हवाला देते हुए रेलवे की दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। कहा कि नियमितीकरण से पहले की गई 50 प्रतिशत अस्थायी सेवा को पेंशन के लिए अर्हक सेवा माना जाना चाहिए। लिहाजा, अस्थायी दर्जे से लेकर नियमितीकरण तक की सौ फीसदी सेवा को भी पेंशन गणना में शामिल किया जाए।


विभिन्न जोन के कर्मियों के साथ नहीं अपना सकते अलग-अलग मापदंड

कोर्ट ने कहा कि रेलवे के विभिन्न जोन के कर्मचारियों के साथ अलग-अलग मापदंड नहीं अपनाए जा सकते। जब अन्य जोन में कमीशन वेंडर्स को यह लाभ मिल रहा है तो याची को भी समानता के अधिकार के तहत लाभ मिलना चाहिए।

संबन्धित खबरों के लिए क्लिक करें

GO-शासनादेश NEWS अनिवार्य सेवानिवृत्ति अनुकम्पा नियुक्ति अल्‍पसंख्‍यक कल्‍याण अवकाश आधार कार्ड आयकर आरक्षण आवास उच्च न्यायालय उच्चतम न्यायालय उच्‍च शिक्षा उत्तर प्रदेश उत्तराखण्ड उपभोक्‍ता संरक्षण एरियर एसीपी ऑनलाइन कर कर्मचारी भविष्य निधि EPF कामधेनु कारागार प्रशासन एवं सुधार कार्मिक कार्यवाही कृषि कैरियर कोर्टशाला कोषागार खाद्य एवं औषधि प्रशासन खाद्य एवम् रसद खेल गृह गोपनीय प्रविष्टि ग्रामीण अभियन्‍त्रण ग्राम्य विकास ग्रेच्युटी चतुर्थ श्रेणी चयन चिकित्सा चिकित्सा प्रतिपूर्ति चिकित्‍सा एवं स्वास्थ्य छात्रवृत्ति जनवरी जनसुनवाई जनसूचना जनहित गारण्टी अधिनियम धर्मार्थ कार्य नकदीकरण नगर विकास निबन्‍धन नियमावली नियुक्ति नियोजन निर्वाचन निविदा नीति न्याय न्यायालय पंचायत चुनाव 2015 पंचायती राज पदोन्नति परती भूमि विकास परिवहन पर्यावरण पशुधन पिछड़ा वर्ग कल्‍याण पीएफ पुरस्कार पुलिस पेंशन प्रतिकूल प्रविष्टि प्रशासनिक सुधार प्रसूति प्राथमिक भर्ती 2012 प्रेरक प्रोबेशन बजट बर्खास्तगी बाट माप बेसिक शिक्षा बैकलाग बोनस भविष्य निधि भारत सरकार भाषा मंहगाई भत्ता मत्‍स्‍य महिला एवं बाल विकास माध्यमिक शिक्षा मानदेय मानवाधिकार मान्यता मुख्‍यमंत्री कार्यालय युवा कल्याण राजस्व राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद राज्य सम्पत्ति राष्ट्रीय एकीकरण रोक रोजगार लघु सिंचाई लोक निर्माण लोक सेवा आयोग वरिष्ठता विकलांग कल्याण वित्त विद्युत विविध विशेष भत्ता वेतन व्‍यवसायिक शिक्षा शिक्षा शिक्षा मित्र श्रम संवर्ग संविदा संस्‍थागत वित्‍त सचिवालय प्रशासन सत्यापन सत्र लाभ सत्रलाभ समन्वय समाज कल्याण समाजवादी पेंशन समारोह सर्किल दर सहकारिता सातवां वेतन आयोग सामान्य प्रशासन सार्वजनिक उद्यम सार्वजनिक वितरण प्रणाली सिंचाई सिंचाई एवं जल संसाधन सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम सूचना सेवा निवृत्ति परिलाभ सेवा संघ सेवानिवृत्ति सेवायोजन सैनिक कल्‍याण स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन स्थानांतरण होमगाडर्स