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Saturday, February 7, 2026

यूपी में एसआईआर का समय 1 माह बढ़ा, दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि 6 फरवरी से बढ़ाकर 6 मार्च की गई

यूपी में एसआईआर का समय 1 माह बढ़ा, दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि 6 फरवरी से बढ़ाकर 6 मार्च की गई

मैपिंग से जुड़े नोटिसों के निस्तारण की प्रक्रिया 27 मार्च तक... 10 अप्रैल को आएगी अंतिम मतदाता सूची


लखनऊ। प्रदेश में जारी मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान को लेकर केंद्रीय चुनाव आयोग ने दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की समयसीमा 6 मार्च तक बढ़ा दी है। अभी दावे और आपत्तियों के लिए 6 फरवरी अंतिम तारीख थी। मैपिंग से जुड़े सभी नोटिसों के निस्तारण की प्रक्रिया भी 27 फरवरी के बजाय 27 मार्च तक पूरी की जाएगी। अंतिम मतदाता सूची अब 10 अप्रैल को प्रकाशित की जाएगी।


लोकभवन में शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने प्रेसवार्ता में बताया कि फार्म-6 के आवेदन लगातार बढ़ रहे हैं। मैपिंग को लेकर नोटिसों की संख्या भी ज्यादा है। नोटिस और फार्म की भारी संख्या की वजह से समय बढ़ाने की मांग राजनीतिक दलों ने की थी। इसे देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने केंद्रीय चुनाव आयोग से समयसीमा बढ़ाने की मांग की थी। इसे स्वीकार कर समयावधि एक माह बढ़ा दी गई। उन्होंने बताया कि विदेश में रह रहे नागरिक फार्म-6A भरकर मतदाता सूची में नाम जुड़वा सकते हैं।

उन्होंने बताया कि मतदाताओं की समस्याएं दूर करने के लिए बूथ लेवल अधिकारी सुबह 10 से 12 बजे के बीच पोलिंग स्टेशन पर रहेंगे। लोग यहां मसौदा मतदाता सूची में अपना नाम देख सकते हैं। बीएलओ के पास पिछली मतदाता सूची और नो मेपिंग वाले और विसंगति वाले वोटर की लिस्ट भी रहेगी।


नाम जोड़ने के लिए 37 लाख आवेदन : मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि फार्म-6 के आवेदन लगातार बढ़ रहे हैं, क्योंकि बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जिनके नाम मतदाता सूची में दर्ज नहीं थे और वे लगातार आवेदन कर रहे हैं। 6 जनवरी से 6 फरवरी के बीच 16 लाख से ज्यादा फार्म 6 आए। अभी तक कुल 37,80,414 आवेदन आए हैं।


3.26 करोड़ को भेजा जाना है नोटिस
गणना फार्म (मैपिंग) से जुड़ी स्थिति पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि मैपिंग के दौरान लगभग 1 करोड़ 4 लाख लोग ऐसे पाए गए जिनमें तार्किक विसंगतियां थीं, इसलिए उन्हें सूची में शामिल नहीं किया गया। इन सभी को नोटिस भेजे जा रहे हैं। तार्किक विसंगतियों में कहीं पिता के नाम में अंतर है तो कहीं पिता और पुत्र की आयु में अंतर 15 साल से कम आ रहा है। ऐसे मामलों में कुल 3.26 करोड़ लोगों को नोटिस भेजे जाने हैं। अब तक 2.37 करोड़ नोटिस जनरेट किए जा चुके हैं। इनमें से 86 लाख नोटिस वितरित किए जा चुके हैं। 30.30 लाख की सुनवाई पूरी हो चुकी है।


फार्म-7 को लेकर राजनीतिक दलों के आरोप किए खारिज

नवदीप रिणवा ने फार्म-7 को लेकर समाजवादी पार्टी द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि सभी अधिकारियों को इस मामले में सचेत किया गया है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट से काटने के लिए फार्म 7 है। इसे भरने वाले को अपना वोटर कार्ड देना होगा।

जिस व्यक्ति के विरुद्ध नाम काटने की आपत्ति है, उसका कारण बताना होगा। बल्क में इस फार्म को स्वीकार नहीं किया जाता। प्रदेश में 5.80 लाख बीएलओ हैं। वे एक दिन में अधिकतम दस फार्म दे सकते हैं। इसके साथ में उन्हें अंडरटेकिंग भी देना होगी।

फार्म 7 के बाद आपत्ति करने वाले और आपत्ति के दायरे में आने वाले को नोटिस भेजा जाता है। कारण पूछे जाते हैं। फार्म-7 के अभी तक महज 82,684 आवेदन प्राप्त हुए हैं। जिसे गलत लगता है, वो एफआईआर कराए।

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