कहा, इस मामले में संवेदना जरूरी, याची का दावा खारिज करने का आदेश रद्द
लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाने पर जोर देते हुए पंजाब नेशनल बैंक द्वारा पारित उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मृत कर्मचारी के बेटे की नौकरी का दावा बिना ठोस कारण बताए खारिज कर दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि करुणा शब्द केवल नियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पीड़ित परिवार की भावनाओं और परिस्थितियों को भी समझना जरूरी है।
न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की एकल पीठ ने अभिषेक जायसवाल की याचिका स्वीकार करते हुए 19 सितंबर 2023 के बैंक आदेश को निरस्त कर दिया और मामला सीतापुर स्थित बैंक के केंद्रीय कार्यालय के मुख्य प्रबंधक को वापस भेज दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि आठ सप्ताह के भीतर नए सिरे से विचार कर निर्णय लिया जाए।
इस मामले के अनुसार, याची के पिता केशवराम जायसवाल का 2016 में सेवा के दौरान निधन हो गया था। इसके बाद उनकी पत्नी ने 2018 में बेटे की अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था, जिस पर बैंक ने औपचारिकताएं भी पूरी करवाई। बैंक ने 2021 में नया आवेदन मंगवाकर 2023 में दावा खारिज कर दिया।
याची के अधिवक्ता ने कहा कि यद्यपि प्रारंभिक आवेदन में शब्दों का चयन ठीक से नहीं किया गया था, क्योंकि उसमें पुत्र की स्नातक की पढ़ाई पूरी होने के बाद नियुक्ति की इच्छा व्यक्त की गई थी। फिर भी यह समय सीमा के भीतर किया गया एक वैध दावा था। उधर, प्रतिवादी बैंक के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता की मां द्वारा 2018 में भेजा गया पत्र प्रभावी रूप से भविष्य में नियुक्ति के लिए एक अनुरोध था, जो अस्वीकार्य था।
कोर्ट ने माना कि प्रारंभिक आवेदन समय सीमा के भीतर था और बैंक की कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि दावा वैध था। केवल नए आवेदन के आधार पर पुराने दावे को अमान्य नहीं किया जा सकता।