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Sunday, August 16, 2026

कैग की रिपोर्ट ने देश के पेंशन सिस्टम की खामियों को किया उजागर, पेंशन सेक्टर के लिए एकल नियामक बनाने की सिफारिश

कैग की रिपोर्ट ने देश के पेंशन सिस्टम की खामियों को किया उजागर, पेंशन सेक्टर के लिए एकल नियामक बनाने की सिफारिश 

CAG ने पेंशन के लिए एकल नियामक को बताया वक्त की जरूरत,  संसद में पेश रिपोर्ट में देश के पेंशन सेक्टर की खामियों को किया उजागर

अलग-अलग संस्थाएं होने से सब्सक्राइबर्स की संख्या व संपत्ति की पूरी जानकारी नहीं

नई दिल्ली: भारत में पेंशन को लेकर राजनीति तो खूब होती है, लेकिन इस सेक्टर के बिखराव पर कोई चर्चा नहीं करता। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की हालिया रिपोर्ट ने देश के पेंशन सिस्टम की खामियों को उजागर किया है। संसद में पेश इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में पेंशन सेक्टर की पूरी तस्वीर पेश करने वाले डाटा का अभाव है। विभिन्न संस्थाएं अपनी-अपनी योजनाएं चला रही हैं, जिससे किसी एक मंत्रालय या संगठन के पास सब्सक्राइबर्स की कुल संख्या, कुल संपत्ति या पूरे सिस्टम की संपूर्ण जानकारी नहीं है।


कैग ने पहली बार भारत के संपूर्ण पेंशन सेक्टर पर एक व्यवस्थित व समग्र रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट के अनुसार, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) केवल ईपीएफ और कर्मचारी पेंशन स्कीम (ईपीएस) की जानकारी रखता है। पेंशन फंड नियामक व विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) केवल नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) पर ध्यान केंद्रित करता है। कोयला खान भविष्य निधि संगठन (सीएमपीएफओ) और सीमेंस भविष्य निधि संगठन (एसपीएफओ) अपने-अपने क्षेत्र की योजनाओं तक सीमित हैं। नतीजा यह है कि व्यापक आंकड़े कहीं उपलब्ध नहीं हैं। इस वजह से देश में पेंशन सेक्टर की वस्तुस्थिति  का आकलन करना मुश्किल है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि पेंशन सेक्टर के लिए एक एकल नियामक बनाने पर विचार किया जाना चाहिए। इस तरह का सुझाव पहले वित्तीय क्षेत्र में कानूनी सुधार के लिए गठित आयोग (वित्तीय क्षेत्र विधायी सुधार आयोग एफएसएलआरसी) द्वारा भी दिया गया था, लेकिन सरकार ने इसे नजरअंदाज कर दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि जैसे बैंकिंग नियमन के लिए आरबीआइ, बीमा क्षेत्र के लिए आइआरडीएआइ और शेयर बाजार के लिए सेबी काम करते हैं, वैसे ही एक नियामक पेंशन सेक्टर में नीतियों को सुव्यवस्थित कर सकता है, दोहराव खत्म कर सकता है और सब्सक्राइबर सुरक्षा में एकरूपता ला सकता है।

सीएजी की रिपोर्ट की उक्त सिफारिश के पीछे मुख्य कारण यह बताया है कि अलग-अलग पेंशन स्कीमों में मिलने वाले लाभों में भारी अंतर है। ईपीएफओ प्रोविडेंट फंड, मासिक पेंशन और जीवन बीमा का पैकेज देता है। एसपीएफओ सिर्फ प्रोविडेंट फंड उपलब्ध कराता है। पुरानी पेंशन स्कीम में निश्चित पेंशन मिलती थी, जबकि एनपीएस बाजार से जुड़ा माडल है जिसमें प्रोविडेंट फंड लाभ नहीं है। इसके साथ ही पुरानी पेंशन स्कीम में कम से कम एक हजार रुपये की पेंशन की गारंटी है, जबकि एनपीएस में ऐसा नहीं है।

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