एक महीने में मिलेगा जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र, उत्तर प्रदेश में जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नए नियम लागू, पंचायतों को भेजा गया निर्देश
एक महीने बाद देना होगा 50 रुपये और एक साल बाद देना होगा 100 रुपये विलंब शुल्क
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश सरकार ने जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियमावली-2026 लागू कर जन्म और मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बना दिया है। नई नियमावली के तहत सूचना देने की समय सीमा, प्रमाणपत्र जारी करने, विलंब शुल्क, रिकॉर्ड की खोज और नाम संशोधन सहित कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। शासन से आदेश आने के बाद इसे जिले की सभी पंचायतों को भेजा जा चुका है।
नईनियमावली के अनुसार, जन्म या मृत्यु की सूचना संबंधित प्राधिकारी को 21 दिनों के भीतर निर्धारित प्रपत्र 1, 2 या 3 में देना अनिवार्य होगा। सभी प्रपत्रों में नाम, जन्म या मृत्यु की तिथि और पूरा पता निर्धारित प्रारूप में दर्ज करना होगा। पंजीकरण पूरा होने के बाद 30 दिनों के भीतर परिवार या संबंधित संस्था को जन्म अथवा मृत्यु प्रमाणपत्र इलेक्ट्रॉनिक या अन्य माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा।
यदि प्रमाणपत्र प्राप्त नहीं किया जाता है तो 15 दिनों के भीतर उसे डाक के माध्यम से भेजने की व्यवस्था की गई है। विलंब से पंजीकरण कराने पर भी नई व्यवस्था लागू होगी। 30 दिन से एक वर्ष तक की देरी होने पर 50 रुपये विलंब शुल्क देना होगा, जबकि एक वर्ष से अधिक विलंब होने पर सक्षम मजिस्ट्रेट के आदेश के साथ 100 रुपये शुल्क जमा करना होगा। रिकॉर्ड की खोज के लिए प्रति वर्ष 20 रुपये, प्रमाणपत्र की प्रति के लिए 50 रुपये और रिकॉर्ड उपलब्ध न होने का प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए 20 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।
डीपीआरओ रवि शंकर द्विवेदी ने बताया कि बिना नाम दर्ज हुए नवजात का नाम 12 माह के भीतर दर्ज कराने की सुविधा दी गई है। विशेष परिस्थितियों में पांच रुपये शुल्क देकर नाम दर्ज कराया जा सकेगा। किसी त्रुटि के संशोधन के बाद संबंधित आवेदक के स्थायी पते पर इसकी सूचना भी भेजी जाएगी। इसके अलावा जन्म और मृत्यु रजिस्टर को स्थायी अभिलेख घोषित किया गया है, जबकि मृत्यु के कारण संबंधी मेडिकल प्रमाणपत्र को कम कम से कम पांच वर्ष तक सुरक्षित रखने का प्रावधान किया है।