शब्द सीमा में बंधे पेंशनरों के लिए अपनी पूरी बात रखने की है चुनौती, आठवें वेतन आयोग के तहत पेंशनरों को अधिकतम 200 शब्दों में देनी है सलाह
पोर्टल पर निर्धारित शब्द सीमा से अधिक का जवाब नहीं किया जा रहा स्वीकार
प्रयागराज। आठवें वेतन आयोग को लागू करने से पहले कर्मचारियों, पेंशनरों से प्रस्तावित सिफारिशों पर सलाह और आपत्तियां मांगी गई हैं। इसके लिए 18 सवालों की एक प्रश्नावली जारी की गई है, लेकिन समस्या यह है कि इसके लिए 200 शब्दों की सीमा निर्धारित है। पेंशनरों की पहली आपत्ति यही है कि इतनी कम शब्द सीमा में वह अपनी पूरी बात कैसे रख सकते हैं।
उदाहरण के तौर पर न्यूनतम वेतन, फिटमेंट फैक्टर, सीपीआई आदि कई ऐसे बिंदु हैं, जिन पर बिना तर्क या उदाहरण दिए बात प्रभावी ढंग से प्रस्तुत नहीं की जा सकती है। आयोग की प्रश्नावली में जो सवाल दिए हैं, उनमें एक प्रश्न में कई उप प्रश्न निहित हैं। प्रश्नों की जो भूमिका दी गई है, उस पर भी तर्कसंगत तथ्य सामने लाना जरूरी है। इसके बाद मूल उत्तर पर बात आती है।
उत्तर प्रदेश सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष एएन यादव ने आठवें वेतन आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई को पत्र लिखकर यह मांग की है कि पेंशनरों को अपनी बात रखने के लिए शब्दों की सीमा में न बांधा जाए।
पोर्टल पर उत्तर स्वीकार करने के साथ ही पीडीएफ फाइल के माध्यम से भी ज्ञापन लिए जाए, ताकि पेंशनर्स अपनी पूरी बात तथ्यों व तर्कों के साथ आयोग के समक्ष रख सकें।
एएन यादव ने कहना है कि पोर्टल पर 200 शब्दों से अधिक के उत्तर स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। ऐसे में पोर्टल पर भी उत्तर की शब्द सीमा बढ़ाकर 450 से 500 तक की जाए। कर्मचारी व पेंशनर्स संगठनों के ज्ञापन ई-मेल के माध्यम से भी स्वीकार किए जाएं। 10 वर्ष में एक बार वेतन आयोग का लाभ मिलता है। इसलिए पेंशनरों को अपनी बात रखने के लिए ज्ञापन पर प्रतिबंध न लगाया जाए।
डीए गणना के लिए अलग सीपीआई तैयार करने पर जोर
कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (डीए) व पेंशनरों को महंगाई राहत (डीआर) की गणना के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) अलग से तैयार करने की मांग की गई है। छठवें वेतन आयोग ने रिपोर्ट में कहा था कि मौजूदा सीपीआई कर्मचारियों की ओर से उपभोग किए जाने वाले मदों का उचित प्रतिनिधित्व नहीं करता है। ऐसे में कर्मचारियों, शिक्षकों व पेंशनरों के लिए अलग से सीपीआई तैयार किया जाए। इसे भारत सरकार ने स्वीकार कर अपने राजपत्र में 29 अगस्त 2008 को प्रकाशित भी किया था पर क्रियान्वयन अब तक नहीं हुआ। इन सब तथ्यों को महंगाई भत्ते के प्रश्न के उत्तर में 200 शब्दों में कतई नहीं व्यक्त किया जा सकता।