नई दिल्ली। देश में 1 अप्रैल 2026 से नई आयकर व्यवस्था शुरू होने जा रही है। इसके तहत 1961 का पुराना आयकर अधिनियम हट जाएगा और उसकी जगह नया आयकर कानून-2025 लागू हो जाएगा। इसी के साथ आयकर नियम-2026 भी प्रभावी हो जाएंगे। वित्त मंत्रालय ने 20 मार्च को इसकी अधिसूचना जारी कर दी है।
यह केवल एक नया कानून नहीं है, बल्कि आजादी के बाद कर प्रणाली सिस्टम में किया गया सबसे बड़ा सुधार है। इसके साथ ही करदाताओं की सुविधा के लिए ‘प्रारंभ’ नाम का जागरूकता अभियान और आयकर पोर्टल 2.0 को भी शुरू किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन बदलावों का मकसद टैक्स नियमों को आसान बनाना है। इससे निवेशकों, कारोबारियों और आम करदाताओं को सहूलियत मिलेगी।
आम करदाताओं के लिए प्रारंभ योजना की शुरुआत
आम करदाताओं के लिए सरकार ने 'प्रारंभ' नाम की एक जागरूकता मुहिम शुरू की है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश का हर नागरिक नए नियमों को समझ सके और बिना किसी डर के टैक्स भर सके।
आयकर विभाग के अनुसार, करदाताओं की सुविधा के लिए 2,200 सवाल-जवाब और 186 फॉम्स से ज्यादा गाइडेंस नोट तैयार किए गए हैं। 'प्रारंभ' के तहत मल्टीमीडिया अभियान, एजुकेशनल मैटेरियल और डिजिटल तरीके शामिल होंगे। इससे नए नियमों को लेकर समझ बढ़ेगी। इसके अलावा 'कार साथी' भी लॉन्च किया जाएगा। यह एक एआई चैटवॉट है। यह 24 घंटे सहायता करेगा। इसके लिए यह आयकर विभाग की वेबसाइट का इस्तेमाल करेगा।
टैक्स पोर्टल 2.0 का आगाज
पुराने पोर्टल की तकनीकी खामियों को दूर करते हुए अब इनकम टैक्स 2.0 वेबसाइट को लॉन्च कर दिया गया है। यह वेबसाइट पहले से कहीं ज्यादा तेज, सुरक्षित और प्रयोग करने में अधिक आसान है। नई वेबसाइट से टैक्स देने वालों को रिफंड और रिटर्न भरने में अब कम समय लगेगा।
नियमों की संख्या घटी
विभाग के अनुसार, 1961 के पुराने कानून में अब तक 4000 से ज्यादा संशोधन हो चुके थे। इसकी वजह से कानून इतना उलझ गया था कि आम आदमी तो क्या, कर विशेषज्ञों के लिए भी इसे समझना मुश्किल था। नए कानून में टैक्स नियमों की संख्या 510 से घटाकर 333 कर दी गई है।
इन नियमों में भी बदलाव
1. आईटीआर की समय सीमा बढ़ी : आईटीआर-3 और आईटीआर-4 को दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी गई है। आईटीआर -1 और 2 के लिए अंतिम तारीख 31 जुलाई ही रहेगी।
2. संशोधित रिटर्न की तारीख भी बदली : संशोधित रिटर्न दाखिल करने की तारीख 31 मार्च कर दी गई है। अगर कोई करदाता 31 दिसंबर के बाद इसे दाखिल करना चाहता है तो शुल्क देना होगा।
3. इन पर बदलेगा टीसीए : विदेश में शिक्षा और चिकित्सा के लिए भेजी गई 10 लाख रुपये से अधिक की राशि पर टीसीएस 5% से घटाकर 2% हो जाएगा। इसके साथ ही विदेशी पर्यटन पैकेजों पर भी 2% टीसीएस लगेगा।
4. इन पर टीडीएस नहीं लगेगा : मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल से मिलने वाले मुआवजे के ब्याज पर अब कोई आयकर नहीं लगेगा और इस पर टीडीएस भी नहीं कटेगा।
5. टीडीएस के लिए आसान प्रक्रिया : निवेशक अब फॉर्म 15जी या 15एच सीधे डिपॉजिटरी में जमा कर सकते हैं। इससे डिविडेंड और अन्य निवेश इनकम पर अतिरिक्त टीडीएस कटने से बचा जा सकेगा।
6. ब्याज पर टैक्स : अगर कंपनी बिना ब्याज या कम ब्याज पर लोन देती है, तो उस फायदे पर टैक्स एसबीआई की ब्याज दर के हिसाब से लगेगा। इससे कंपनी से लोन लेना महंगा पड़ सकता है।