Searching...
Thursday, March 12, 2026

शेयर में और चल संपत्ति के लेनदेन के बारे में सरकार को बताना होगा, हर वर्ष अचल संपत्ति का विवरण देना अनिवार्य, उप्र सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली में संशोधन जारी

शेयर में और चल संपत्ति के लेनदेन के बारे में सरकार को बताना होगा, हर वर्ष अचल संपत्ति का विवरण देना अनिवार्य, उप्र सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली में संशोधन जारी 


दिनांक 11 मार्च, 2026 को प्रख्यापित उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारियों की आचरण (संशोधन) नियमावली  2026 जारी








राज्यकर्मियों को छह माह के वेतन से ज्यादा पैसा शेयर में और दो माह के वेतन से अधिक की चल संपत्ति के लेनदेन के बारे में सरकार को बताना होगा,  हर वर्ष अचल संपत्ति का विवरण देना अनिवार्य

उप्र सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली में संशोधन को स्वीकृति

2 माह के वेतन से अधिक की चल संपत्ति के लेन-देन की भी देनी होगी सूचना

प्रत्येक वर्ष राज्य कर्मचारियों को अचल संपत्तियों की भी करनी होगी घोषणा


 लखनऊप्रदेश के राज्य कर्मचारी यदि एक कैलेंडर वर्ष में छह माह के मूल वेतन से अधिक की राशि स्टाक, शेयर या अन्य निवेश माध्यमों में लगाते हैं तो उन्हें इसकी जानकारी सक्षम प्राधिकारी को देना अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को लोकभवन में हुई कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारियों व की आचरण नियमावली, 1956 में संशोधन को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। वर्तमान नियमावली में इसका कोई प्रविधान नहीं था। प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार की तर्ज पर नियमावली में संशोधन किया है।

 उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारियों की आचरण (संशोधन) नियमावली, 2026 को स्वीकृति मिल गई है। इसके तहत अब राज्यकर्मी दो माह के मूल वेतन से अधिक मूल्य की चल संपत्ति से जुड़ा कोई लेन-देन करते हैं, तो उन्हें तत्काल इसकी सूचना संबंधित प्राधिकारी को देनी होगी। पहले नियमावली में एक माह के मूल वेतन से अधिक की चल संपत्ति का विवरण देना अनिवार्य होता था।

इसके साथ ही अब सभी सरकारी कर्मचारियों को हर वर्ष अपनी अचल संपत्ति का विवरण देना अनिवार्य होगा। नए प्रविधान के तहत कर्मचारियों को प्रथम नियुक्ति के समय और उसके बाद प्रत्येक वर्ष अपनी अचल संपत्तियों की घोषणा करनी होगी। अभी तक यह घोषणा हर पांच वर्ष में करने का नियम था। हालांकि, शासनादेश के जरिये योगी सरकार हर वर्ष कर्मचारियों से संपत्ति का ब्योरा लेती है किंतु अब इसके लिए नियमावली में प्रविधान कर इसे सख्ती से लागू करने की व्यवस्था की गई है। नियमों के तहत कर्मचारियों को अपनी या अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर अर्जित, दान में प्राप्त, पट्टे या रेहन पर रखी गईं संपत्तियों तथा अन्य निवेशों का पूरा ब्योरा देना होगा।


प्रेस नोट: उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली, 1956 के नियम-21 एवं नियम 24 में संशोधन किया जाना।

उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 में प्रस्तावित संशोधन के माध्यम से नियमावली के नियम 21 में एक कैलेन्डर वर्ष में 06 माह के मूल वेतन से अधिक की धनराशि स्टॉक, शेयर अथवा अन्य निवेश में निवेशित किये जाने की सूचना समुचित प्राधिकारी को दिये जाने की व्यवस्था लायी जा रही है।

इसी प्रकार नियम-24 में 01 माह के मूल वेतन के स्थान पर 02 माह से अधिक मूल्य की किसी चल सम्पति के क्रय की सूचना समुचित प्राधिकारी को दिये जाने के अलावा प्रत्येक 05 वर्ष व्यतीत होने पर अचल सम्पत्ति की घोषणा करने के स्थान पर प्रत्येक 01 वर्ष की अवधि ब्यतीत होने पर अचल सम्पत्ति घोषित करने की व्यवस्था लायी जा रही है।





राज्यकर्मियों को चल-अचल संपत्ति के साथ शेयर में निवेश का भी देना होगा ब्योरा

दो माह के वेतन से अधिक की चल संपत्ति लेनदेन बताना होगा

सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली में संशोधन को आज कैबिनेट से मिल सकती है स्वीकृति

छह माह के मूल वेतन से अधिक शेयर बाजार में लगाने पर देना होगा ब्योरा

09 मार्च 2026
लखनऊ : प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस नीति के तहत अब राज्य कर्मचारियों के निवेश और संपत्ति से जुड़े नियमों को और सख्त करने जा रही है। यदि कोई राज्य कर्मचारी एक कैलेंडर वर्ष में छह माह के मूल वेतन से अधिक की राशि स्टाक, शेयर या अन्य निवेश माध्यमों में लगाता है तो उसे इसकी जानकारी देना अनिवार्य होगा। वर्तमान नियमावली में इसका कोई प्रविधान नहीं है। इसके लिए सरकार उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारियों की आचरण नियमावली, 1956 में संशोधन करने जा रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारियों की आचरण (संशोधन) नियमावली 2026 को स्वीकृति मिल सकती है। केंद्र सरकार की तर्ज पर कार्मिक विभाग ने नियमावली में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव के तहत कोई कर्मचारी दो माह के मूल वेतन से अधिक मूल्य की चल संपत्ति से जुड़ा कोई लेन-देन करता है, तो उसे तत्काल इसकी सूचना संबंधित प्राधिकारी को देनी होगी। पहले एक माह के विवरण देना होता था।

अब सभी सरकारी कर्मचारियों को हर वर्ष अचल संपत्ति का विवरण देना अनिवार्य होगा। नए प्रविधान के तहत कर्मचारियों को प्रथम नियुक्ति के समय और उसके बाद प्रत्येक वर्ष अपनी अचल संपत्तियों की घोषणा करनी होगी। अभी यह घोषणा हर पांच वर्ष में करने का नियम है। हालांकि, शासनादेश के जरिये सरकार हर वर्ष कर्मचारियों से संपत्ति का ब्योरा लेती है किंतु अब उसे नियमावली में बदलाव कर और सख्त करने जा रही है। नियमों के तहत कर्मचारियों को अपनी या अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर अर्जित, दान में प्राप्त, पट्टे या रेहन पर रखी गईं संपत्तियों तथा अन्य निवेशों का पूरा ब्योरा देना होगा।

भारतीय स्टांप अधिनियम के तहत दान की लिखत पर अब सर्किल रेट के अनुसार स्टांप ड्यूटी लेने संबंधी स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के प्रस्ताव को भी कैबिनेट की स्वीकृति मिल सकती है। अभी दान संबंधी संपत्ति के स्वघोषित मूल्य पर ही स्टांप ड्यूटी ली जाती है। अब तक भले ही स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग किसी भी जमीन या संपत्ति की रजिस्ट्री कराने वाले से उसके स्वामित्व के बारे में जानकारी हासिल नहीं करता था लेकिन अब रजिस्ट्री करने से पहले खतौनी या अन्य स्वामित्व संबंधी डाक्यूमेंट का परीक्षण करने संबंधी व्यवस्था करने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट की हरी झंडी मिल सकती है। वहीं, गर्मियों में बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पावर कारपोरेशन को सरकार बिजली खरीदने के लिए उप्र कोआपरेटिव बैंक के माध्यम से दो हजार करोड़ रुपये ऋण उपलब्ध कराने संबंधी प्रस्ताव को भी स्वीकृति दे सकती है।



राज्यकर्मियों को छह माह की तनख्वाह से ज्यादा पैसा शेयर में लगाने पर बताना होगा, उत्तर प्रदेश कर्मचारी आचरण नियमावली में संशोधन की तैयारी 

कैबिनेट की बैठक में आ आज मिल सकती है प्रस्ताव को मंजूरी

लखनऊ। राज्य सरकार राज्य कर्मचारियों के लिए एक कैलेंडर वर्ष में छह माह के मूल वेतन से अधिक राशि स्टाक, शेयर या अन्य निवेश में लगाने पर इसकी जानकारी देना अनिवार्य करने जा रही है।


इसके लिए कर्मचारियों की आचरण नियमावली, 1956 में संशोधन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारियों की आचरण (संशोधन) नियमावली 2026 को स्वीकृति मिल सकती है। 


कार्मिक विभाग के इस प्रस्ताव के मुताबिक़ कोई भी सरकारी कर्मचारी दो माह के मूल वेतन से अधिक मूल्य की चल संपत्ति से जुड़ा कोई लेन-देन करता है, तो उसे तत्काल सूचना संबंधित प्राधिकारी को देनी होगी। पहले एक माह के मूल वेतन से अधिक की चल संपत्ति का विवरण देना होता था। अब सभी सरकारी कर्मचारियों को हर वर्ष अचल संपत्ति बतानी होगी। 


नए प्रावधान के मुताबिक़ कर्मचारियों को प्रथम नियुक्ति के समय और उसके बाद हर वर्ष अचल संपत्तियों की घोषणा करनी होगी। अभी यह पांच वर्ष में करने का नियम है। नियमों के मुताबिक कर्मचारियों को अपनी या अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर अर्जित, दान में प्राप्त, पट्टे या रेहन पर रखी गईं संपत्तियों तथा अन्य निवेशों की जानकारी भी जरूर देनी होगी।

संबन्धित खबरों के लिए क्लिक करें

GO-शासनादेश NEWS अनिवार्य सेवानिवृत्ति अनुकम्पा नियुक्ति अल्‍पसंख्‍यक कल्‍याण अवकाश आधार कार्ड आयकर आरक्षण आवास उच्च न्यायालय उच्चतम न्यायालय उच्‍च शिक्षा उत्तर प्रदेश उत्तराखण्ड उपभोक्‍ता संरक्षण एरियर एसीपी ऑनलाइन कर कर्मचारी भविष्य निधि EPF कामधेनु कारागार प्रशासन एवं सुधार कार्मिक कार्यवाही कृषि कैरियर कोर्टशाला कोषागार खाद्य एवं औषधि प्रशासन खाद्य एवम् रसद खेल गृह गोपनीय प्रविष्टि ग्रामीण अभियन्‍त्रण ग्राम्य विकास ग्रेच्युटी चतुर्थ श्रेणी चयन चिकित्सा चिकित्सा प्रतिपूर्ति चिकित्‍सा एवं स्वास्थ्य छात्रवृत्ति जनवरी जनसुनवाई जनसूचना जनहित गारण्टी अधिनियम धर्मार्थ कार्य नकदीकरण नगर विकास निबन्‍धन नियमावली नियुक्ति नियोजन निर्वाचन निविदा नीति न्याय न्यायालय पंचायत चुनाव 2015 पंचायती राज पदोन्नति परती भूमि विकास परिवहन पर्यावरण पशुधन पिछड़ा वर्ग कल्‍याण पीएफ पुरस्कार पुलिस पेंशन प्रतिकूल प्रविष्टि प्रशासनिक सुधार प्रसूति प्राथमिक भर्ती 2012 प्रेरक प्रोबेशन बजट बर्खास्तगी बाट माप बेसिक शिक्षा बैकलाग बोनस भविष्य निधि भारत सरकार भाषा मंहगाई भत्ता मत्‍स्‍य महिला एवं बाल विकास माध्यमिक शिक्षा मानदेय मानवाधिकार मान्यता मुख्‍यमंत्री कार्यालय युवा कल्याण राजस्व राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद राज्य सम्पत्ति राष्ट्रीय एकीकरण रोक रोजगार लघु सिंचाई लोक निर्माण लोक सेवा आयोग वरिष्ठता विकलांग कल्याण वित्त विद्युत विविध विशेष भत्ता वेतन व्‍यवसायिक शिक्षा शिक्षा शिक्षा मित्र श्रम संवर्ग संविदा संस्‍थागत वित्‍त सचिवालय प्रशासन सत्यापन सत्र लाभ सत्रलाभ समन्वय समाज कल्याण समाजवादी पेंशन समारोह सर्किल दर सहकारिता सातवां वेतन आयोग सामान्य प्रशासन सार्वजनिक उद्यम सार्वजनिक वितरण प्रणाली सिंचाई सिंचाई एवं जल संसाधन सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम सूचना सेवा निवृत्ति परिलाभ सेवा संघ सेवानिवृत्ति सेवायोजन सैनिक कल्‍याण स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन स्थानांतरण होमगाडर्स