प्रयागराजः इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सरकारी संस्थानों द्वारा नियमित नियुक्तियों को दरकिनार कर लंबे समय तक आउटसोर्सिंग के जरिये कर्मचारियों से काम लेने की प्रवृत्ति की तीखी आलोचना की है। कहा है कि यह शोषण और अन्याय को बढ़ावा देने वाला कदम है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की एकलपीठ ने बरेली नगर निगम को निर्देश दिया कि 13 वर्षों से आउटसोर्स के आधार पर काम कर रहे कंप्यूटर आपरेटर के नियमितीकरण पर पुनर्विचार करें।
कोर्ट ने कहा, 'जब किसी कर्मचारी से लंबे समय तक लगातार काम लिया जाता है और उसका कार्य विभाग के लिए आवश्यक और स्थायी प्रकृति का है तो उसे आउटसोर्सिंग पर रखना शोषणकारी व्यवस्था का संकेत है।' इससे न केवल कर्मचारियों के साथ अन्याय होता है, बल्कि सरकार नियमित भर्ती प्रक्रिया को भी नजरअंदाज करती है। याची कफी अहमद खान 2011 से नगर निगम में कार्यरत है।