हाई कोर्ट ने दिया प्रदेश के कोषागारों में अनधिकृत भुगतान की जांच का आदेश
चित्रकूट कोषागार में हुए घोटाले को आधार बनाकर दिया गया कार्यवाही का निर्देश
प्रयागराज : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह प्रदेश के सभी कोषागारों में बकाया पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्तिक लाभों के अनधिकृत भुगतान की जांच कराए। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ ने यह निर्देश चित्रकूट जिले में 93 पेंशनरों के खाते में 43.13 करोड़ रुपये से अधिक की रकम अनधिकृत रूप से जमा किए जाने का तथ्य सामने आने के बाद दिया है। इसी प्रकरण में धोखाधड़ी की आरोपित 84 वर्षीय महिला जोगवा उर्फ जगुवा को सशर्त अंतरिम जमानत देते हुए उसकी अर्जी पर कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब भी मांगा है और अगली सुनवाई की तिथि 28 जनवरी नियत की है। पेंशन खाते से 28 लाख छह हजार 506 रुपये की धोखाधड़ी का आरोप याची महिला पर है। कोर्ट ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को निर्देशित किया है कि आदेश की प्रति अनुपालन के लिए मुख्य सचिव को भी भिजवाई जाए।
कोर्ट ने कहा है कि अपीलार्थी की उम्र 84 साल है और वह महिला है, इसलिए यह राहत दी जा रही है। अपीलार्थी के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि 29 अक्टूबर 2025 से जेल में बंद उनकी मुवक्किल के खाते में गलत तरीके से 28 लाख छह हजार 506 रुपये जमा कराए गए थे। कुछ बिचौलियों और कोषागार विभाग के कर्मचारियों ने आवेदक सहित कई पेंशनभोगियों के खातों में हेराफेरी की। याची की ओर से पेंशन के बकाया के संबंध में कोई आवेदन नहीं था। वह अशिक्षित महिला है और यह राशि उनके खाते में स्वतः ही स्थानांतरित हो गई। गांव का अमित मिश्रा उसके पास आया और बोला कि गलती से उसका पैसा उसके (याची के) खाते में आ गया है। उसकी बेटी की शादी है। इस पर याची ने अपने खाते में आये पैसे निकाल कर अमित मिश्रा को दे दिए। उसने कोई धोखाधड़ी नहीं की है। याची रिहा होने पर हर सहयोग के लिए तैयार है। सरकार की तरफ से जमानत का विरोध किया गया। कहा गया कि याची की जानकारी में था तभी उसने पैसे निकाल कर दिए। वह धोखाधड़ी मामले में लिप्त है, लेकिन कोर्ट ने याची की उम्र व महिला होने के नाते सशर्त अंतरिम जमानत दे दी। यह भी आदेश दिया है कि याची को कंप्यूटर जनरेटेड कापी के आधार पर रिलीज किया जाए, जिसे हाई कोर्ट की वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है। ट्रायल कोर्ट से कहा गया है कि वह रिलीज आर्डर को बेल आर्डर मैनेजमेंट सिस्टम (बीओएमएस) के माध्यम से जेल भेजे ताकि रिहाई जल्द हो सके। जालसाजी से जुड़ा प्रकरण कर्वी थाना, चित्रकूट में दर्ज है।
संभव है कि प्रदेश के अन्य अनधिकृत भुगतान किया जा रहा हो। मृत पेंशनर के वारिस फर्जी जीवन प्रमाणपत्र के जरिये पेंशन उठा रहे हों, इसलिए इसकी जांच कर दोषियों को दंडित किया जाए। - इलाहाबाद हाई कोर्ट
कर्वी थाने में दर्ज है केस
संख्या 657/2025, बीएनएस की धारा 319 (2), 318(4), 338, 336(3), 340(2), 316(5), 61(2) (पुरानी धारा 419, 420, 467, 468, 471, 409, 120बी आइपीसी) के तहत, पुलिस स्टेशन, कोतवाली कर्वी, जिला चित्रकूट में दर्ज है।
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को प्रदेश के सभी जिलों में 12 पेंशन एरियर और ग्रेच्युटी भुगतान में हो रहे घोटाले की जांच कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि खासकर उन मामलों की जांच की जाए जहां पेंशनर की मृत्यु हो चुकी है और अपात्र लोग फर्जी लाइफ सर्टिफिकेट लगा कर उनके नाम पर पेंशन ले रहे हैं। चित्रकूट की 84 वर्षीय महिला जगुआ उर्फ जोगवा की अंतरिम जमानत मंजूर करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने दिया है।
याची के खिलाफ 28,6,506 लाख रुपये पेंशन एरियर के नाम पर फर्जी तरीके से चित्रकूट ट्रेजरी से अपने खाते में भुगतान कराने और फिर रकम निकाल लेने का आरोप है। यह रकम 7 फरवरी 2024 से 30 मई 2025 के दौरान उसके खाते में पेंशन एरियर के तौर पर जाम की गई। याची के अधिवक्ता का कहना था की याची एक 84 साल की अनपढ़ महिला है। उसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। किसी बिचौलिए और ट्रेजरी कर्मचारियों की मिली भगत से उसके खाते में रकम ट्रांसफर की गई। याची ने किसी भी पेंशन एरियर भुगतान के लिए कोई प्रार्थना पत्र नहीं दिया था।
उसके गांव के एक व्यक्ति अमित मिश्रा ने याची को बताया कि उसके खाते में गलती से पैसे ट्रांसफर हो गए हैं उसकी बेटी की शादी के लिए आवश्यकता है इसलिए याची ने अमित मिश्रा को पैसे निकाल कर के दे दिए। याची ने कोई धोखाधड़ी नहीं की है और ना ही उसने ट्रेजरी से अपने खाते में पैसे भेजने के लिए कोई पैरवी की थी। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि याची के खाते में पैसे गए हैं। जिसे उसने स्वयं निकाले हैं। वह इसकी लाभार्थी है। इसलिए या नहीं कहा जा सकता कि उसे इस मामले की जानकारी नहीं थी। राज्य सरकार की ओर से यह बताने के लिए कि याची ने
एरियर भुगतान के लिए कोई आवेदन किया था या नहीं समय की मांग की। जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया। कोर्ट ने याची को अंतरिम जमानत देते हुए कहा कि उसकी उम्र और महिला होने के नाते उसे यह अंतरिम जमानत दी जा रही है। हालांकि कोर्ट ने इसी मामले एक अन्य आरोपी दयाराम को राहत नहीं दी है। कोर्ट ने कहा कि प्राथमिकी से यह पता चलता है की कुल 42,04,22,093 करोड़ रुपये की पब्लिक मनी का घोटाला हुआ है। यह रकम 57 पेंशनरों के खाते में भेजी गई है। इसलिए कोर्ट का मानना है कि इस तरह के मामले अन्य जिलों में भी हो सकते हैं जहां पब्लिक फंड का पेंशन एरिया भुगतान के नाम पर दुरुपयोग किया गया है।