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Thursday, January 22, 2026

देश में जनगणना 2027 का पहला चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच , अधिसूचना जारी

यूपी में मई में शुरू होगा जनगणना का पहला चरण, एप एवं पोर्टल से होगी गणना

प्रयागराज : वर्ष 2021 से बहुप्रतीक्षित जनगणना अब मई में शुरू होगी। जनपद में मई से जून तक जनगणना के प्रथम चरण के कार्य कराए जाएंगे। जनगणना-2027 का कार्य पूर्णतः मोबाइल एप एवं पोर्टल के माध्यम से संपन्न किया जाएगा। 

जनगणना के प्रथम चरण का कार्य 22 मई से 20 जून 2026 के मध्य पूरा किए जाने के निर्देश देते हुए बताया गया कि जनगणना कार्य में तैनात किए जाने वाले मास्टर ट्रेनर्स एवं फील्ड ट्रेनर्स, प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों की सूची को अनिवार्य रूप से पहले से डिजिटल रूप में संधारित किया जाए, जिससे जनगणना के सीएमएम पोर्टल पर जनगणना पदाधिकारियों के डाटाबेस को अपलोड करने की प्रक्रिया त्वरित एवं सुगम हो सके। 



जनगणना 2027 संबंधी कोई दस्तावेज कानूनी मामले में साक्ष्य के तौर पर नहीं होंगे मान्य, जनगणना के अधिकारियों के लिए तय किया गया काम

किसी परिसर, जमीन या वाहन का कुछ समय के लिए किया जा सकेगा अधिग्रहण

नई दिल्ली। जनगणना 2027 के महाअभियान के लिए नियम तय कर दिए गए हैं। जनगणना संबंधी कोई भी दस्तावेज कानूनी मामले में साक्ष्य के तौर पर मान्य नहीं होंगे। सरकार जनगणना के कार्य के लिए किसी भी व्यक्ति के परिसर, जमीन या वाहन आदि का कुछ समय के लिए अधिग्रहण कर सकेगी। इसके लिए उसके मालिक को मौजूदा किराया का भुगतान कराया जाएगा।

जनगणना आयुक्त की ओर से इसी महीने इस संबध में जनगणना अधिनियम 1948 की अधिसूचना जारी की गई है। भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के मुताबिक कोई जनगणना अभिलेख, इस एक्ट के तहत अभियोजन से अलग किसी प्रकार की सिविल कार्यवाही या आपराधिक मामले में साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं होंगे। अधिग्रहीत परिसरों में अवैध कब्जा करके रहने वालों को बेदखल भी किया जा सकता है। अगर कोई व्यक्ति इनका उल्लंघन करेगा तो वह एक साल के कारावास या जुर्माने या दोनों से दंडित होगा।

केन्द्र सरकार जनगणना कार्य निदेशक, संयुक्त जनगणना कार्य निदेशक, उप जनगणना कार्य निदेशक और सहायक जनगणना कार्य निदेशक को नियुक्त करेगी। राज्य सरकारें मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी, संयुक्त मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी, उप मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी और सहायक मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी नियुक्त कर सकेंगी। जनगणना आयुक्त देश के भीतर जनगणना कार्य व उसका पर्यवेक्षण करेगा। जिलों में जिला कलेक्टर, मजिस्ट्रेट/आयुक्त या निगमों के प्रशासनिक अध्यक्ष प्रधान जनगणना अधिकारी होंगे।



जनगणना-2027 : प्रदेश में 20 मई से 20 जून के बीच शुरू हो सकता है जनगणना कार्य, पांच लाख से ज्यादा कर्मचारी-शिक्षक करेंगे गणना

जनगणना 2027 : पहले चरण में भवनों और परिवारों से जुड़ी बुनियादी जानकारियां जुटाई जाएंगी, सरकार पहली बार जानेगी आपका खानपान


लखनऊ । प्रदेश में जनगणना के लिए पांच लाख से अधिक कर्मचारियों की तैनाती होगी। पहले चरण में करीब साढ़े चार लाख प्रगणक लगाए जाएंगे, जिनमें शिक्षक और अन्य विभागों के कर्मचारी शामिल होंगे, जबकि 75 हजार सुपरवाइजर निगरानी करेंगे। एक प्रगणक को 30 दिन में 150 घर या करीब 800 आबादी की गणना करनी होगी। प्रत्येक प्रगणक को पहले चरण में नौ हजार रुपये और दूसरे चरण में 16 हजार रुपये मिलेंगे। मोबाइल एचएलओ एप में आफलाइन सुविधा होगी, जिससे बिना इंटरनेट भी डाटा भरा जा सकेगा और बाद में सुरक्षित रूप से अपलोड हो जाएगा।


लखनऊ: वर्ष 2011 के बाद एक के बार फिर जनगणनामाध्यम से को दर्ज करने की तैयारी है। पहली बार जनगणना में लोगों के खानपान की पसंद को भी शामिल किया जा रहा है। प्रत्येक परिवार से यह पूछा जाएगा कि उनकी थाली में सबसे ज्यादा कौन-सा अनाज होता है? चावल, गेहूं, ज्वार, बाजरा, मक्का या कोई अन्य। उद्देश्य यह है कि इन आंकड़ों के आधार पर क्षेत्रीय जरूरतों के हिसाब से भविष्य की योजनाओं, खासकर राशन वितरण और पोषण कार्यक्रमों को ज्यादा प्रभावी बनाया जा सके।

प्रदेश में जनगणना 2027 को लेकर तैयारियां तेज हो चुकी हैं। जिला स्तर पर समितियों का गठन कर दिया गया है और डिजिटल जनगणना के लिए रिहर्सल भी शुरू हो चुका है। बहराइच के मिहींपुरवा, बुलंदशहर के अनूपशहर और प्रयागराज के कुछ नगरीय क्षेत्रों में मोबाइल एप के जरिये पूर्वाभ्यास किया गया है ताकि असली गणना में कोई तकनीकी अड़चन न आए।

प्रदेश में जनगणना तीन चरणों में होगी। पहले चरण में 20 मई से 20 जून के बीच भवनों और परिवारों से जुड़ी बुनियादी जानकारियां जुटाई जाएंगी। प्रगणक मोबाइल एप के माध्यम से 32 से अधिक सवाल पूछेंगे। इनमें भवन नंबर, परिवार के मुखिया का नाम, लिंग, कच्चा या पक्का मकान, मकान का स्वामित्व, पेयजल का स्त्रोत, बिजली, शौचालय, गंदे पानी की

निकासी, स्नान की सुविधा, रसोई में एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन, रेडियो, टीवी, इंटरनेट, मोबाइल, साइकिल, स्कूटर और कार जैसी सुविधाओं की जानकारी शामिल है। इसी चरण में परिवार द्वारा उपभोग किए जाने वाले मुख्य अनाज के बारे में भी सवाल पूछा जाएगा।

दूसरे चरण में पूछी जाएगी जाति
दूसरा चरण अगले वर्ष फरवरी में प्रस्तावित है, जिसमें घर के प्रत्येक सदस्य की उम्र, शिक्षा, रोजगार, कारोबार, दूसरे शहर में रहने की स्थिति, धर्म, जाति और भाषा जैसी विस्तृत जानकारी ली जाएगी। तीसरा चरण मार्च 2027 में रिवीजन का होगा। इसमें पहले भरी गई सूचनाओं की जांच की जाएगी और इस दौरान जन्म या मृत्यु जैसी घटनाओं को अपडेट किया जाएगा। जनगणना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली में ट्रेनिंग चल रही है। इसके बाद राज्य और जिला स्तर पर मास्टर ट्रेनर कर्मचारियों को प्रशिक्षित करेंगे।



देश में जनगणना 2027 का पहला चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच , अधिसूचना जारी 

नई दिल्ली। देश में जनगणना 2027 का पहला चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच किया जाएगा। पहले चरण में घरों की सूची तैयार की जाएगी, जिसके लिए राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की ओर से निर्धारित 30 दिनों की अवधि में अभियान चलाया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से बुधवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई। इसमें कहा गया है कि 30 दिनों के गृह सूचीकरण अभियान शुरू होने से ठीक पहले 15 दिनों की अवधि में स्व-गणना कराने का विकल्प भी उपलब्ध होगा।



यूपी : जनगणना-2027 में छह लाख कर्मियों की लगेगी ड्यूटी, आवास गणना का काम इसी वर्ष मई-जून में, दूसरे चरण में होगी जाति गणना

लखनऊ : मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय जनगणना समन्वय समिति की द्वितीय बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मुख्य सचिव ने जनगणना की तैयारी को समयबद्ध तरीके से पूरा करने, विभागीय समन्वय तथा डिजिटल साधनों के उपयोग व उपयुक्त प्रशिक्षकों के चयन पर विशेष ध्यान देने पर जोर दिया। जनगणना 2027 के प्रथम चरण अर्थात हाउस लिस्टिंग और आवास जनगणना का क्षेत्रीय कार्य मई-जून 2026 के दौरान कराया जाएगा। इसके लिए लगभग छह लाख कार्मिकों की तैनाती होगी। जनगणना के द्वितीय चरण में जाति गणना की जाएगी।

राज्य की सभी प्रशासनिक इकाइयां 31 दिसंबर, 2025 की स्थिति के अनुसार स्थिर (फ्रीज़) रहेंगी तथा एक जनवरी, 2026 से 31 मार्च, 2027 तक किसी भी प्रशासनिक इकाई में क्षेत्राधिकार संबंधी कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा। सामान्य प्रशासन को राज्य नोडल विभाग नामित किया गया है, जो राजस्व, गृह, शिक्षा, नगर विकास व पंचायती राज सहित सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय सुनिश्चित करेगा। 

पदाधिकारियों की नियुक्ति, तकनीकी सहायता, वित्तीय मानदंड व जनगणना कार्मिकों के मानदेय से संबंधित निर्णय भी लिए गए। बुलंदशहर, बहराइच और प्रयागराज के चयनित ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में प्री-टेस्ट-2027 (हाउस लिस्टिंग आपरेशंस ) के सफलतापूर्वक होने पर फीडबैक के आधार पर कार्ययोजना बनी। निदेशक (जनगणना कार्य), शीतल वर्मा ने जनगणना की प्रक्रिया, समय-सीमा व जनगणना-2027 की कार्ययोजना पर प्रस्तुतीकरण किया। 

निदेशक जनगणना कार्य शीतल वर्मा ने जनगणना की प्रक्रिया, समय-सीमा एवं जनगणना-2027 की कार्ययोजना पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बुलंदशहर, बहराइच एवं प्रयागराज के चयनित ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में प्री-टेस्ट-2027 (हाउस लिस्टिंग ऑपरेशंस-HLO) के अनुभवों को भी साझा किया और बताया कि जनगणना दूसरे चरण में जाति गणना की जाएगी। के


पहली बार स्व जनगणना का भी मौका

नागरिकों को पहली बार स्व-गणना (Self-Enumeration) की सुविधा भी दी जाएगी। सरकार पहली बार जनगणना के दौरान नागरिक को अपने और परिवार का पूरा विवरण खुद ही भरने का अवसर दे रही है। इसके लिए जनगणना पोर्टल पर लिंक होगा, जहां लॉगिन बनाने के बाद यह विवरण भरा जा सकेगा। इस दौरान अपने आवास या मौजूदा निवास स्थान की लोकेशन का विवरण भी टैग करना होगा। स्वगणना का अवसर दोनों ही चरणों में मिलेगा। पहला चरण मकान सूचीकरण का होगा और दूसरा चरण जनसंख्या एवं जातीय गणना सहित अन्य जानकारियों के सर्वे का होगा। इन दोनों ही चरणों में फील्ड सर्वे शुरू होने के पहले स्वगणना के लिए पोर्टल खोला जाएगा। जानकारी भरने के बाद एक रिफरेस नंबर जनरेट होगा जिसे सुरक्षित रखना होगा।



2026 में कोड डायरेक्टरी से होगी अब तक की सबसे बड़ी जनगणना, पहले मकानों का सूचीकरण व गणना और दूसरे चरण में कराई जाएगी 135 करोड़ से ज्यादा लोगों की गिनती

नई दिल्ली। नए साल में देश अब तक के सबसे बड़े जनगणना अभियान का साक्षी बनेगा। साल 2026 में पहले मकानों का सूचीकरण व गणना होगी और दूसरे चरण में जनगणना कराई जाएगी। 135 करोड़ से ज्यादा लोगों की गिनती के लिए जनगणना कोड डायरेक्टरी तैयार की जा रही है।

यह डायरेक्टरी तीस लाख प्रगणकों व पर्यवेक्षकों को दी जाएगी ताकि वह जनगणना करते वक्त सही से जवाब अंकित कर सकें। कोड डायरेक्टरी में घर के मुखिया से संबंध, मातृभाषा और अन्य भाषा का ज्ञान, व्यवसाय, उद्योग, व्यापार या सेवा के प्रकार, जन्म स्थान या अंतिम निवास स्थान और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वगैरह के संबंध में कोड होंगे।

जनगणना के दूसरे चरण में पूछे जाने वाले कई प्रश्नों के लिए भी एक अलग कोड डायरेक्टरी बनेगी। इसमें वर्णनात्मक व गैर-संख्यात्मक प्रविष्टियों से जुड़े प्रश्नों व उससे संभावित जवाब और कोड होंगे। मकान सूचीकरण और मकानों की गणना के दौरान सभी भवनों, जनगणना मकानों और परिवार की पहचान की जाएगी। इससे मानव बस्तियों की स्थितियों, आवास की कमी के बाबत सही जानकारी सामने आएगी। आवास आवश्यकताओं पर व्यापक आंकड़े प्राप्त होने से आवास संबंधी प्रभावी नीतियां तैयार की जा सकेंगी। 

परिवारों के लिए उपलब्ध सुविधाओं और संपत्तियों पर आंकड़े तमाम नीतियों को बनाने में उपयोगी होंगे। यह मकान सूचीकरण के तहत ब्लॉकों का जनसंख्या आकार जनसंख्या गणना के लिए आधार प्रदान करेगा। जनगणना के दूसरे चरण के दौरान, प्रत्येक व्यक्ति की गणना होगी। उसके व्यक्तिगत विवरण जैसे आयु, वैवाहिक स्थिति, धर्म, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति, मातृभाषा, शिक्षा का स्तर, विकलांगता, आर्थिक गतिविधि, प्रवासन, प्रजनन (महिला के लिए) एकत्र होंगे।

ऐसे की जाएगी डेटा सुरक्षा
जनगणना से आने वाला डेटा भारत के महारजिस्ट्रार के कार्यालय के सर्वर के अंदर संग्रहीत होगा। डेटा चक्र के हर स्तर पर डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त उपाय किए गए हैं। डेटा मोबाइल पर हो, ट्रांसमिशन में हो या बाद के स्तर में हो, तो बहुस्तरीय सुरक्षा होगी। एकत्र किए गए जनगणना के आंकड़ों को तारीख और समय के साथ अंकित करते हुए हुए मोबाइल में सहेजने से पहले उपयुक्त रूप से एन्क्रिप्ट किया जाएगा। एक बार जब डेटा भारत के महारजिस्ट्रार का कार्यालय सर्वर को भेज दिया जाएगा तो नियत तारीख के बाद डेटा स्वतः ही मोबाइल से खत्म हो जाएगा। लॉग और सुरक्षा सुविधाओं के साथ एक्सेस किए गए सभी डेटा को सावधानीपूर्वक रख-रखाव किया जाएगा।


सुरक्षित रखे जाएंगे गणना प्रपत्र.... जनगणना पूरी हो जाने के बाद सभी भरे हुए जनगणना प्रपत्र सुरक्षित रखे जाएंगे। इसमें गणनाकर्ताओं द्वारा व स्वयं-गणना के माध्यम से भरे गए दोनो तरह के प्रपत्र शामिल हैं। यह सभी प्रपत्र राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के जनगणना संचालन निदेशक के कार्यालय में रखे जाएंगे।

भारत के महारजिस्ट्रार के कार्यालय सर्वर में डेटा केवल एन्क्रिप्टेड रूप में संग्रहीत किया जाएगा... डेटा को सुरक्षित रखने, सुरक्षित मोड में प्राप्त करने/संसाधित करने के लिए सभी सर्वर और स्टोरेज को भारत के महारजिस्ट्रार के कार्यालय सर्वर में केवल एन्क्रिप्टेड रूप में रखा जाएगा।




कैबिनेट का फैसला 2027 तक पूरी होगी जनगणना, 11718 करोड़ मंजूर, मोबाइल ऐप से की जाएगी जनगणनादो चरण में जुटाए जाएंगे आंकड़े


नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को देश में पहली बार डिजिटल जनगणना कराने की घोषणा की। इसमें ऐप का इस्तेमाल किया जाएगा। वर्ष 2027 तक पूरी होने वाली जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपये मंजूर किए गए।

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। जनगणना दो चरणों में होगी। पहले चरण में अप्रैल से सितंबर 2026 तक मकानों की सूची और आवास के आंकड़े जुटाए जाएंगे। वहीं, दूसरे चरण के तहत फरवरी 2027 में जनसंख्या की गणना की जाएगी।


1931 में आखिरी बार हुई थी जातिगत गणनाः केंद्रीय मंत्री ने बताया कि केंद्र शासित प्रदेशों लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड के बर्फ से ढके दूर-दराज के क्षेत्रों में जनगणना सितंबर 2026 में कराई जाएगी। डाटा संग्रह के लिए ऐप का उपयोग होगा और निगरानी के लिए एक केंद्रीय पोर्टल बनाया गया है, जिससे डाटा की गुणवत्ता बेहतर होगी। 

वैष्णव ने कहा कि जनगणना 2027 के प्रारंभिक चरण में जातिगत आंकड़े भी इलेक्ट्रॉनिक रूप से एकत्र किए जाएंगे। वैष्णव ने कहा कि भारत में ब्रिटिश सरकार ने वर्ष 1931 में आखिरी बार जातिगत गणना कराई थी। स्वतंत्रता के बाद कराई गई सभी जनगणनाओं में जाति का कॉलम हटा दिया गया था।


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