हाईकोर्ट ने कहा-न्यायमित्र नियुक्त कर आरोपी को सुनवाई का अवसर देना अदालत का कर्तव्य
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि वकील की गैरहाजिरी की सजा मुवक्किल को नहीं दी जा सकती। ऐसी स्थिति अपील खारिज करने के बजाय न्याय मित्र (एमिक्स क्यूरी) नियुक्त कर मामले का निस्तारण गुण-दोष के आधार पर करना चाहिए।
इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद की एकल पीठ ने संजय यादव की ओर से सत्र न्यायालय गोरखपुर के आदेश को चुनौती देने वाली पुनरीक्षण याचिका स्वीकार कर ली। मामला सहजनवा थानाक्षेत्र का है। संजय यादव को 2022 में चेक अनादरण मामले में मजिस्ट्रेट की अदालत ने सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ उन्होंने सत्र न्यायालय में अपील दाखिल की।
सुनवाई के दौरान याची जेल में था और उसका वकील अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। इस आधार पर सत्र न्यायालय ने 26 अक्तूबर 2023 को अपील अदम पैरवी में खारिज कर दी। इसके बाद याची ने देरी माफी की अर्जी के साथ एक अन्य अपील दाखिल की। वह भी सत्र अदालत से खारिज हो गई।
इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अधिवक्ता ने दलील दी कि सुनवाई के दौरान याची जेल में था। इस कारण मुकदमे की प्रभावी पैरवी नहीं हो सकी। याची के अधिवक्ता भी पेश नहीं हुए।
कोर्ट ने सत्र न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया। कहा, अपीलार्थी का पक्ष सुने बिना अपील खारिज नहीं की जा सकती। सत्र न्यायालय याची की अपील पुराने नंबर के साथ पुनर्जीवित कर नए सिरे से मामले का निस्तारण गुण-दोष के आधार पर करें।