हाईस्कूल प्रमाण पत्र न होने पर सेवा पुस्तिका में दर्ज जन्मतिथि ही मान्य – हाईकोर्ट
याची ने टीसी के आधार पर सेवा पुस्तिका में उम्र बदलने को हाईकोर्ट में दी थी चुनौती
याची को सेवानिवृत्त करने का आदेश हाईकोर्ट ने किया रद्द
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई कर्मचारी सेवा में प्रवेश के समय हाईस्कूल या उसके समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण नहीं था, तो सेवा पुस्तिका (सर्विस बुक) में प्रवेश के समय दर्ज की गई जन्मतिथि ही अंतिम और सही मानी जाएगी। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने यतीश सिंह की याचिका पर दिया है।
अलीगढ़ स्थित हरदुआगंज थर्मल पावर प्लांट में याची मार्च 1988 को श्रमिक के पद पर नियुक्त किया गया था। उस समय, मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर उनकी जन्मतिथि 19 अक्तूबर 1967 दर्ज की गई थी। इसके अनुसार याची को वर्ष 2027 में सेवानिवृत्त होना था। सेवा के दौरान विभाग ने याची को बिना बताए उसकी जन्मतिथि को सेवा पुस्तिका में बदलकर 14 अप्रैल 1966 कर दिया। इस आधार पर विभाग ने याची को अप्रैल 2026 को ही सेवानिवृत्त करने का निर्णय लिया। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।
कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद उत्तर प्रदेश भर्ती (जन्म तिथि का निर्धारण) नियमावली, 1974 के नियम 2 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि सेवा में प्रवेश के समय सेवा पुस्तिका में दर्ज आयु ही सही मानी जाती है। इसमें किसी भी बदलाव के लिए कोई आवेदन स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने हाईस्कूल प्रमाण पत्र अभाव में सेवा में प्रवेश के दौरान सेवा रिकॉर्ड में दर्ज की गई उम्र को ही सही माना। इसके साथ ही याची को वर्ष 2026 में सेवानिवृत्त करने के आदेश को रद्द कर दिया।
हाईस्कूल प्रमाणपत्र न होने पर सेवा पुस्तिका में दर्ज जन्मतिथि ही सही : कोर्ट
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई कर्मचारी सेवा में प्रवेश के समय हाईस्कूल या उसके समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण नहीं था, तब सेवा पुस्तिका (सर्विस बुक) में दर्ज जन्मतिथि ही अंतिम और सही मानी जाएगी। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने यतीश सिंह की याचिका पर दिया है।
अलीगढ़ स्थित हरदुआगंज थर्मल पावर प्लांट में याची मार्च 1988 को श्रमिक के पद पर नियुक्त किया गया था। उस समय मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर उनकी जन्मतिथि 19 अक्तूबर 1967 दर्ज की गई थी। इसके अनुसार याची को वर्ष 2027 में सेवानिवृत्त होना था। सेवा के दौरान विभाग ने याची को बिना बताए उसकी जन्मतिथि को सेवा पुस्तिका में बदलकर 14 अप्रैल 1966 कर दिया। इस आधार पर विभाग ने याची को अप्रैल 2026 को ही सेवानिवृत्त करने का निर्णय लिया। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।
कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद उत्तर प्रदेश भर्ती (जन्म तिथि का निर्धारण) नियमावली, 1974 के नियम 2 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि सेवा में प्रवेश के समय सेवा पुस्तिका में दर्ज आयु ही सही मानी जाती है। इसमें किसी भी बदलाव के लिए कोई आवेदन स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने हाईस्कूल प्रमाणपत्र के अभाव में सेवा में प्रवेश के दौरान सेवा रिकॉर्ड में दर्ज की गई उम्र को ही सही माना।
इसके साथ ही याची को वर्ष 2026 में सेवानिवृत्त करने के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने निर्देश दिया है कि याची की सेवानिवृत्ति तिथि 31 अक्तूबर 2027 ही मानी जाए और वह अपनी सेवा जारी रखेंगे। हालांकि कोर्ट ने प्रतिवादियों को छूट दी है कि यदि कोई जांच लंबित है तो याची को शामिल करते हुए नियमानुसार जांच पूरी की जाए।