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Friday, June 12, 2026

'गृहिणियां राष्ट्र निर्माता', 30 हजार मासिक आय के आधार पर तय होगा मुआवजा', सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

'गृहिणियां राष्ट्र निर्माता', 30 हजार मासिक आय के आधार पर तय होगा मुआवजा', सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला


नई दिल्ली। गृहिणियां सिर्फ घर संभालने वाली महिलाएं नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माता हैं। उनकी ओर से परिवार व समाज के लिए किए जाने वाले घरेलू काम व देखभाल को उचित कानूनी मान्यता मिलनी चाहिए। यह टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी गृहिणी की सड़क हादसे में मौत पर उसके परिवार को मिलने वाले मुआवजे में घरेलू देखभाल के नुकसान को अलग मद के रूप में शामिल किया जाएगा। कोर्ट ने इसके लिए न्यूनतम 30 हजार रुपये प्रतिमाह की राशि निर्धारित की है।


जस्टिस संजय करोल व जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह फैसला 2001 में हरियाणा में हुई सड़क दुर्घटना से जुड़े मोटर वाहन दुर्घटना मुआवजा मामले में सुनाया है। अदालत ने कहा, गृहिणियों का योगदान सिर्फ परिवार तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह मानव संसाधन और राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में उन्हें केवल होममेकर के बजाय राष्ट्र निर्माता कहा जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद जताई, भविष्य में गृहिणियों के योगदान को समाज और न्याय व्यवस्था, दोनों में उचित सम्मान मिलेगा तथा उन्हें सही मायनों में राष्ट्र निर्माता के रूप में स्वीकार किया जाएगा।

इस मामले में पीठ ने पत्नी को गंवाने वाले पति के लिए घरेलू देखभाल के नुकसान के तौर पर 30,000 रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त मुआवजा तय किया। वर्ष 2001 में दो जीपों की टक्कर में सिरसा से फरीदाबाद जा रही महिला की मृत्यु हो गई थी। मृतक के पति और तीन बच्चों ने मुआवजे के लिए मोटर वाहन दुर्घटना न्यायाधिकरण (एमएसीटी) का रुख किया था। 

एमएसीटी ने परिवार को 2.42 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया। मुआवजा राशि से असंतुष्ट परिवार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट ने वर्ष 2024 में मुआवजे की रकम बढ़ाकर 8.43 लाख रुपये कर दी। इसमें 7.5 फीसदी का ब्याज भी तय किया। परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। शीर्ष कोर्ट ने मामले की पुनः समीक्षा करते हुए पाया कि गृहिणी के योगदान का सही मूल्यांकन नहीं किया गया था। 

मुआवजे में हर तीन वर्ष में दस फीसदी वृद्धि: कोर्ट ने स्पष्ट किया, यह राशि मोटर दुर्घटना मामलों में पहले से तय पारंपरिक मुआवजा मदों के अतिरिक्त होगी। इस राशि में हर तीन वर्ष पर 10 प्रतिशत की वृद्धि भी की जाएगी, ताकि समय के साथ इसकी वास्तविक उपयोगिता बनी रहे। सुप्रीम कोर्ट की ओर से मुआवजे की पुनर्गणना के बाद परिवार को मिलने वाली कुल मुआवजा राशि बढ़ाकर 62.77 लाख रुपये कर दी गई। यह राशि हाईकोर्ट की ओर से निर्धारित ब्याज के साथ अदा की जाएगी। 

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