पटना हाईकोर्ट का आदेश रद्द
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार एक नियोक्ता के रूप में अस्थायी कर्मचारियों। को स्थायी कर्मचारियों के समान कार्य करने के बावजूद उन्हें समान लाभ से वंचित नहीं कर सकती। ये बातें अस्थायी व नियमित कर्मचारियों के भत्तों और सेवानिवृत्ति लाभों में भारी असमानता का संज्ञान लेते हुए कही।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने पटना हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें डाक विभाग में दशकों से सेवा दे रहे अस्थायी कर्मचारियों को पेंशन लाभ देने से इन्कार किया गया था। पीठ ने कहा कि किसी भी प्रकार का वर्गीकरण जिसके परिणामस्वरूप कर्तव्यों व जिम्मेदारियों के मामले में समान स्थिति वाले कर्मचारियों के एक वर्ग को किसी भी लाभ से वंचित किया जाता है, सांविधानिक मूल्यों का उल्लंघन होगा।
पीठ ने कहा कि इस न्यायालय ने एक सुसंगत न्यायिक दृष्टिकोण अपनाया है कि लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों, चाहे वे आकस्मिक हों या अस्थायी, विशेष रूप से जिन्हें मान्यता प्राप्त दर्जा दिया गया है, उन्हें सामाजिक सुरक्षा और पेंशन लाभ सहित संबंधित लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता है। इसमें कहा गया है कि इस बात पर जोर दिया जाना चाहिए कि राज्य ऐसे कर्मचारियों को अनिश्चित स्थिति में न रखे, जबकि उनसे नियमित कर्मचारियों के समान सेवाएं ली जा रही हों।