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Wednesday, June 24, 2026

आठवें वेतन आयोग से कर्मचारियों ने मांगी सालाना 6 फीसदी वेतन वृद्धि, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की न्यूनतम 60 हजार और अधिकतम वेतन 833250 रुपये करने की मांग

आठवें वेतन आयोग से कर्मचारियों ने मांगी सालाना 6 फीसदी वेतन वृद्धि, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की न्यूनतम 60 हजार और अधिकतम वेतन 833250 रुपये करने की मांग

डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ ने दिया एक्स ग्रेशिया दो करोड़ करने का प्रस्ताव

ड्यूटी के दौरान मृत्यु पर एक्स ग्रेशिया 2 करोड़ रुपये, ग्रेच्युटी सीमा 75 लाख रुपये, 600 दिन का लीव एनकैशमेंट तथा पुरानी पेंशन बहाली की भी मांग की गई।


लखनऊ। राजधानी में मंगलवार को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के समक्ष कर्मचारी संगठनों ने अपने-अपने सुझाव रखते हुए वेतन, भत्तों, पेंशन और सेवा शतों में व्यापक व्या बदलाव की मांग की। प्रमुख मांगों में वार्षिक वेतन वृद्धि 3% से बढ़ाकर 6% करने, ड्यूटी के दौरान मृत्यु पर एक्स ग्रेशिया 25 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये करने, पुरानी पेंशन बहाल करने और न्यूनतम वेतन 60 हजार से 70700 रुपये और अधिकतम वेतन 833250 रुपये मासिक करने का प्रस्ताव रहा।

वेतन आयोग के प्रतिनिधिमंडल के समक्ष कर्मचारी संगठनों ने प्रस्तुतीकरण दिया। ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ डिप्लोमा इंजीनियर्स, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल डायरेक्टोरेट ऑफ ऑर्डनेंस फैक्ट्री हॉस्पिटल एसोसिएशन तथा उप्र आईएएस एसोसिएशन और रिटायर्ड आईएएस एसोसिएशन ने वेतन संरचना, भत्तों, पेंशन और सेवा शर्तों में व्यापक संशोधन की मांग उठाई।

ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ डिप्लोमा इंजीनियर्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष एनडी द्विवेदी ने 3.93 फिटमेंट फैक्टर, न्यूनतम वेतन 70700 रुपये तथा जूनियर इंजीनियरों का न्यूनतम वेतन 1.39 लाख रुपये करने की मांग की। वार्षिक वेतन वृद्धि 6 प्रतिशत, लेवल-6, 7 और 8 तथा लेवल-9 और 10 के विलय, मकान किराया भत्ता 35 से 45 प्रतिशत तक करने और परिवहन भत्ता तीन गुना बढ़ाने का सुझाव दिया।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जेएन तिवारी और महामंत्री अरुणा शुक्ला ने आयोग के समक्ष न्यूनतम वेतन 60 हजार रुपये, अधिकतम वेतन 8.33 लाख रुपये, 3.333 फिटमेंट फैक्टर तथा वार्षिक वेतन वृद्धि 5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा। परिषद ने 50 प्रतिशत महंगाई भत्ते को मूल वेतन में समाहित करने, प्रत्येक पांच वर्ष में पदोन्नति अथवा वित्तीय उन्नयन, पुरानी पेंशन बहाली, 70 वर्ष की आयु के बाद चरणबद्ध पेंशन वृद्धि और ग्रेच्युटी सीमा 50 लाख रुपये करने की मांग भी की।

कुशल श्रीवास्तव ने ऑर्डनेंस फैक्ट्री अस्पतालों के कर्मचारियों के एंट्री पे-लेवल में वृद्धि, विभिन्न भत्तों के पुनरीक्षण तथा सेवा संबंधी मांगें आयोग के समक्ष रखीं। उप्र आईएएस एसोसिएशन और रिटायर्ड आईएएस एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ आईएएस अधिकारी देवेश चतुर्वेदी ने वेतन, भत्तों, चिकित्सा सुविधाओं, हाउस बिल्डिंग एडवांस, ग्रेच्युटी, पेंशन कम्यूटेशन तथा वरिष्ठ स्तरों पर वेतन प्रगति में सुधार की जरूरत पर जोर दिया।

कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
फिटमेंट फैक्टर 3.333 से 3.93 तक हो। न्यूनतम वेतन 60 से 70 हजार रुपये तथा अधिकतम वेतन 8.33 लाख रुपये तक करने का प्रस्ताव। ड्यूटी के दौरान मृत्यु पर एक्स ग्रेशिया 25 लाख की जगह 2 करोड़ रुपये देने की मांग। पुरानी पेंशन योजना बहाल हो। ग्रेच्युटी सीमा 50 से 75 लाख रुपये तक बढ़े। मकान किराया, परिवहन, शिक्षा, चिकित्सा, जोखिम और अन्य भत्तों में व्यापक संशोधन जैसी मांगे शामिल हैं।



न्यूनतम वेतन 69 हजार रुपये हो 65 वर्ष से मिले अतिरिक्त पेंशन,  8वें वेतन आयोग के सामने कर्मचारियों ने रखीं मांगें, कहा- वेतन बढ़ेगा तो अर्थव्यवस्था भी बढ़ेगी

लखनऊ। आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के सामने सोमवार को कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने न्यूनतम बेसिक वेतन 18 हजार से बढ़ाकर 69 हजार रुपये करने की जोरदार मांग उठाई। तर्क दिया कि सातवें वेतन आयोग के लागू होने के समय देश की प्रति व्यक्ति आय 92,294 रुपये थी, जो बढ़कर अब करीब 2.20 लाख रुपये हो चुकी है। ऐसे में वेतन और पेंशन का पुनरीक्षण भी इसी अनुपात में किया जाना चाहिए।

राजधानी में आयोग के सदस्य पंकज जैन की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय टीम ने अधिकारियों, कर्मचारियों व पेंशनर संगठनों से सुझाव लिए। बैठक की शुरुआत अपर मुख्य सचिव (वित्त) दीपक कुमार के प्रदेश की वित्तीय स्थिति और पिछले दस वर्षों के आय व्यय संबंधी प्रस्तुतीकरण से हुई। इसके बाद आईएएस, आईपीएस व आईएफएस एसोसिएशनों सहित विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने आयोग के समक्ष अपनी मांगें रखीं।

ऑल इंडिया स्टेट पेंशनर्स फेडरेशन की उत्तर प्रदेश इकाई के चेयरमैन प्रमोद कुमार शर्मा ने 3.83 फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग की। कहा, प्रति व्यक्ति आय में हुई वृद्धि के अनुरूप कर्मचारियों के वेतन का भी पुनरीक्षण होना चाहिए। वहीं, कुछ अन्य संगठनों ने 3.15 फिटमेंट फैक्टर का सुझाव दिया। संयुक्त पेंशनर्स कल्याण समिति के प्रतिनिधियों ने पेंशन के कम्यूटेशन की अवधि कम करने की मांग उठाई। समिति के संयोजक ओमकार नाथ तिवारी ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में पेंशन का 40 प्रतिशत हिस्सा काटा जाता है। जबकि आठ प्रतिशत ब्याज के साथ इसकी रिकवरी लगभग 10 वर्ष 11 माह में पूरी हो जाती है। इसके बावजूद 15 वर्ष तक कटौती जारी रहती है।

कर्मचारी संगठनों ने कहा कि वरिष्ठ पदों पर वेतन वृद्धि सीमित रह जाती है जबकि जिम्मेदारियां लगातार बढ़ती हैं। इसलिए वेतन संरचना में बदलाव कर उच्च स्तरों पर भी पर्याप्त वेतन वृद्धि सुनिश्चित की जाए। चिकित्सा सुविधाओं, ग्रेच्युटी, हाउस बिल्डिंग एडवांस, विभिन्न भत्तों और पेंशन कम्यूटेशन के नियमों में संशोधन की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जेएन तिवारी ने आयोग से कहा कि वेतन बढ़ने से कर्मचारियों की क्रय शक्ति बढ़ेगी, जिससे बाजार में मांग बढ़ेगी, जीएसटी और आयकर संग्रह में वृद्धि होगी। साथ ही बचत योजनाओं के जरिये सरकार को पूंजीगत निवेश मिलेगा। उनके मुताबिक वेतन आयोग का असर सिर्फ कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

आयोग मंगलवार को ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ डिप्लोमा इंजीनियर्स समेत अन्य संगठनों के सुझाव सुनेगा। कर्मचारी संगठनों का मानना है कि क्षेत्रीय बैठकों के तेजी से पूरा होने से आयोग भी तय समय से पहले रिपोर्ट सौंप सकता है। बैठक के लिए राज्य सरकार ने पांच नोडल अधिकारियों को नामित किया है। विशेष सचिव नील रतन कुमार को समग्र समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है। आलोक दीक्षित वित्तीय प्रभाव, वीके सिंह पेंशन एवं सेवानिवृत्ति लाभ, पुष्पराज वेतनमान तथा अनुराग गुप्ता भत्तों एवं अन्य सुविधाओं से संबंधित प्रस्तुतियां आयोग के समक्ष रख रहे हैं।

पेंशनर संगठनों ने भी दिए अहम सुझाव... पेंशनर संगठनों ने 65 वर्ष की आयु पर पांच प्रतिशत, 70 वर्ष पर 10 प्रतिशत और 75 वर्ष पर 15 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन देने की मांग की। साथ ही पेंशन कम्यूटेशन की 15 वर्ष की कटौती अवधि कम करने और सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों व पेंशनरों को को बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने की मांग उठाई। आयुष्मान योजना जैसी स्वास्थ्य सुविधा का लाभ देने का सुझाव भी दिया। इतना ही नहीं, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, मकान किराया भत्ता, रिस्क पे, वार्षिक बोनस और सेवानिवृत्ति लाभों में सुधार का मुद्दा भी उठाया। पुराने पेंशनरों की पेंशन के पुनरीक्षण का स्पष्ट फॉर्मूला तय करने की भी मांग की।




22 व 23 जून को आठवां वेतन आयोग लखनऊ में, कर्मचारियों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा कर उनकी मांगों व सुझावों पर सीधे फीडबैक लेगा आयोग 

आठवें केंद्रीय वेतन आयोग की टीम पहुंची, बैठकें आज व कल

लखनऊ : आठवें केंद्रीय वेतन आयोग की टीम रविवार को लखनऊ पहुंची। टीम सोमवार और मंगलवार को कर्मचारी संगठनों, शासन के उच्चाधिकारियों तथा अन्य हितधारकों के साथ बैठकें कर उनके सुझाव लेगी। वार्ता के लिए आमंत्रित किए गए कर्मचारी संगठन पुरानी पेंशन बहाली, वेतन व भत्तों में वृद्धि के साथ ही कर्मचारियों की सुविधाओं से जुड़ी मांगों पर अपना पक्ष आयोग के समक्ष रखेंगे।

आयोग के सदस्य सचिव पंकज जैन के नेतृत्व में आयोग की आठ सदस्यीय टीम रविवार को लखनऊ पहुंची। आयोग के साथ वित्त विभाग के अधिकारियों की टीम लगाई गई है। 22 व 23 जून को विभिन्न कर्मचारी संगठनों तथा उच्चाधिकारियों के साथ बैठक के बाद टीम के सदस्य 24 जून को यहां से वापस जाएंगे।

आयोग ने 23 जून को आल इंडिया फेडरेशन आफ डिप्लोमा इंजीनियर्स को वार्ता के लिए बुलाया है। फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एनडी द्विवेदी के मुताबिक फेडरेशन वेतन संरचना, न्यूनतम वेतन, वार्षिक वेतन वृद्धि, पे स्केल मर्जर, महंगाई भत्ता, शैक्षिक भत्ता, अतिरिक्त कार्य भत्ता, प्रतिनियुक्ति भत्ता, आवास किराया भत्ता, उत्कृष्ठ सेवा भत्ता, यात्रा भत्ता, दैनिक भत्ता, सिटी अलाउंस, वाहन भत्ता तथा रात्रि सेवा भत्ता इत्यादि पर अपना पक्ष रखेगा।



8वें वेतन आयोग की टीम लखनऊ आएगी, 22और 23 जून को यूपी का दौरा

कर्मचारियों की वेतन बढ़ोतरी का रास्ता होगा साफ
लखनऊ। केन्द्र सरकार द्वारा गठित 8वें वेतन आयोग की एक उच्चस्तरीय टीम 22 और 23 जून को राजधानी लखनऊ का दौरा करने जा रही है। दो दिवसीय इस दौरे के दौरान आयोग की टीम राज्य के विभिन्न कर्मचारी संगठनों, शिक्षक यूनियनों और वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकें करेगी।

वित्त आयोग की बैठकों का उद्देश्य कर्मचारियों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करना और उनकी मांगों व सुझावों पर सीधे फीडबैक लेना है। जानकारों के मुताबिक इन बैठकों के आधार पर ही आयोग अपनी रिपोर्ट देगा। जिसके अनुसार केन्द्रीय व राज्य कर्मचारियों के वेतन और पेंशनर्स की पेंशन में बढ़ोतरी की जाएगी। आमतौर पर राज्यों में दौरे के एक से दो साल के भीतर कर्मचारियों को वेतन बढ़ोतरी का लाभ मिलता है। 

आयोग की टीम राज्य सरकार के विभिन्न संगठनों से मुलाकात करेगी। इस दौरान टीम के सामने प्रस्तुतिकरण भी रखा जाएगा। इसके बाद ऑल इंडिया सर्विसेज के अधिकारियों की यूनियन के साथ बैठक की जाएगी। साथ ही पेंशनर्स के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं और समाधान पर मंथन होगा। डिफेंस, राजस्व, रेलवे, स्वास्थ्य, दूरसंचार विभाग की यूनियनों के साथ भी चर्चा होगी।


7वें वेतन आयोग में इतना बढ़ा था वेतन

सातवें वेतन आयोग में केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में औसतन 14.29% की वृद्धि हुई थी। इसके अलावा, फिटमेंट फैक्टर को 2.57 गुना किया गया था, जिसके आधार पर मूल वेतन में सीधी बढ़ोतरी की गई। एंट्री लेवल कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 7,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रति माह किया था।











8वें वेतन आयोग को लेकर यूपी सरकार की तैयारी तेज, 22-23 जून को होगी सेवा संघों और संगठनों के साथ अहम बैठक, नोडल अधिकारियों की की गई नियुक्ति

13 जून 2026
लखनऊ। केंद्र सरकार के 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की आगामी बैठकों को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। वित्त विभाग द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, 22 एवं 23 जून 2026 को होने वाली आयोग की बैठक में विभिन्न सेवा संघों, संस्थानों और संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा।

आयोग के सदस्य सचिव श्री पंकज जैन के पत्र के आधार पर उत्तर प्रदेश सरकार से पूर्व वेतन आयोगों की सिफारिशों को लागू किए जाने के कारण राज्य के खजाने पर पड़े वित्तीय प्रभावों का विवरण भी मांगा गया है। इसके साथ ही राज्य स्तरीय अखिल भारतीय सेवा संघों को भी बैठक में आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

नोडल अधिकारी नियुक्त
बैठक की तैयारी और विभिन्न विषयों पर जानकारी संकलित करने के लिए वित्त विभाग ने कई वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है। विशेष सचिव वित्त श्री नील रतन कुमार को बैठक के लिए नोडल अधिकारी नामित किया गया है।

इसके अलावा विभिन्न विषयों के लिए अधिकारियों को निम्न जिम्मेदारियां दी गई हैं—

◾छठे और सातवें वेतन आयोग के वित्तीय प्रभावों का विवरण तैयार करना।

◾पेंशन एवं अन्य सेवानिवृत्ति लाभों से संबंधित जानकारी संकलित करना।

◾वेतनमान संबंधी मामलों का प्रस्तुतीकरण तैयार करना।

◾भत्तों एवं अन्य सुविधाओं से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराना।

◾आयोग के आगमन, आवास, खान-पान और प्रोटोकॉल व्यवस्था सुनिश्चित करना।

कर्मचारी संगठनों की बढ़ी उम्मीदें
8वें वेतन आयोग की बैठकों को लेकर देशभर के केंद्रीय और राज्य कर्मचारियों में उत्सुकता बढ़ गई है। कर्मचारी संगठन वेतन, भत्तों, पेंशन और अन्य सुविधाओं से जुड़े अपने सुझाव आयोग के समक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि इन बैठकों में प्राप्त सुझाव भविष्य की वेतन संरचना तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

क्या है महत्व?
विशेषज्ञों का मानना है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने पर करोड़ों केंद्रीय और राज्य कर्मचारियों तथा पेंशनरों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। ऐसे में 22-23 जून की बैठक को आगामी वेतन संशोधन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।

मुख्य बिंदु:

🔴 22 और 23 जून 2026 को 8वें वेतन आयोग की बैठक।

🔴 सेवा संघों एवं संस्थाओं के प्रतिनिधियों से होगा संवाद।

🔴 यूपी सरकार ने नोडल अधिकारी सहित कई अधिकारियों को सौंपी जिम्मेदारी।

🔴 वेतन, भत्ते, पेंशन और वित्तीय प्रभावों पर होगी विस्तृत चर्चा।

🔴 कर्मचारियों और पेंशनरों की नजरें आयोग की आगामी कार्यवाही पर टिकीं।





आठवें वेतन आयोग पर उत्तर प्रदेश में कवायद तेज, कर्मचारी संगठनों ने रखीं मांगें 

11 जून 2026
लखनऊ। आठवें वेतन आयोग को लेकर प्रदेश में गतिविधियां तेज हो गई हैं। केंद्र सरकार की ओर से आयोग के गठन की घोषणा के बाद राज्य सरकार ने भी कर्मचारी संगठनों से सुझाव और मांगें जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी क्रम में वित्त विभाग ने बृहस्पतिवार को कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर विभिन्न संवर्गों की समस्याओं और अपेक्षाओं पर चर्चा की। 

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने बताया कि मार्च 2026 में वेतन आयोग की ओर से सभी संगठनों से ऑनलाइन सुझाव मांगे गए थे। परिषद ने अपने संबद्ध संघों की मांगों को समाहित करते हुए आयोग को ज्ञापन भेजा था। परिषद की ओर से 56 पृष्ठों का विस्तृत प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को शामिल किया गया है। 

बैठक में परिषद के कार्यवाहक अध्यक्ष एनडी द्विवेदी, आईटीआई कर्मचारी संघ के अध्यक्ष विवेक यादव, प्रदेश महामंत्री राहुल पटेल और लेखपाल संघ के उपाध्यक्ष सुजीत सिंह ने कर्मचारियों का पक्ष रखा। वहीं, डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ की तरफ से प्रदेश अध्यक्ष एचएन मिश्रा और श्रवण कुमार यादव ने इंजीनियरों की मांगों को रखा। आयोग की समिति 22 और 23 जून को लखनऊ आकर संगठनों से चर्चा करेगी। 


आठवें वेतन आयोग को सुझाव देने हेतु उत्तर प्रदेश में कर्मचारी संगठनों के साथ 10 जून को अहम बैठक, वेतन आयोग को भेजे जाएंगे सुझाव, देखें आदेश
 











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