डीए-डीआर का मर्जर नहीं होने से कर्मियों-पेंशनरों को होगा नुकसान, वेतन वृद्धि, पेंशन निर्धारण के साथ भत्तों में बढ़ोतरी पर भी पड़ेगा नकारात्मक असर
प्रयागराज। आठवें वेतन आयोग के तहत महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) को क्रमशः मूल वेतन व मूल पेंशन में मर्ज न किए जाने का कोई प्रावधान न होने से कर्मचारियों और पेंशनरों को नुकसान की आशंका सता रही है। इसका असर वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) और भत्तों पर भी पड़ेगा।
गवर्नमेंट पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष आरएस वर्मा का कहना है कि 30 नवंबर 2025 को संसद में दिए गए बयान में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री ने आठवें वेतन आयोग में डीए और डीआर को क्रमशः मूल वेतन व मूल पेंशन में मर्ज किए जाने से इनकार कर दिया है, जिसके दूरगामी नकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे और इससे कर्मचारियों और पेंशनरों को काफी नुकसान होगा।
केंद्रीय मंत्री के बयान के बाद संभावित 60 फीसदी डीए/डीआर जोड़कर मूल वेतन/पेंशन बनने की उम्मीद भी खत्म हो गई है। भविष्य में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों की पेंशन निर्धारण पर भी इसका असर पड़ेगा और पेंशन में भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। साथ ही मकान किराया भत्ता (एचआरए) और बच्चों की शिक्षा भत्ता आदि की गणना पर भी इसका असर देखने को मिलेगा।
अगर मूल वेतन में डीए का मर्जर होता तो मूल वेतन बढ़ जाता और भत्तों में भी उसी अनुपात में वृद्धि होती लेकिन मर्जर न होने से भत्तों में बढ़ोतरी का लाभ नहीं मिलेगा। वहीं, पेंशन का निर्धारण भी मूल वेतन के आधार पर किया जाता है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष आरएस वर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार बजट का अधिकांश भाग अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के मुद्दों और राजनैतिक फायदे के लिए प्रचार पर खर्च कर रही है। कर्मचारियों और वर्तमान पेंशनर्स को बोझ समझ रही है, जो अन्याय है। ऐसा लगता है कि शासन की मंशा कर्मचारियों और पेंशनरों को भारी नुकसान पहुंचाने की है।
8वें वेतन आयोग का गठन, लेकिन महंगाई भत्ते के मर्जर से सरकार का साफ इंकार
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से जुड़ी एक अहम जानकारी लोकसभा में सामने आई है। वित्त मंत्रालय ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन की पुष्टि कर दी है, लेकिन महंगाई भत्ते (DA/DR) को बेसिक वेतन में मर्ज करने की मांग को सरकार ने साफ-साफ खारिज कर दिया है।
लोकसभा में पूछे गए अविशिष्ट प्रश्न संख्या 212 का जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी ने बताया कि केंद्र सरकार ने 03 नवंबर 2025 को जारी संकल्प के माध्यम से 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन को अधिसूचित कर दिया है। आयोग से जुड़ी अधिसूचना को उत्तर के साथ संलग्न किया गया है।
हालांकि, कर्मचारियों और पेंशनरों की उस बड़ी उम्मीद को झटका लगा है, जिसमें वे महंगाई भत्ते को तत्काल राहत के रूप में बेसिक वेतन में मर्ज किए जाने की मांग कर रहे थे। कई कर्मचारी संगठनों ने तर्क दिया कि पिछले तीन दशकों में वास्तविक खुदरा महंगाई इतनी बढ़ चुकी है कि मौजूदा DA/DR उसकी भरपाई नहीं कर पाता।
लेकिन सरकार ने साफ कहा है कि—
“वर्तमान महंगाई भत्ते (DA/DR) को बेसिक पे में मर्ज करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।”
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जीवन-यापन की लागत को समायोजित करने और मूल वेतन/पेंशन के वास्तविक मूल्य को बनाए रखने के लिए DA/DR की दरें हर छह महीने में संशोधित की जाती हैं, जोकि AICPI-IW (औद्योगिक श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) पर आधारित होती हैं और श्रम मंत्रालय के श्रम ब्यूरो द्वारा प्रकाशित होती हैं।
8वें वेतन आयोग के गठन से कर्मचारियों में राहत की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन महंगाई भत्ते के मर्जर पर सरकार के इंकार से फिलहाल अतिरिक्त वित्तीय लाभ की संभावना नहीं दिख रही।