प्रसूति अवकाशों के बीच दो साल के अंतराल की शर्त खत्म, शासनादेश जारी
लखनऊः प्रदेश सरकार ने सरकारी महिला कर्मचारियों के लिए प्रसूति अवकाश के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। पिछला प्रसूति अवकाश समाप्त होने के बाद अगले प्रसूति अवकाश के लिए दो वर्ष की अनिवार्य अवधि की शर्त समाप्त कर दी गई है। इससे अब दो प्रसूति अवकाशों के बीच दो वर्ष का अंतराल न होने पर भी पात्र महिला कर्मचारी प्रसूति अवकाश ले सकेंगी। वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार की ओर से इसका शासनादेश जारी कर दिया गया है।
महिला सरकारी कर्मियों को उनकी संपूर्ण सेवाकाल में दो बार तक, एक बार में 180 दिन का प्रसूति अवकाश मिलता है। हालांकि नियम में यह प्रविधान था कि प्रसूति अवकाश तब तक स्वीकृत नहीं किया जाएगा, जब तक पिछली प्रसूति छुट्टी समाप्त होने की तारीख से कम से कम दो वर्ष की अवधि पूरी न हो जाए।
प्रदेश सरकार ने अब इस दो वर्ष की अनिवार्यता वाले प्रविधान को खत्म करने का निर्णय लिया है। इसके पीछे प्रसूति अवकाश नियम को मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट, 1961 के नियम 27 के अनुरूप करने और महिला सरकारी कर्मचारियों को आ रहीं कठिनाइयों का निराकरण करने का उद्देश्य बताया गया है। नए संशोधन के बाद महिला कर्मचारियों को उनकी संपूर्ण सेवा अवधि में दो बार तक अनुमन्य 180 दिन का प्रसूति अवकाश लेने के लिए पिछली प्रसूति छुट्टी के बाद दो वर्ष की अवधि पूरी होने का इंतजार नहीं करना होगा। सरकार ने संबंधित अवकाश नियमों में भी आवश्यक संशोधन किए जाने की बात कही है।
दो बच्चों के बीच दो साल का अंतर जरूरी नहीं, शासन ने प्रसूति अवकाश नियम से दो साल की अनिवार्य अवधि वाली शर्त हटाई
महिला कर्मचारियों को मिलेगा प्रसूति अवकाश
सेवा अवधि में दो बार 180 दिन तक अवकाश का प्रावधान बरकरार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत है। अब प्रसूति अवकाश लेने के बाद अगली बार अवकाश के लिए दो साल का इंतजार करने की अनिवार्यता नहीं होगी। शासन ने वित्तीय नियम संग्रह खंड-2 भाग-2 के तहत प्रसूति अवकाश से जुड़ी दो साल की अनिवार्य अवधि वाली शर्त को खत्म कर दिया है। वित्त (सामान्य) अनुभाग-2 की ओर से दो सितंबर को इसका शासनादेश जारी किया गया।
अब तक नियम के तहत महिला सरकारी कर्मियों को उनकी पूरी सेवा अवधि में अधिकतम दो बार, एक बार में 180 दिन का प्रसूति अवकाश अनुमन्य था। हालांकि, इसमें शर्त थी कि पिछले प्रसूति अवकाश की समाप्ति की तारीख से कम से कम दो वर्ष की अवधि बीतने के बाद ही अगला प्रसूति अवकाश स्वीकृत किया जाएगा।
शासनादेश के मुताबिक, प्रसूति अवकाश नियम में दो वर्ष की अवधि से संबंधित प्रतिबंध/परंतुक को मेटरनिटी बेनिफिट एक्ट, 1961 के नियम-27 के अनुरूप करने और महिला सरकारी कर्मचारियों को आ रही कठिनाइयों को दूर करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। नियम में बदलाव का मतलब यह नहीं है कि प्रसूति अवकाश की संख्या या अवधि बढ़ा दी गई है।
महिला सरकारी कर्मचारी को पूरी सेवा अवधि में अधिकतम दो बार प्रसूति अवकाश और प्रत्येक बार अधिकतम 180 दिन का मौजूदा प्रावधान जारी रहेगा। सिर्फ दो प्रसूति अवकाश के बीच दो साल का अनिवार्य अंतर रखने वाली शर्त हटाई गई है। शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि संशोधन शासनादेश लागू होने की तिथि से प्रभावी होगा। साथ ही, संबंधित प्रसूति अवकाश नियमों में भी समय-समय पर संशोधन किया जाएगा।
