गड़बड़ी पर एनपीएस मित्र भी जिम्मेदार होंगे, ग्राहक सेवा केंद्रों का पूरा जिम्मा होगा, रखनी होगी कड़ी निगरानी, मौजूदा पेंशन एजेंट अब एनपीएस मित्र कहलाएंगे
नई दिल्ली। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) में जल्द बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इसके तहत मौजूदा पेंशन एजेंट अब एनपीएस मित्र कहलाएंगे। एनपीएस मित्र लोगों को एनपीएस और पीएफआरडीए द्वारा संचालित अन्य पेंशन योजनाओं से जुड़ने में मदद करेंगे। किसी तरह की गड़बड़ी होने पर एनपीएस मित्र भी जिम्मेदार होंगे।
पेंशन निधि विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने नए नियमों का मसौदा जारी किया है और इन पर लोगों तथा संबंधित पक्षों से 2 अक्टूबर 2026 तक सुझाव मांगे गए हैं। प्रस्ताव के मुताबिक, बैंक के कारोबारी प्रतिनिधि, कॉरपोरेट कारोबारी प्रतिनिधि, बीमा एजेंट, म्यूचुअल फंड वितरक और पीएफआरडीए की मंजूरी से काम करने वाले अन्य लोग एनपीएस मित्र बन सकेंगे।
दो तरीके से मिलेंगी सेवाएं
पेंशन नियामक ने ग्राहक सेवा केंद्रों (वो संस्थान जिनके जरिए एनपीएस खाता खोला और प्रबंधित किया जाता है) को दो श्रेणियों में बांटने का प्रस्ताव दिया है। पहला होगा डिजिटल मोड, जिसके तहत ग्राहक बिना किसी कागजी कार्रवाई के केवल ऑनलाइन माध्यम से अपना खाता खोलेंगे। दूसरा होगा भौतिक सत्यापन, जिसमें शाखाओं के जरिए ऑफलाइन या हाइब्रिड मोड सेवाएं दी जाएंगी।
ग्राहक सेवा केंद्र निगरानी करेंगे एनपीएस मित्र के काम में किसी तरह की गलती, लापरवाही या नियमों का उल्लंघन होने पर उसकी जिम्मेदारी संबंधित ग्राहक सेवा केंद्र (पीओपी) की होगी। पीओपी को अपने एनपीएस मित्रों के काम की निगरानी करनी होगी और उन्हें जरूरी प्रशिक्षण भी देना होगा। अगर एनपीएस मित्र या पीओपी की धोखाधड़ी अथवा लापरवाही से ग्राहक को आर्थिक नुकसान होता है और यह साबित हो जाता है, तो उसकी भरपाई पीओपी को करनी होगी। पीओपी अपने कर्मचारियों और अपनी ओर से काम करने वाले अन्य लोगों की गलती के लिए भी जिम्मेदार होगा।
यह जिम्मेदारी होगी-
1 खाता खोलने से पहले ग्राहक ग्राहक को योजना समझने और फैसला लेने के लिए पर्याप्त समय देना होगा।
2 भ्रामक जानकारी या बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावों पर रोक होगी। ग्राहक से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जा सकेगा।
3 ग्राहकों की जानकारी को गोपनीय रखना अनिवार्य होगा। योजना में बड़ा बदलाव होने पर तुरंत बताना होगा।