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Friday, September 4, 2026

महिला कर्मचारियों के हक में दिल्ली हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला, मातृत्व अवकाश के बाद महिला को पुराना पद देना जरूरी... प्रमोशन भी

महिला कर्मचारियों के हक में दिल्ली हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला, मातृत्व अवकाश के बाद महिला को पुराना पद देना जरूरी... प्रमोशन भी



नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि मातृत्व अवकाश (मैटरनिटी लीव) के कारण महिला कर्मचारियों को पदोन्नति, जिम्मेदारियों या करियर के अवसरों से वंचित नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा, छुट्टी के बाद लौटने वाली महिला को सामान्यतः वह पुराना पद मिलना चाहिए।


यदि वह पद उपलब्ध न हो, तो वेतन, ग्रेड, और पदोन्नति की संभावनाओं के मामले में बिल्कुल समान या समकक्ष पद दिया जाना चाहिए। मातृत्व अवकाश के आधार पर अधिकारों या ओहदे में कमी को भेदभावपूर्ण माना जाएगा। कोर्ट ने साफ किया है कि मातृत्व सुरक्षा केवल नौकरी या वेतन बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि करियर में उन्नति का अधिकार भी सुरक्षित रखती है। एजेंसी


अकाउंटिंग में काम करने वाली कर्मी को ट्रेजरी डिपार्टमेंट में लगाया

जस्टिस सचिन दत्ता ने एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की याचिका पर यह फैसला सुनाया। महिला मैनेजर-अकाउंटिंग के पद पर काम करती थीं। मैटरनिटी लीव पर जाने के बाद लौटने पर उन्हें ट्रेजरी डिपार्टमेंट में काम सौंप दिया गया। उनकी पुरानी जगह पर किसी और कर्मचारी को बैठा दिया गया। कोर्ट ने साफ कहा कि मैटरनिटी लीव से लौटने वाली महिला को आम तौर पर उसी पद पर वापस लाया जाना चाहिए, जिस पर वह छुट्टी पर जाने से पहले थी।


महिला काम के घंटे और तरीके में बदलाव की हकदार

कोर्ट ने कहा, महिला मैटरनिटी के बाद अपनी हालत को देखते हुए काम, काम के घंटे, जगह या काम करने के तरीके में बदलाव या दूसरी भूमिका मांग सकती है। ऐसी हर मांग पर सही तरीके से विचार किया जाएगा। कोर्ट ने कहा, मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट, 1961 कहता है कि नियोक्ता कानूनी छुट्टी के दौरान महिला की सेवा की शर्तों में उसके नुकसान वाला कोई बदलाव नहीं कर सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 'सेवा की शर्तें' सिर्फ नौकरी खत्म करने या पैसे तक सीमित नहीं हैं। इसमें काम की प्रकृति, ग्रेड, स्टेटस, रिपोर्टिंग सिस्टम, निगरानी की जिम्मेदारियां और प्रमोशन के लिए विचार किए जाने का अधिकार भी शामिल है ।

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