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Friday, September 11, 2026

केंद्रीय कर्मचारियों के बोनस की गणना सीमा ₹7,000 से बढ़ाकर ₹21,000 करने की मांग

केंद्रीय कर्मचारियों के बोनस की गणना सीमा ₹7,000 से बढ़ाकर ₹21,000 करने की मांग


नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारियों के बोनस को लेकर नेशनल काउंसिल-जेसीएम के स्टाफ साइड ने सरकार से बोनस की गणना के लिए निर्धारित अधिकतम वेतन सीमा को ₹7,000 से बढ़ाकर ₹21,000 करने की मांग की है। इस संबंध में नेशनल काउंसिल-जेसीएम के सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने कैबिनेट सचिव एवं नेशनल काउंसिल-जेसीएम के अध्यक्ष को पत्र भेजकर आवश्यक आदेश जारी करने का अनुरोध किया है।

पत्र में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की 25 अगस्त 2026 की अधिसूचना संख्या S.O. 4710(E) का हवाला दिया गया है। अधिसूचना में बोनस की गणना के लिए वेतन सीमा ₹7,000 प्रतिमाह अथवा केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी, इनमें जो अधिक हो, के आधार पर निर्धारित करने की बात कही गई है। मंत्रालय की पूर्व व्यवस्था में भी बोनस गणना की सीमा ₹7,000 प्रतिमाह अथवा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी, जो अधिक हो, रही है। 

नेशनल काउंसिल-जेसीएम के पत्र के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम मजदूरी वर्तमान में ₹21,000 प्रतिमाह है। ऐसे में संगठन का तर्क है कि बोनस की गणना के लिए निर्धारित वेतन सीमा भी ₹21,000 की जानी चाहिए।

पत्र में कहा गया है कि यह मुद्दा राष्ट्रीय परिषद (जेसीएम) की 49वीं बैठक में भी उठाया गया था। उस समय स्टाफ साइड को बताया गया था कि इस मांग पर तब विचार किया जा सकता है, जब केंद्र सरकार बोनस की गणना के लिए निर्धारित सीमा में संशोधन करे। अब श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की अधिसूचना जारी होने के बाद स्टाफ साइड ने सरकार से इस संबंध में आवश्यक आदेश जारी करने का आग्रह किया है।

पत्र में दशहरा पर्व नजदीक होने और सरकार की ओर से उत्पादकता संबद्ध बोनस (PLB), बोनस अथवा एडहॉक बोनस के भुगतान के आदेश जारी किए जाने की प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए बोनस गणना सीमा को ₹7,000 से बढ़ाकर ₹21,000 करने की मांग की गई है।

गौरतलब है कि बोनस व्यवस्था में पात्रता सीमा और बोनस की गणना सीमा अलग-अलग होती हैं। केंद्र सरकार के उपलब्ध आधिकारिक विवरण के अनुसार बोनस की गणना के लिए 2016 से ₹7,000 प्रतिमाह अथवा संबंधित न्यूनतम मजदूरी, जो अधिक हो, का प्रावधान रहा है। 

यदि सरकार इस मांग को स्वीकार करती है तो बोनस की गणना के आधार में महत्वपूर्ण वृद्धि हो सकती है और इसका सीधा लाभ पात्र केंद्रीय कर्मचारियों को मिलने वाले बोनस की राशि पर पड़ सकता है।



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