यूपी में 826 ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल खत्म, बनाए गए प्रशासक
आदेश जारी, नई क्षेत्र पंचायतों के गठन और पहली बैठक होने तक प्रशासक के रूप में संभालते रहेंगे जिम्मेदारी
19 जुलाई 2026
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 826 ब्लॉक प्रमुखों का पांच साल का कार्यकाल रविवार को समाप्त हो गया। अब सरकार ने उन्हें ही ब्लॉकों के प्रशासक की जिम्मेदारी सौंप दी है। पंचायती राज विभाग ने रविवार को आदेश जारी कर मौजूदा ब्लॉक प्रमुखों को नई क्षेत्र पंचायतों के गठन और पहली बैठक होने तक प्रशासक के रूप में नियुक्त करने का आदेश जारी किया। इससे पहले ग्राम प्रधानों और जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल समाप्त होने पर भी उन्हें भी प्रशासक नियुक्त किया जा चुका है।
क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत अधिनियम के प्रावधानों के तहत जारी आदेश के मुताबिक 20 जुलाई से सभी वर्तमान ब्लॉक प्रमुख अपने क्षेत्र पंचायतों के नियमित प्रशासनिक कार्यों का संचालन करेंगे।
इस व्यवस्था का मकसद क्षेत्र पंचायतों के कामकाज व विकास योजनाओं की निरंतरता बनाए रखना है, ताकि चुनावी प्रक्रिया में प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों। प्रशासक के रूप में कार्य कर रहे ब्लॉक प्रमुख किसी भी अहम, नीतिगत या विशेष परिस्थिति से जुड़े निर्णय नहीं ले सकेंगे। ऐसे मामलों में संबंधित जिला पंचायत की स्वीकृति प्राप्त करनी होगी।
प्रस्ताव सीएम कार्यालय भेजा, सामान्य कार्य कर सकेंगे, डीएम को भेजेंगे प्रस्ताव
15 जुलाई 2026
लखनऊ : प्रदेश में ग्राम प्रधानों और जिला पंचायत अध्यक्षों के बाद अब क्षेत्र पंचायत अध्यक्षों (ब्लाक प्रमुखों) को भी प्रशासक बनाए जाने की तैयारी है। प्रदेश सरकार 18 जुलाई तक इससे संबंधित आदेश जारी कर सकती है। 19 जुलाई को ब्लाक प्रमुखों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद वे प्रशासक के रूप में क्षेत्र पंचायत के नियमित और सामान्य कार्यों का संचालन करेंगे।
पंचायती राज विभाग ने ब्लाक प्रमुखों को प्रशासक बनाए जाने का प्रस्ताव पहले ही मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दिया है। माना जा रहा है कि कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही इस प्रस्ताव पर मुहर लग सकती है। प्रशासक के रूप में ब्लाक प्रमुख नियमित विकास कार्यों और प्रशासनिक गतिविधियों को जारी रख सकेंगे। हालांकि, किसी भी नीतिगत या विशेष महत्व के निर्णय के लिए उन्हें प्रस्ताव जिलाधिकारी के पास भेजना होगा। सरकार की योजना के अनुसार ब्लाक प्रमुख अधिकतम छह माह तक या फिर वर्ष 2026 के पंचायत चुनाव के बाद गठित नई क्षेत्र पंचायतों की पहली बैठक होने तक, जो भी पहले हो, प्रशासक के रूप में कार्य करेंगे।
इस बीच ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के सरकार के फैसले को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट और उसकी लखनऊ खंडपीठ में सुनवाई जारी है। उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1947 की धारा 12 (3-क) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अदालत ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। लखनऊ खंडपीठ में इस मामले की अगली सुनवाई चार अगस्त को निर्धारित है। वहीं इलाहाबाद हाई कोर्ट की एकल पीठ ने सोमवार को इस विषय पर सुनवाई छह सप्ताह के लिए टाल दी।
अदालत ने कहा है कि समान मुद्दे पर लखनऊ खंडपीठ की दो सदस्यीय पीठ पहले से सुनवाई कर रही है, इसलिए फिलहाल एकल पीठ में सुनवाई उचित नहीं होगी। हाई कोर्ट में अगली सुनवाई से पहले ही 19 जुलाई को ब्लाक प्रमुखों का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। ऐसे में सरकार के सामने प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए ब्लाक प्रमुखों को प्रशासक नियुक्त करने का विकल्प सबसे व्यावहारिक माना जा रहा है। आदेश जारी होने के बाद प्रदेश की सभी क्षेत्र पंचायतों में नियमित कार्य बिना किसी व्यवधान के जारी रह सकेंगे।