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Monday, September 13, 2021

तबादले का स्थान खुद तय नहीं कर सकता कर्मचारी, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

तबादले का स्थान खुद तय नहीं कर सकता कर्मचारी, सुप्रीम कोर्ट का फैसला


■ इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को किया खारिज

■ कर्मचारी स्थानांतरण मांग सकता है, लेकिन अंतिम फैसला नियोक्ता का होगा


सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोई कर्मचारी किसी स्थान विशेष पर तबादला करने के लिए जोर नहीं दे सकता है। नियोक्ता को अपनी जरूरतों के हिसाब से कर्मचारियों का तबादला करने का अधिकार है। शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के अक्टूबर 2017 के एक आदेश को चुनौती देने वाली एक लेक्चरर की याचिका को खारिज करते हुए यह बात कही। सुप्रीम कोर्ट ने अमरोहा से गौतमबुद्ध नगर ट्रांसफर किए जाने के लिए संबंधित प्राधिकार द्वारा उनके अनुरोध को खारिज किए जाने के खिलाफ अर्जी को रद कर दिया।


जस्टिस एमआर शाह और अनिरुद्ध बोस की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि कर्मचारी किसी स्थान पर तबादला करने या नहीं करने के लिए जोर नहीं दे सकता। यह नियोक्ता पर है कि वह अपनी जरूरत के हिसाब से किसी कर्मचारी का स्थानांतरण करे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी स्थानांतरण मांग सकता है, लेकिन अंतिम फैसला नियोक्ता का माना जाएगा, जो वह अपनी आवश्यकता के आधार पर करने के लिए स्वतंत्र है।


अमरोहा जिले में पदस्थ महिला अध्यापिका ने हाई कोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में कहा था कि उन्होंने गौतमबुद्ध नगर के एक कालेज में तबादला करने का अनुरोध किया, जिसे प्राधिकार ने सितंबर 2017 में खारिज कर दिया था। महिला के वकील ने 2017 में हाई कोर्ट में दलील दी थी कि वह पिछले चार साल से अमरोहा में काम कर रही हैं और सरकार की नीति के अनुसार उन्हें ट्रांसफर का अधिकार है। हाई कोर्ट ने कहा था कि संबंधित प्राधिकार द्वारा पारित आदेश से पता चलता है कि अध्यापिका गौतमबुद्ध नगर के एक कालेज में दिसंबर 2000 में अपनी शुरुआती नियुक्ति से लेकर अगस्त 2013 तक 13 वर्ष सेवा में रहीं। इसलिए उसी कालेज में फिर भेजने का उनका अनुरोध उचित नहीं है।


कोई कर्मचारी किसी विशेष स्थान पर ट्रांसफर करने या नहीं करने का दबाव नहीं डाल सकता। यह नियोक्ता पर है कि वह जरूरत के हिसाब से किसी कर्मी का स्थानांतरण करे। - सुप्रीम कोर्ट


क्या है मामला

अमरोहा के कालेज में कार्यरत महिला लेक्चरर ने गौतमबद्धनगर के कालेज में स्थानांतरण की मांग की थी। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने याची की मांग को ठुकरा दिया तो वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं। याची का कहना था कि उन्होंने तबादले के लिए जरूरी चार वर्ष का सेवाकाल पूरा कर लिया है, स्थानांतरण उनका अधिकार है।

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