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Wednesday, June 14, 2017

यूपी कैबिनेट ने डाक्टरों की नई तबादला नीति को मंजूरी दी, तबादले के लिए प्रदेश को चार श्रेणी (ए,बी,सी,डी) में बांटा गया, पिछड़े जिलों में काम करना  होगा अनिवार्य

योगी सरकार ने स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम उठाए हैं। अब तक रसूख और ऊंचे प्रभाव के चलते सुख-सुविधा संपन्न जिलों में ही तैनाती कराने वाले डाक्टरों को पिछड़े जिलों में काम करना अनिवार्य होगा। कैबिनेट ने डाक्टरों की नई तबादला नीति को मंजूरी दी है। तबादले के लिए प्रदेश को चार श्रेणी (ए,बी,सी,डी) में बांटा गया है। इसमें पिछड़े जिलों को सी और डी श्रेणी में रखा गया है। पांच वर्ष तक की सेवा वाले डाक्टरों की तैनाती इन्हीं जिलों में होगी। राज्य सरकार केंद्र के मानव संपदा साफ्टवेयर को लागू करने जा रही है।




मंगलवार को लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में छह अहम फैसले किए गए। बैठक के बाद प्रदेश सरकार के प्रवक्ता और स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह तथा औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने फैसलों की जानकारी दी। डाक्टरों की नई तबादला नीति के अलावा कैबिनेट ने एक और अहम फैसला किया, जिसमें सेवानिवृत्त होने वाले चिकित्सकों को दोबारा तैनात किये जाने की प्रक्रिया है। कैबिनेट ने उप्र व्यापार कर अधिकारी सेवा नियमावली को मंजूरी दी है जिससे तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों के लिए वाणिज्य कर अधिकारी पद के लिए कोटा निर्धारित किया गया है। परियोजनाओं के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने का भी फैसला हुआ है।





कैबिनेट ने सैमसंग समेत दो उद्यमियों के नोएडा में निवेश प्रस्ताव को मंजूरी दी है। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर टोल चार्ज के लिए सलाहकार तैनात होंगे। सिद्धार्थनाथ ने दावा किया कि यह फैसला स्वास्थ्य सेवाओं में मिसाल बनेगा। तबादला और तैनाती की दृष्टि से लंबे समय से स्वास्थ्य महकमे में कोई नीति नहीं बनी थी। 



स्वास्थ्य सेवा सुधारने की दिशा में सक्रिय योगी सरकार ने सपा सरकार के फैसले में संशोधन करते हुए बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को हुई कैबिनेट में इस संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। अखिलेश सरकार ने एक हजार चिकित्सकों की भर्ती के लिए नियमावली बनाई थी लेकिन, उसमें केवल 297 ही भर्ती किए जा सके। इन चिकित्सकों का भी कार्यकाल अब पूरा होने को है। नई नियमावली के मंजूरी के बाद सरकार एक हजार चिकित्सकों की भर्ती करेगी। इनका चयन वॉक इन इंटरव्यू के जरिये डीजी हेल्थ की अध्यक्षता में बनी तीन सदस्यीय चयन समिति करेगी। इसमें प्रमुख सचिव स्वास्थ्य सदस्य सचिव होंगे जबकि, उनके द्वारा अनुमोदित एक व्यक्ति को सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा। 




स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि नियमावली बनने के बाद सिर्फ 297 डाक्टर ही तैनात हो सके। इसलिए कैबिनेट ने इसमें बदलाव करते हुए एक हजार पदों में बंटवारा किया है। पांच सौ पद एमबीबीएस और 500 पद विशेषज्ञ डिग्री धारक (स्पेशलिस्ट) के लिए होंगे। मंत्री के मुताबिक चयन समिति संविदा पर इन चिकित्सकों को एक वर्ष के लिए नियुक्त करेगी। कार्य अच्छा होने पर दो वर्ष के लिए विस्तार मिलेगा। इनसे कोई प्रशासनिक कार्य नहीं लिया जाएगा। इसके लिए जल्द हिंदी और अंग्रेजी अखबारों में विज्ञापन दिए जाएंगे। अनुबंध हेतु पदों का जिलेवार निर्धारण महानिदेशक की संस्तुति पर शासन द्वारा किया जाएगा, परन्तु अनुबंध के कुल पदों की संख्या एक हजार से अधिक नहीं होगी।





पिछड़े जिलों में जाने पर मिलेगा अधिक वेतन : सरकार ने पिछड़े जिलों में डाक्टरों को भेजने के लिए प्रोत्साहन की प्रक्रिया अपनाई है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि अनुबंध पर तैनात एमबीबीएस चिकित्सक को दिया जाने वाला मानदेय चिकित्सा इकाइयों की श्रेणी के आधार पर किया जाएगा। इसमें ए श्रेणी के लिए 50,000 रुपए, बी श्रेणी के लिए 55,000 रुपए, सी श्रेणी के लिए 60,000 रुपए तथा डी श्रेणी के लिए 65,000 रुपए मासिक होगा। इसी प्रकार विशेषज्ञ चिकित्सक का मासिक मानदेय ए श्रेणी के लिए 80,000 रुपए, बी श्रेणी के लिए 90,000 रुपए मासिक, सी के लिए एक लाख रुपए तथा डी श्रेणी के लिए एक लाख 20 हजार रुपए होगा।





लखनऊ : सभी जगह डाक्टरों की तैनाती में संतुलन बनाने के लिए प्रदेश को चार श्रेणियों में बांटा गया है। श्रेणी ए में लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी, आगरा, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, मेरठ, अलीगढ़, गोरखपुर, बाराबंकी, सीतापुर, बरेली, रायबरेली, मुरादाबाद और उन्नाव, कुल 16 जिले होंगे। श्रेणी बी में कुल 29 जिले होंगे जिसमें फैजाबाद, हरदोई, मुजफ्फरनगर, बस्ती, आजमगढ़, जौनपुर, सुलतानपुर, मऊ, बलिया, देवरिया, कानपुर देहात, फिरोजाबाद, हाथरस, मथुरा, बिजनौर, सहारनपुर, बागपत, बुलन्दशहर, हापुड़, अम्बेडकरनगर, प्रतापगढ़, झांसी जिले शामिल हैं। श्रेणी सी में 19 जिले हैं जिनमें एटा, कासगंज, कौशांबी, बदायूं, बहराइच, संतकबीरनगर, कन्नौज, लखीमपुर खीरी, गाजीपुर, मैनपुरी, संभल, अमरोहा, शामली, औरैया, जालौन, मीरजापुर, बांदा, भदोही, अमेठी को शामिल किया गया है। श्रेणी डी में कुल 11 जिले हैं जिनमें सोनभद्र, हमीरपुर, महोबा, ललितपुर, चित्रकूट, बलरामपुर, श्रवस्ती, सिद्धार्थनगर, चंदौली, महराजगंज, कुशीनगर को शामिल किया गया है। आवेदन के लिए तय की पात्रता : कैबिनेट ने तय किया है कि जिन डाक्टरों को सेवा में पांच वर्ष व्यतीत हुए हैं, वे केवल श्रेणी डी एवं सी के जिलों के विकल्प देने हेतु पात्र होंगे। जिन डाक्टरों को सेवा में पांच वर्ष से अधिक किन्तु 10 वर्ष से कम व्यतीत हुए हैं वे श्रेणी-सी या डी के जिलों का विकल्प देने के लिए पात्र होंगे एवं श्रेणी-बी के जिलों का विकल्प उसी दशा में दे सकते हैं, जब उनके द्वारा श्रेणी-डी के जिलों में कम से कम दो वर्ष की सेवा की गयी हो और श्रेणी-सी एवं डी के जिलों में कुल मिलाकर पांच वर्ष की सेवा की गयी हो। जिन चिकित्साधिकारियों की कुल सेवा अवधि 10 वर्ष से अधिक है, वे श्रेणी-सी एवं डी के अतिरिक्त श्रेणी-बी या ए के जिलों हेतु आवेदन देने हेतु उसी दशा में पात्र होंगे, जब उनके द्वारा श्रेणी-सी एवं डी में कुल मिलाकर सात वर्ष की सेवा पूर्ण कर ली गई हो।



सीटीओ पद पर प्रोन्नति के लिए कोटा : कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश व्यापार कर अधिकारी सेवा (पांचवां संशोधन) नियमावली-2017 को मंजूरी दी है। इसके तहत वाणिज्य कर अधिकारी (सीटीओ) के पद पर प्रोन्नति के लिए तृतीय श्रेणी के कोटा में अलग-अलग संवर्ग के लिए विभाजन किया गया है। 1दो मेगा निवेश प्रस्तावों को मंजूरी : सैमसंग और इंट्रा टेक्नालाजी इंडिया लिमिटेड के उत्तर प्रदेश में निवेश प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दी है। इससे दस हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। कैबिनेट ने इसे मंजूरी दी है। 1आगरा एक्सप्रेस-वे पर टोल के लिए नियुक्त होगा कंसल्टेंट : कैबिनेट ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर टोल लगाने के लिए कंसल्टेंट नियुक्त करने का फैसला किया है।

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