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Friday, March 30, 2018

SC/ST एक्ट पर बुधवार तक रिव्यू पिटिशन, कानून मंत्रालय ने दिया ग्रीन सिग्नल


सुप्रीम कोर्ट ने हाल में अनुसूचित जाति और जनजाति अत्याचार निरोधक कानून (एससी व एसटी एक्ट) से संबंधित मामले में अग्रिम जमानत के प्रावधान संबंधी सुप्रीम कोर्ट ने हाल में जो आदेश पारित किया है, उसे लेकर केंद्र सरकार जल्दी ही रिव्यू पिटिशन दाखिल करने जा रही है। कानून मंत्रालय ने इसे ग्रीन सिग्नल दे दिया गया है। इस मामले में बुधवार तक रिव्यू पिटिशन दाखिल की जा सकती है।

कानून मंत्रालय ने जजमेंट

पर किया था विचार

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट पर विचार किया और कानून मंत्रालय ने फैसले को लेकर रिव्यू पिटिशन दाखिल करने का फैसला किया। सरकार के लॉ ऑफिसर इस मामले में दिए फैसलों को गहराई से देख रहे हैं, ताकि सरकार पुख्ता तरीके से अपना पक्ष कोर्ट के सामने रख सकें। गौरतलब है कि 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी थी कि एससीएसटी एक्ट के तहत न तो सीधे एफआईआर दर्ज की जा सकेगी और न ही सीधे गिरफ्तारी हो सकेगी। एफआईआर से पहले प्रारंभिक जांच होगी। इसके साथ ही अग्रिम जमानत का भी प्रावधान किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने एससी एसटी एक्ट (अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निरोधक कानून) के दुरुपयोग पर संज्ञान लिया था और दुरुपयोग रोकने के लिए निर्देश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर पब्लिक सर्वेंट के खिलाफ शिकायत है तो अधिकारी को नियुक्त करने वाले अथॉरिटी की मंजूरी के बाद ही केस दर्ज होगा, जबकि आम लोगों के खिलाफ शिकायत पर एसएसपी की मंजूरी के बाद ही गिरफ्तारी हो सकेगी।

सामाजिक न्याय मंत्री से मिला दलित सांसदों का प्रतिनिधिमंडल

कोर्ट के फैसले के बाद बीजेपी के दलित सांसदों का प्रतिनिधिमंडल सामाजिक न्याय मंत्री से मिला था। इस मुलाकात में उन्होंने फैसले पर आपत्ति जताते हुए केंद्र सरकार से पुनर्विचार याचिका दायर किए जाने की मांग की थी। बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग (एससी/एसटी कमीशन) का प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिला था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, एक्ट में फौरन गिरफ्तारी नहीं होगी

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में स्पष्ट कहा था कि एससी-एसटी एक्ट मामले में तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी। यह आदेश उन आंकड़ों के आधार पर दिया गया था, जिसमें पाया गया था कि बड़ी संख्या में इस एक्ट का दुरुपयोग हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी से पहले प्राथमिक जांच-पड़ताल के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी से पहले मिलने वाली जमानत की रुकावट को भी खत्म कर दिया था। ऐसे में दुर्भावना के तहत दर्ज कराए गए मामलों में अब अग्रिम जमानत भी मिल सकेगी। विपक्ष ने तत्काल इसे राजनीतिक रंग देते हुए जिम्मा सरकार पर फोड़ा था।

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