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Wednesday, January 24, 2018

मौजूदा कानून में बड़ा बदलाव करने की तैयारी, माता-पिता का भरण-पोषण होगा अनिवार्य

 मां-बाप की सेवा को सरकार अब कानूनन अनिवार्य बनाएगी। कोई भी इससे बच नहीं सकेगा। इसे लेकर जल्द ही वह कानून में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। जिसमें बुजुर्ग मां-बाप को पूरा संरक्षण दिया जाएगा। इसके तहत यदि किसी के बच्चे उनकी सेवा नहीं करते हैं तो वह उनसे गुजारा भत्ता ले सकेंगे। 


नए नियमों के तहत ऐसा नहीं होगा। माता-पिता नोडल अधिकारी के पास एक शिकायत दर्ज कराकर गुजारा-भत्ता पाने के हकदार हो सकेंगे। वही इसका निवारण करने में भी सक्षम होंगे और बुजुर्ग कोर्ट कचहरी के चक्कर काटने से बचेंगे। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रलय इसे लेकर तेजी से काम कर रहा है। हाल ही में सभी राज्यों और मंत्रलयों से इसे लेकर राय भी मांगी है। बुजुर्ग माता-पिता के भरण पोषण को लेकर अभी भी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रलय का एक कानून है। लेकिन अब बदलाव लाकर इसे सरल बनाया जा रहा है। सरकार के स्तर पर कोशिश है कि वह इसकी गारंटी खुद ले। इसके लिए ज्यादा से ज्यादा वृद्धा आश्रम खोले जाए। जहां स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ उनके खाने-पाने और रहने की बेहतर व्यवस्था हो। लेकिन इससे पहले वह इन बुजुर्ग माता-पिता के बच्चों को भी जवाबदेह बनाना चाहती है। सेवा न करने वाले बच्चों से इनके भरण-पोषण के लिए एक राशि वसूली जा सकती है, जो उन्हें देनी ही होगी। इस पैसे से वह अपना भरण-पोषण ठीक तरीके से कर सकेंगे। मंत्रलय का मानना है कि मौजूदा समय में उनके पास ऐसे ढेरों मामले आ रहे है, जिनमें बच्चों ने माता-पिता के नाम की संपत्ति को बेच कर उन्हे घर से बेदखल कर दिया है। मंत्रलय से जुड़े अधिकारियों की मानें तो यह समस्या पिछले कुछ सालों में तेजी से बढी है। वैसे भी मौजूदा समय में देश की कुल आबादी का करीब 11 फीसद आबादी बुजरुगों की है। यह 2026 तक बढ़कर करीब 13 फीसद हो जाएगी। 



मप्र, असम में सेवा नहीं करने वालों के वेतन से कट जाएगा दस फीसद : बुजुर्ग माता-पिता के भरण पोषण के कानून में बदलाव से पहले मंत्रलय ने मध्य प्रदेश और असम के कानून का अध्ययन करने का फैसला लिया है। इन राज्यों ने हाल ही में एक नया कानून बनाया है, जिसमें माता-पिता की सेवा न करने वालों के वेतन से सरकार हर महीने 10 फीसद की कटौती करेगी। जो उनके माता-पिता को दे दी जाएगी।



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