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Tuesday, September 26, 2017

कम हैं राज्य कर्मचारी कैसे चलेगी सरकार? आबादी के मुताबिक काम बढ़ा है और संख्या कम होने से कार्यभार भी बढ़ा लेकिन कर्मचारियों की संख्या जस की तस

■ अतिरिक्त कार्यो से मांगी मुक्ति: परिषद ने मुख्य सचिव को बताया है कि संख्या कम होने के बावजूद राज्य कर्मचारियों को अपने निर्धारित दायित्वों के अलावा बीएलओ, राशन वितरण, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं, बोर्ड परीक्षा, वृद्धावस्था पेंशन, खुले में शौच चिन्हीकरण और ग्राम्य विकास सहित अन्य विभागों के कार्यो की जांच में भी लगाया जा रहा है। परिषद ने ऐसे कार्यो में कर्मचारियों को न लगाने की मांग की है, जिसके बारे में उन्हें मूल जानकारी न हो। राज्य कर्मचारियों ने मुख्य सचिव से अतिरिक्त कार्यो से मुक्ति दिलाने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि इसी व्यवस्था के कारण सरकारी कामों में गुणवत्ता नहीं आ पा रही है।



लखनऊ : प्रदेश सरकार ने तीन दशक पहले 1987 में तय किया था कि अपना काम कराने के लिए उसे किस विभाग में कितने कर्मचारियों की जरूरत है। इसी मुताबिक पद तय किए गए थे। अब आबादी और काम कई गुना बढ़ने के बाद नए सिरे से कर्मचारियों की आवश्यकता का निर्धारण होना दूर रहा, जो पद तीस साल पहले की जरूरत के लिहाज से निर्धारित थे, वह भी खाली पड़े हैं। ऐसे में स्क्रीनिंग की उल्टी कार्रवाई होते देख राज्य कर्मचारियों ने अब मुख्य सचिव को विभागों में कर्मचारियों की उपस्थिति का आइना दिखाया है।



राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने मुख्य सचिव राजीव कुमार को बताया है कि सरकार का काम संभालने वाले सचिवालय प्रशासन विभाग में ही समीक्षा अधिकारियों से लेकर सहायक समीक्षा अधिकारियों तक के पद बड़े पैमाने पर रिक्त पड़े हैं, जबकि वन विभाग में भी ऊपर से नीचे तक कुल 13455 पदों में 3851 खाली हैं। परिषद अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी ने बताया कि वन विभाग में भारतीय वन सेवा के 158 में 22, प्रांतीय वन सेवा के 231 में 120, अन्य संवर्ग के 14 में नौ, सांख्यकीय संवर्ग के छह में चार, सांख्यकीय व अन्य संवर्ग के 862 में 230, समूह ग के 8908 में 2911 और समूह घ के 3278 में 555 पदों पर कोई नियुक्ति नहीं है।



इसी तरह सचिवालय प्रशासन विभाग में समीक्षा अधिकारियों के 2024 में 548, समीक्षा अधिकारी लेखा के 132 में 44, सहायक समीक्षा अधिकारियों के 810 में 429 और सहायक समीक्षा अधिकारी लेखा के 26 में 25 पद रिक्त पड़े हैं। 


उधर कृषि जैसे महत्वपूर्ण विभाग में भी कुर्सियों पर बैठ कर काम करने के लिए कर्मचारी नहीं हैं। कृषि विभाग के वरिष्ठ प्राविधिक सहायक ग्रुप ए में विकास शाखा के 527 में 457, कृषि रक्षा शाखा के 269 में 252, शोध शाखा के 260 में 237, अभियंत्रण शाखा के 67 में 53 और अवर अभियंता संवर्ग के 337 में से 187 पद खाली पड़े हैं। परिषद अध्यक्ष का कहना है कि 30 साल में आबादी के मुताबिक काम बढ़ा है और संख्या कम होने से कार्यभार भी बढ़ा है।