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Wednesday, September 13, 2017

एक फीसद महंगाई भत्ते पर बिफरे कर्मचारी, मंहगाई के हिसाब से बताया नाकाफी

लखनऊ : महंगाई भत्ते के तौर पर महज एक फीसद की बढ़ोतरी ने केंद्रीय कर्मचारियों के साथ राज्यकर्मियों को भी भड़का दिया है। केंद्रीय कर्मचारी जहां कम भत्ते को आर्थिक चोट करार दे रहे हैं, वहीं राज्य कर्मचारी पहले ही मायूस हो गए हैं कि अब उन्हें भी इतने ही भत्ते से संतोष करना पड़ेगा।


केंद्रीय कर्मचारी समन्वय समिति के महासचिव जितेंद्र प्रताप सिंह ने एक फीसद को अपर्याप्त ठहराते हुए कम से कम पांच फीसद की वृद्धि किए जाने की मांग की है। सिंह ने बताया कि इस साल जनवरी के बाद से कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है। बड़ा फर्क पेट्रोल-डीजल के दामों में भी आया है। इसका असर प्रत्येक वस्तु पर पड़ा है। केंद्रीय कर्मचारियों ने एक फीसद भत्ता तय करने वाले अधिकारियों के विवेक और प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। कर्मचारियों के मुताबिक जिस बास्केट के आधार पर भत्ता तय किया जाता है, उसमें रोजमर्रा के इस्तेमाल की प्रमुख वस्तुएं शामिल की जाती हैं लेकिन इस बार अधिकारियों ने बास्केट में न जाने क्या भर लिया कि भत्ता सिमट कर एक फीसद रह गया।


दूसरी तरफ राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री शिवबरन सिंह ने भी बढ़ती महंगाई के सामने एक फीसद महंगाई भत्ते को कर्मचारियों के साथ मजाक करार दिया है। यादव का कहना है कि सकल घरेलू उत्पाद में जब दो फीसद की गिरावट आई है तो महंगाई भत्ता इसका कम से कम डेढ़ गुना होना चाहिए। उन्होंने हर बार पूर्णाक के प्रयास में महंगाई भत्ता कम किए जाने को भी कर्मचारियों के साथ अन्याय बताया। उधर जवाहर भवन इंदिरा भवन कर्मचारी महासंघ के सचिव सुशील कुमार बच्चा ने केंद्रीय कर्मचारियों को जुलाई का महंगाई भत्ता दिए जाने के बाद अब राज्य कर्मचारियों को भी यह जल्द दिए जाने की मांग की है।


■ एक फीसदी डीए से कर्मचारी नेता नाराज, मंहगाई के हिसाब से बताया नाकाफी।

इलाहाबाद : केंद्र  सरकार ने मंगलवार को कर्मचारियों के लिए एक फीसदी डीए का ऐलान किया तो कर्मचारी नेता नाराज हो गए। विभिन्न संगठनों के कर्मचारी नेताओं ने अपना आक्रोश जताते हुए एक फीसदी डीए को कर्मचारियों के लिए छलावा बताया। कर्मचारियों का कहना है कि महंगाई को देखते हुए डीए में तीन फीसदी की बढ़ोतरी की जानी चाहिए। यदि इसमें दिक्कत आ रही है तो कम से कम दो प्रतिशत डीए तो बढ़ा ही दिया जाना चाहिए। पेश है इसी मुद्दे पर कर्मचारी नेताओं की प्रतिक्रिया..


■ वर्तमान सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली को आधार बनाकर आंकड़ों की गणना कर रही है जबकि वास्तव में अधिकांश उपभोक्ता खुले बाजार से खरीदारी कर रहा है। डीए में कम से कम तीन प्रतिशत की वृद्धि होनी चाहिए थी। -सुभाष चन्द्र पांडेय, सहायक महासचिव कन्फेडेरेशन ऑफ सेंट्रल गर्वनमेंट इम्प्लाईज एंड वर्कर्स


■ सरकार ने सभी फार्मूले ताक पर रखकर एक फीसदी डीए की घोषण की है। फामरूले के अनुसार कम से कम दो फीसदी डीए दिया जाना चाहिए था। -एसएन ठाकुर, संरक्षक एनसीआर वर्कर्स यूनियन



■ जिस हिसाब से महंगाई बढ़ रही है उसके अनुसार डीए में वृद्धि नहीं हुई है। सरकार ने कर्मचारियों के साथ बहुत सी गड़बड़ियां की हैं। भत्ताें में 95 प्रतिशत तक कटौती कर दी गई। -निर्मल श्रीवास्तव, कर्मचारी नेता सीडीए पेंशन



■ एक फीसदी डीए का ऐलान किए जाने से कर्मचारियों में निराशा है। सरकार को डीए की घोषणा करने में फामरूले का ध्यान रखना चाहिए था। डीए में कम से कम तीन प्रतिशत की वृद्धि होनी चाहिए थी। -जेपी यादव, संरक्षक एनसीआर मजदूर संगठन


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