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Thursday, September 21, 2017

राज्य कर्मचारियों में एरियर भुगतान में देर से नाराजगी, वादे से पीछे हट रही प्रदेश सरकार के रवैये से शुरू हुई बेचैनी


लखनऊ : सातवें वेतनमान के एरियर के भुगतान को लेकर अपने वादे से पीछे हट रही प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारियों को आंदोलित कर दिया है। मंगलवार को कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसले की जानकारी बुधवार को सार्वजनिक होते ही कर्मचारियों में बेचैनी फैल गई कि जो रकम उन्हें पिछले साल मिल जानी चाहिए थी, वह फिलहाल इस साल भी नहीं मिलेगी। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने इसे कर्मचारियों के साथ धोखा करार देते हुए सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।


राज्य कर्मचारी आशान्वित थे कि पिछली सपा सरकार के वादे के मुताबिक उन्हें अबकी अक्टूबर में छह महीने का एरियर मिल जाएगा। उन्होंने पर्व के मुताबिक योजनाएं भी बना ली थीं लेकिन, पिछली सरकार का वादा इस सरकार में पूरा न होने से अब वे निराश हैं। राज्य सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए सातवां वेतनमान एक जनवरी 2016 से लागू किया था। इसका भुगतान एक जनवरी 2017 से शुरू किया गया था। राज्य सरकार ने तब कैबिनेट बैठक में तय किया था कि 2016 के कुल बकाए में से छह महीने का एरियर अक्टूबर 2017 में और शेष छह महीने का एरियर 2018 में दिया जाएगा।



अब छह महीने के एरियर की पहली किस्त अदा करने का समय आया तो सरकार ने फिर कैबिनेट में इस मामले को लाकर दिसंबर 2017 के बाद भुगतान का निर्णय कर लिया। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी ने इसे कर्मचारियों के साथ अन्याय करार देते हुए विरोध की चेतावनी दी है। परिषद के एक अन्य गुट के महामंत्री अतुल मिश्र ने सरकार से कर्मचारियों के ब्याज के नुकसान की परवाह करने का आग्रह किया है। मिश्र का कहना है कि डेढ़ साल देर से मिल रहे एरियर पर पहले ही ब्याज का नुकसान हो रहा था, जबकि अब तो दिसंबर बाद भुगतान किए जाने की बात से यह भी साफ नहीं हो रहा कि अदायगी कब होगी।