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Saturday, September 9, 2017

जबरन रिटायरमेंट व प्रोन्नति 15 सितम्बर तक : नाकारा सरकारी सेवकों की छुट्टी और बेहतर काम वालों की होगी प्रोन्नति, अफसरों की सुस्ती से खफा मुख्य सचिव ने फिर दिए निर्देश

लखनऊ : सरकार 50 उम्र पार दागी, नाकारा और भ्रष्टाचारी सरकारी सेवकों को जबरन रिटायर करने और दूसरी तरफ बेहतर काम करने वालों की प्रोन्नति के लिए अभियान चला रही है। इसकी प्रक्रिया पूरी करने के लिए मुख्य सचिव राजीव कुमार ने 31 जुलाई तक मौका दिया था लेकिन, इस अभियान में ढिलाई होने से उनकी नाराजगी बढ़ी है। खफा मुख्य सचिव ने 15 सितंबर तक दोनों कार्य पूरा करने के लिए सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिवों की जवाबदेही तय की है। 



सरकारी सेवकों में दक्षता सुनिश्चित करने के लिए 1985, 1989, 2000, 2002 और 2007 के शासनादेश का हवाला देकर मुख्य सचिव ने सभी विभागों में 50 उम्र पार बेकार सरकारी सेवकों की नियमानुसार स्क्रीनिंग कराकर सूची मांगी थी। उन्होंने 31 जुलाई तक सूची उपलब्ध कराने को कहा। इसमें अपर मुख्य सचिव आबकारी दीपक त्रिवेदी ने चार सहायक आबकारी आयुक्त और तीन पीसीएस अधिकारियों को स्क्रीनिंग की कसौटी पर गड़बड़ पाते हुए उनकी सेवा समाप्त करने की संस्तुति की। इसी तरह कई और विभागों में सरकारी सेवकों को रिटायर करने की संस्तुति की गई लेकिन, जिस अपेक्षा से मुख्य सचिव ने फरमान जारी किया था उस दिशा में विभागीय प्रमुखों के कदम नहीं बढ़े। 



शुक्रवार को मुख्य सचिव ने दोबारा फरमान जारी करते हुए एक निश्चित प्रारूप भी भेजा है और उसमें 15 सितंबर तक स्क्रीनिंग की रिपोर्ट तलब की है। इसमें 50 वर्ष की आयु प्राप्त कुल कार्मिकों की संख्या, स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष विचारार्थ रखे गए कार्मिको की संख्या, अनिवार्य सेवानिवृत्ति के योग्य पाए गए कार्मिकों की संख्या, सेवानिवृत्त किए गए कार्मिकों की कुल संख्या मांगी है। इसमें विभागाध्यक्ष, अतिरिक्त विभागाध्यक्ष, पीसीएस संवर्ग में समूह क और ख के अधिकारी, पीसीएस संवर्ग से भिन्न समूह क और ख के अधिकारी, समूह ग और समूह घ के कार्मिक का ब्योरा देना है। 



■  निर्देश के बावजूद सुस्ती 

मुख्य सचिव ने राज्य सरकार के अधीनस्थ सभी विभागों में पदोन्नति के जरिये भरे जाने वाले सभी रिक्त पदों की गणना कर उसे विभागीय प्रोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक कर भरने के निर्देश दिए थे। तीन अगस्त को जारी इस सकरुलर में उन्होंने अधिकारियों को एक माह का मौका दिया था लेकिन, निर्देश के बावजूद सुस्ती बनी रही। मुख्य सचिव ने शुक्रवार को अफसरों को भेजे गए सकरुलर में कहा है कि वांछित कार्यवाही सभी विभागों द्वारा अभी तक की गई प्रतीत नहीं होती है। उन्होंने कहा है कि चयन वर्ष 2017-18 में पदोन्नति के जरिये भरे जाने वाले सभी रिक्त पदों की गणना कर यह कार्य 15 सितंबर तक प्राथमिकता के आधार पर पूरा करें। यह राज्य सरकार की प्राथमिकता के कार्यो में शामिल है।