Searching...
Thursday, July 20, 2017

कलेक्टरों पर जनता के आरोप सच साबित : सुबह 9 से 11 के बीच कार्यालय पर नहीं मिले 26 डीएम, मुख्य सचिव ने शासनादेश की अवहेलना पर दी चेतावनी

इन जिलों के डीएम नहीं मिले : आजमगढ़, बलिया, मऊ, कुशीनगर, देवरिया, महराजगंज, बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा, जालौन, फतेहपुर, गोंडा, बाराबंकी, बदायूं, बिजनौर, बुलंदशहर, आगरा, मैनपुरी, अलीगढ़, शाहजहांपुर, लखीमपुरखीरी, रायबरेली, मेरठ और कासगंज के कलेक्टर मुख्य सचिव के फोन के समय कार्यालय पर मौजूद नहीं थे। सूत्रों का कहना है कि इनमें से कुछ बाढ़ और कुछ कानून व्यवस्था के लिए कार्यालय से बाहर होने का तर्क दे रहे हैं। दो अधिकारियों ने बीमार होने की जानकारी भेजी है।





लखनऊ : फरियादियों की अनदेखी के कलेक्टरों (डीएम) पर लगने वाले आरोप बुधवार को मुख्य सचिव की जांच में सच साबित हुए। सरकार की प्राथमिकता में शामिल बुंदेलखंड के सात जिलों के डीएम कार्यालय से गैरहाजिर मिले। नाराज मुख्य सचिव ने सभी डीएम को भेजे निर्देश में कहा है कि ‘कलेक्टरों की गैर हाजिरी शासनादेशों की अवहेलना है।’ कुछ के विरुद्ध जल्द कार्रवाई होने के संकेत भी मिले हैं।





मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हिदायत पर तत्कालीन मुख्य सचिव ने 24 अप्रैल को एक शासनादेश जारी किया था, जिसमें प्रत्येक डीएम को सुबह नौ से 11 बजे तक कार्यालय में मौजूद रहकर जनता की फरियाद सुनने की हिदायत दी गयी थी। पीड़ितों को न्याय और दोषियों को सजा दिलाने का दायित्व भी सौंपा गया था। बावजूद इसके मुख्यमंत्री के जनता दरबार पहुंचने वाले फरियादी डीएम के कार्यालय पर उपस्थित नहीं होने अथवा न्याय दिलाने में दिलचस्पी न लेने का इल्जाम लगाते हैं। विधायक, पूर्व विधायक, पूर्व सांसद भी जिला मुख्यालयों पर न्याय न मिलने का आरोप लगाते आ रहे हैं। हाल के दिनों में मुख्यमंत्री से मिले भाजपा विधायकों ने भी जिलों में सुनवाई न होने की शिकायत की थी। नौकरशाहों पर लग रहे आरोपों की सच्चाई जानने के लिए मुखिया राजीव कुमार ने 17 जुलाई यानी सोमवार को डीएम कार्यालयों पर फोन मिलाया।




75 जिलों में से 26 जिलों के डीएम कार्यालय पर नहीं मिले। कई ने पलट कर यह जानने का प्रयास भी नहीं किया कि मुख्य सचिव कार्यालय से फोन क्यों आया था। इससे नाराज मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को लिखे पत्र में कहा है कि शासन ने प्रतिदिन सुबह नौ से 11 के बीच जनता की समस्या सुनने और उन्हें निस्तारित करने का आदेश दिया है, मगर इसका पालन नहीं हो रहा है। यह शासन के आदेशों की अवहेलना है। जो डीएम गैर हाजिर पाये गए थे, उनकी कार्य प्रणाली की अलग से जांच कराई जा रही है। संभव है कि कुछ के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

संबन्धित खबरों के लिए क्लिक करें

GO-शासनादेश NEWS अनिवार्य सेवानिवृत्ति अनुकम्पा नियुक्ति अल्‍पसंख्‍यक कल्‍याण अवकाश आंगनबाड़ी आधार कार्ड आयकर आरक्षण आवास उच्च न्यायालय उच्‍च शिक्षा उच्चतम न्यायालय उत्तर प्रदेश उत्तराखण्ड उपभोक्‍ता संरक्षण एरियर एसीपी ऑनलाइन कर कर्मचारी भविष्य निधि EPF कामधेनु कारागार प्रशासन एवं सुधार कार्मिक कार्यवाही कृषि कैरियर कोर्टशाला कोषागार खाद्य एवं औषधि प्रशासन खाद्य एवम् रसद खेल गृह गोपनीय प्रविष्टि ग्रामीण अभियन्‍त्रण ग्राम्य विकास ग्रेच्युटी चतुर्थ श्रेणी चयन चिकित्सा चिकित्‍सा एवं स्वास्थ्य चिकित्सा प्रतिपूर्ति छात्रवृत्ति जनवरी जनसंख्‍या जनसुनवाई जनसूचना जनहित गारण्टी अधिनियम धर्मार्थ कार्य नकदीकरण नगर विकास निबन्‍धन नियमावली नियुक्ति नियोजन निर्वाचन निविदा नीति न्याय न्यायालय पंचायत चुनाव 2015 पंचायती राज पदोन्नति परती भूमि विकास परिवहन पर्यावरण पशुधन पिछड़ा वर्ग कल्‍याण पीएफ पुरस्कार पुलिस पेंशन प्रतिकूल प्रविष्टि प्रशासनिक सुधार प्रसूति प्राथमिक भर्ती 2012 प्रेरक प्रोन्‍नति प्रोबेशन बजट बर्खास्तगी बाट माप बेसिक शिक्षा बैकलाग बोनस भविष्य निधि भारत सरकार भाषा मकान किराया भत्‍ता मत्‍स्‍य मंहगाई भत्ता महिला एवं बाल विकास माध्यमिक शिक्षा मानदेय मानवाधिकार मान्यता मुख्‍यमंत्री कार्यालय युवा कल्याण राजस्व राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद राज्य सम्पत्ति राष्ट्रीय एकीकरण रोक रोजगार लघु सिंचाई लोक निर्माण लोक सेवा आयोग वरिष्ठता विकलांग कल्याण वित्त विद्युत विविध विशेष भत्ता वेतन व्‍यवसायिक शिक्षा शिक्षा शिक्षा मित्र श्रम सचिवालय प्रशासन सत्यापन सत्र लाभ सत्रलाभ समन्वय समाज कल्याण समाजवादी पेंशन समारोह सर्किल दर संवर्ग संविदा संस्‍थागत वित्‍त सहकारिता सातवां वेतन आयोग सामान्य प्रशासन सार्वजनिक उद्यम सार्वजनिक वितरण प्रणाली सिंचाई सिंचाई एवं जल संसाधन सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम सूचना सेवा निवृत्ति परिलाभ सेवा संघ सेवानिवृत्ति सेवायोजन सैनिक कल्‍याण स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन स्थानांतरण होमगाडर्स