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Friday, July 7, 2017

डॉक्टरों की नौकरी 62 साल तक अनिवार्य, गुपचुप जारी हुई अधिसूचना की जानकारी मिलते ही डॉक्टर विरोध में

लखनऊ : सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की मौजूदगी बनाए रखने के लिए हर संभव कोशिश कर रही सरकार के हालिया निर्देश ने डॉक्टरों को भड़का दिया है। सवा महीने पहले स्वास्थ्य विभाग ने जब डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 साल की थी और इसे वैकल्पिक रखा था, तब तो डॉक्टरों ने स्वागत किया था, लेकिन अब 62 साल पर ही सेवानिवृत्त किए जाने की गुपचुप जारी हुई अधिसूचना की जानकारी मिलते ही डॉक्टर विरोध में आ गए हैं।



प्रदेश के सरकारी अस्पताल डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं। इस कमी को दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक ओर डॉक्टरों की भर्ती की तैयारी की है तो साथ ही वर्तमान डॉक्टरों को बनाए रखने के लिए उनकी सेवानिवृत्ति आयु भी बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी। 



अधिसूचना ने उल्टा कर दिया मामला
लखनऊ : 31 मई को जारी आदेश में सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष किए जाने के बाद भी डॉक्टरों को यह विकल्प दिया गया था कि वे चाहें तो 60 साल में रिटायर हो जाएं या 62 साल तक पूरी नौकरी करें। इस विकल्प की वजह से डॉक्टर खुश थे कि उनके पास अब दोनों अवसर मौजूद हैं, लेकिन चार जुलाई को स्वास्थ्य सचिव आलोक कुमार की ओर से जारी अधिसूचना ने मामले को उल्टा कर दिया। अधिसूचना में बताया गया है कि विचार करने के बाद 31 मई के आदेश में पहली शर्त को संशोधित कर दिया गया है। पहले इस शर्त में कहा गया था- ‘वर्तमान में कार्यरत चिकित्साधिकारियों में से जो 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होना चाहेंगे, उन्हें विकल्प प्रदान किया जाएगा।’



अब इसे यूं बदला गया है- ‘यह व्यवस्था वर्तमान में कार्यरत समस्त चिकित्साधिकारियों पर अनिवार्य रूप से लागू होगी।’ स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल प्रभाव से इस आदेश को लागू कर दिया है।



यह होगा असर : प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में एमबीबीएस व विशेषज्ञ डॉक्टरों की कुल संख्या करीब 11 हजार है। इनमें से करीब 30-35 डॉक्टर हर महीने सेवानिवृत्त होते हैं। साल भर में इनकी संख्या करीब 350 पहुंचती है। 62 वर्ष की अनिवार्य सेवानिवृत्ति होने से दो साल के लिए डॉक्टरों का रिटायरमेंट रुक जाएगा। इससे स्वास्थ्य विभाग, अस्पतालों और मरीजों को दो साल में लगभग 700 अनुभवी व विशेषज्ञ डॉक्टरों का अतिरिक्त लाभ होगा।



यह है समस्या : पीएमएस एसोसिएशन अनिवार्य सेवा बढ़ाने के विरोध में है। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ.अशोक यादव का कहना है कि डॉक्टरों ने 58 साल तक के लिए नौकरी शुरू की थी। इसे बढ़ाकर पहले 60 और अब 62 वर्ष कर दिया गया, जबकि इस उम्र में हर किसी की शारीरिक, पारिवारिक या सामाजिक स्थिति ऐसी नहीं होती कि वह काम करता रहे। डॉ.यादव ने 62 साल की सेवानिवृत्ति को वैकल्पिक किए जाने की मांग शासन से की है। मांग पूरी न होने पर एसोसिएशन ने विरोध की चेतावनी दी है।




नहीं मिल रहा वीआरएस : वैसे तो स्वास्थ्य विभाग में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) की व्यवस्था लागू है, पर कुछ अपवादों को छोड़कर वीआरएस किसी को नहीं मिल रहा। पीएमएस एसोसिएशन के मुताबिक वीआरएस के एक हजार से ज्यादा आवेदन लंबित हैं, लेकिन सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी की वजह से स्वास्थ्य विभाग इसकी अनुमति नहीं दे रहा है।

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