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Thursday, May 11, 2017

कैशलेस इलाज के लिए दोनों तरह से करना होगा आवेदन, समस्या बना स्टेट हेल्थ कार्ड का ऑनलाइन आवेदन

कैशलेस के लिए आधार जरूरी : राज्य कर्मचारियों और उनके आश्रितों को कैशलेस इलाज तब ही मिलेगा, जब उनके पास आधार कार्ड होगा। सरकार ने तय किया है कि कर्मचारियों के परिवार में पांच वर्ष से अधिक आयु वाले सदस्यों को आधार होने पर ही यह सुविधा दी जाएगी।

लखनऊ : कैशलेस इलाज पाने के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की शर्त राज्य कर्मचारियों के एक बड़े हिस्से के लिए का सबब बन रही है। हालांकि, कर्मचारियों को प्रदेश के चार-पांच बड़े शहरों के ही सीजीएचएस अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी लेकिन, आवेदन सभी जिलों के कर्मचारियों के करना है। कर्मचारियों की इस जरूरत को देखते हुए बाजार ने तुरंत नई सेवा और इसके दाम गढ़ लिए हैं। साइबर कैफे में प्रत्येक आवेदन पत्र भरने व प्रिंट निकाल कर देने के लिए औसतन 100 रुपये का शुल्क तय हो गया है।


पिछली सरकार ने पहली मई से कैशलेस इलाज की सुविधा देने का दावा किया था और नई सरकार कैशलेस इलाज के आवेदन पत्र का परिचय भी अब तक अपने कर्मचारियों से नहीं करा पाई है। कर्मचारी आवेदन करने के तरीके को लेकर परेशान हैं और सरकार को बार-बार स्पष्टीकरण देकर इसे साफ करना पड़ रहा है। सरकार ने कर्मचारियों के सामने आवेदन के दो तरीके रखे हैं- ऑनलाइन यानी इंटरनेट के जरिये कंप्यूटर पर आवेदन और हार्ड कॉपी यानी कागज पर आवेदन, लेकिन यह दोनों तरीके एक-दूसरे के विकल्प नहीं हैं यानी कर्मचारियों को दोनों में से कोई एक तरीका नहीं चुनना है, बल्कि दोनों ही तरीकों से आवेदन करना होगा। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी बताते हैं कि कई जिलों से कर्मचारियों को ऑनलाइन आवेदन भरने में दिक्कत होने की शिकायत उनके पास आ रही है। कर्मचारी उन्हें बता रहे हैं कि जिलों के साइबर कैफे में ऑनलाइन आवेदन कराने का शुरू हो गया है।


तय नहीं दो अहम मुद्दे : कैशलेस इलाज को लेकर दो अहम बातें अब तक तय न होने से कर्मचारी आशंकित हैं। शासन द्वारा मांगे जाने के बाद सीजीएचएस वाले अस्पतालों की सूची राज्य सरकार को सौंप दी गई है लेकिन, शासन ने अब तक अस्पतालों के नाम फाइनल नहीं किए हैं। इसी तरह कैशलेस इलाज की सुविधा देने वाले अस्पतालों को रकम की प्रतिपूर्ति करने की समयसीमा भी अभी तय नहीं है। तिवारी कहते हैं कि अस्पतालों को समय पर भुगतान की नीति और योजना न बनी तो अस्पतालों की दिलचस्पी कम होगी और योजना भी प्रभावित होगी।

⚫ डीडीओ या कोषाधिकारी को भी देनी होगी आवेदन की हार्ड कॉपी

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